June 23 2026 12:17 am

यूपी PWD का 'बजट मैनेजमेंट' कमाल: 2500 करोड़ सरेंडर करने के बाद भी खर्च का बनाया रिकॉर्ड

Post

India News Live,Digital Desk : उत्तर प्रदेश लोक निर्माण विभाग (PWD) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में बजट खर्च करने के मामले में पिछले दो वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। विभाग ने वाराणसी के मालवीय सेतु जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए आवंटित भारी भरकम राशि सरेंडर करने के बावजूद, विकास कार्यों के कुल बजट का 85.95 प्रतिशत सफलतापूर्वक खर्च किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निरंतर निगरानी और विभाग की सक्रियता को इस सफलता का मुख्य कारण माना जा रहा है।

क्यों सरेंडर करने पड़े 2500 करोड़ रुपये?

विभाग को तीन प्रमुख मदों में लगभग 2500 करोड़ रुपये की धनराशि वापस (सरेंडर) करनी पड़ी, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

मालवीय सेतु (वाराणसी): इस पुल का निर्माण कार्य समय पर शुरू न हो पाने के कारण स्वीकृत 1500 करोड़ रुपये सरेंडर करने पड़े।

नाबार्ड और केंद्रीय सड़क निधि: इन दोनों मदों में पर्याप्त धनराशि का उपयोग न हो पाने या समय पर आवंटन न मिलने से लगभग 1000 करोड़ रुपये वापस हुए।

खर्च का लेखा-जोखा: पिछले वर्षों से बेहतर प्रदर्शन

तमाम चुनौतियों के बाद भी PWD ने इस साल विकास बजट को खर्च करने में नई ऊंचाइयां छुई हैं:

विकास मद में आवंटन: ₹32,676.49 करोड़।

वास्तविक खर्च: ₹28,086.82 करोड़ (85.95%)।

कुल बजट (स्थापना सहित): ₹36,293.95 करोड़ में से ₹30,581.98 करोड़ (84.26%) खर्च किए गए।

तुलनात्मक प्रगति:

| वित्तीय वर्ष | विकास कार्यों पर खर्च प्रतिशत |

| 2024-25 | 78% |

| 2023-24 | 81% |

| 2025-26 | 85.95% (रिकॉर्ड) |

सफलता का श्रेय: मुख्यमंत्री की मॉनिटरिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग

विभाग इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रमुख सचिव अजय चौहान की रणनीतिक कार्यप्रणाली को दे रहा है। पिछले दो महीनों से लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए फील्ड अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए जा रहे थे, जिसका नतीजा धरातल पर दिखाई दिया।

मिशन 2026-27: मई से शुरू होंगे नए काम

पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष एके द्विवेदी ने आगामी वित्तीय वर्ष (2026-27) के लिए अभी से कमर कस ली है:

शत-प्रतिशत लक्ष्य: इस वर्ष 100% बजट खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।

कार्ययोजना: अप्रैल महीने में ही विकास कार्यों की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।

मई से शुरुआत: वित्तीय स्वीकृतियां जारी कर मई से ही निर्माण कार्य शुरू कर दिए जाएंगे।

प्राथमिकता: जनप्रतिनिधियों (सांसद/विधायक) द्वारा प्रस्तावित पिछले वर्ष के अवशेष कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा।