लखनऊ अग्निकांड पर 100 मौतों की अफवाह फैलाने वाला इंजीनियर गिरफ्तार, चित्रकूट का है रहने वाला
India News Live,Digital Desk : विकासनगर की झुग्गी बस्ती में हुए भीषण अग्निकांड को लेकर सोशल मीडिया पर सनसनीखेज अफवाह फैलाने वाले युवक को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। इंस्टाग्राम पर '100 से ज्यादा लोगों के जिंदा जलने' की झूठी खबर पोस्ट करने वाला आरोपी सुधाकर त्रिपाठी पेशे से एक सिविल इंजीनियर है, जो मूल रूप से चित्रकूट का निवासी है।
इंस्टाग्राम पर फैलाई थी मौत की झूठी खबर
पुलिस के मुताबिक, आरोपी सुधाकर त्रिपाठी लखनऊ की एक निजी कंपनी में सिविल इंजीनियर के पद पर कार्यरत है। 15 अप्रैल को जब विकासनगर सेक्टर-12 की झुग्गी बस्ती में आग लगी, तब सुधाकर ने मौके पर पहुंचकर वीडियो बनाया था। उसने अपनी इंस्टाग्राम आईडी news_artery से वीडियो पोस्ट किया और भ्रामक जानकारी साझा की।
झूठा दावा: सुधाकर ने लिखा कि मीडिया केवल 4 मौतें दिखा रहा है, जबकि असल में 100 से ज्यादा लोग जलकर मर चुके हैं।
पुलिस पर आरोप: उसने पुलिस के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी की और लोगों को भड़काने की कोशिश की।
थाना प्रभारी आलोक कुमार सिंह ने बताया कि साइबर सेल की मदद से आरोपी को लोकेट किया गया और दरोगा भानु प्रताप सिंह की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
मदद के लिए उमड़ा शहर: पीड़ितों के बीच बंटी राहत सामग्री
एक तरफ जहां अफवाहों ने माहौल बिगाड़ने की कोशिश की, वहीं दूसरी तरफ लखनऊ के लोग और संस्थाएं पीड़ितों की मदद के लिए दिल खोलकर आगे आए हैं।
संस्थाओं ने बढ़ाया हाथ
भारतीय खाद्य निगम (FCI): एफसीआई की टीम ने रविवार सुबह मौके पर पहुंचकर करीब 250 राशन किट वितरित किए।
बृज की रसोई: इंडियन हेल्पलाइन सोसाइटी द्वारा संचालित 'बृज की रसोई' ने साप्ताहिक सेवा के तहत प्रभावित परिवारों को छोले-चावल खिलाए।
लखनऊ बंगिय नागरिक समाज: संयोजक पीके दत्ता के नेतृत्व में समाज के सदस्यों ने पीड़ितों से मुलाकात की और उन्हें राहत सामग्री के साथ सांत्वना दी।
कर्तव्यम् परिवार: इस संस्था ने आईटी कंपनी और अन्य प्रतिष्ठानों के सहयोग से झुग्गीवासियों को रोजमर्रा की जरूरत का सामान मुहैया कराया।
क्या था मामला?
विकासनगर सेक्टर-12 की स्लम बस्ती में लगी इस आग ने 200 से ज्यादा झोपड़ियों को अपनी चपेट में ले लिया था। आग इतनी भीषण थी कि 100 से ज्यादा गैस सिलेंडरों में धमाके हुए थे और धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर से देखा जा सकता था। इस हादसे में कई परिवारों की पूरी गृहस्थी जलकर राख हो गई थी।