'जय बजरंगबली' के जयकारों से गूंजी राजधानी, लेटे हनुमान से हनुमान सेतु तक उमड़ा आस्था का सैलाब

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India News Live,Digital Desk : नवाबों के शहर लखनऊ में आज हनुमान जन्मोत्सव (2 अप्रैल 2026) का पर्व बेहद उल्लास और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। सुबह की पहली किरण के साथ ही राजधानी के प्रमुख हनुमान मंदिर भक्तों की भारी भीड़ से पट गए। 'जय श्री राम' और 'बजरंगबली की जय' के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है। गोमती तट से लेकर पुराने लखनऊ की गलियों तक, हर तरफ पवनपुत्र के जन्मोत्सव की रौनक दिखाई दे रही है।

प्रमुख मंदिरों में 'मंगला आरती' के साथ शुरू हुआ दर्शन का सिलसिला

शहर के सिद्धपीठ और प्राचीन मंदिरों में सुबह तड़के ही कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया:

हनुमान सेतु मंदिर: विश्वविद्यालय मार्ग स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर में सुबह भव्य मंगला आरती हुई। फूलों और दुधिया रोशनी से सजे मंदिर परिसर में हजारों भक्तों ने मत्था टेका।

अलीगंज का पुराना और नया हनुमान मंदिर: यहाँ भक्तों की लंबी कतारें सड़क तक पहुँच गईं। अलीगंज के इन ऐतिहासिक मंदिरों में विशेष श्रृंगार और पूजन किया गया।

लेटे हुए हनुमान जी (पक्का पुल): गोमती किनारे स्थित लेटे हुए हनुमान मंदिर में भक्तों ने सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।

दक्षिण मुखी हनुमान और हनुमत धाम: अमीनाबाद, चौक और डालीगंज स्थित मंदिरों में भी सुबह से ही सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ की स्वर लहरियां गूंजती रहीं।

भजन, कीर्तन और 'सुंदरकांड' का आध्यात्मिक प्रवाह

मंदिरों में केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि सामूहिक पाठ का भी आयोजन किया गया। "आरती कीजै हनुमान लला की..." और "जय हनुमान ज्ञान गुन सागर..." जैसे भजनों से मंदिर परिसर गुंजायमान रहे। कई भक्तों ने मंदिर प्रांगण में बैठकर ही हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ किया। स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भजनों ने माहौल को और भी आध्यात्मिक बना दिया।

जगह-जगह 'बड़े मंगल' जैसी रौनक और भंडारे

हालांकि लखनऊ में 'बड़ा मंगल' जेठ के महीने में मनाया जाता है, लेकिन आज हनुमान जन्मोत्सव पर भी शहर का नजारा वैसा ही दिखा।

भंडारा प्रसाद: गोमती नगर, हजरतगंज और इंदिरानगर जैसे इलाकों में कई संगठनों और भक्तों द्वारा भंडारे का आयोजन किया गया, जहाँ पूड़ी-सब्जी और हलवे का प्रसाद वितरित किया गया।

सजावट: मंदिरों को गेंदे के फूलों और आकर्षक विद्युत झालरों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो रात में देखने लायक होगा।

आस्था और साहस का पर्व: आचार्य की राय

हनुमान सेतु मंदिर के आचार्य चंद्रकांत द्विवेदी ने बताया कि चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह जन्मोत्सव केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। बजरंगबली साहस और सेवा के देवता हैं, और आज के दिन उनकी आराधना से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए सभी प्रमुख मंदिरों के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं और ट्रैफिक डायवर्जन भी लागू किया गया है ताकि श्रद्धालुओं को असुविधा न हो।