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September 14 2026 04:50 pm

यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटा निर्वाचन आयोग: लखनऊ में 33 जिलों के डीएम संग महामंथन

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उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। चुनाव की औपचारिक घोषणा और आचार संहिता से पहले मशीनरी को दुरुस्त करने के क्रम में सोमवार को राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया प्रशासन एवं प्रबंध अकादमी में एक दिवसीय उच्चस्तरीय चुनावी कार्यशाला (Workshop) का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश के 7 मंडलों के अंतर्गत आने वाले 33 जनपदों के जिला निर्वाचन अधिकारियों (जिलाधिकारी/डीएम), उप जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी (फर्स्ट लेवल चेकिंग) सुपरवाइजरों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का मुख्य फोकस इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट (VVPAT) की फर्स्ट लेवल चेकिंग की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर रहा।

पारदर्शिता और गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं: मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा

कार्यशाला को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने सभी जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि चुनाव की शुचिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आयोग के दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए।

उन्होंने कहा कि ईवीएम और वीवीपैट की फर्स्ट लेवल चेकिंग (FLC) चुनावी प्रक्रिया की मजबूत आधारशिला है। आयोग किसी भी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक चूक बर्दाश्त नहीं करेगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि एफएलसी की पूरी कार्यवाही मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाएगी। दलों के संज्ञान और सहभागिता के साथ ही चेकिंग, सीलिंग और वेयरहाउस के ताले खोलने व बंद करने की प्रक्रिया संचालित होगी, ताकि किसी भी प्रकार के संशय या अविश्वास की गुंजाइश न रहे।

7 मंडलों के 33 जिलों के आला प्रशासनिक अफसर रहे मौजूद

राजधानी लखनऊ में आयोजित इस वृहद कार्यशाला में लखनऊ, कानपुर, मुरादाबाद, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या और देवीपाटन मंडल के जिला निर्वाचन अधिकारी शामिल हुए। बैठक में लखनऊ के डीएम विशाख जी, कानपुर नगर के डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, अयोध्या के डीएम शशांक त्रिपाठी, रायबरेली की डीएम हर्षिता माथुर, सीतापुर के डीएम डॉ. राजागणपति आर., मुरादाबाद के डीएम डॉ. राजेन्द्र पेंसिया, झांसी के डीएम गौरांग राठी, चित्रकूट के डीएम पुलकित गर्ग, बांदा के डीएम अमित आसेरी और जालौन के डीएम समीर समेत 33 जनपदों के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

इस दौरान आयोग के तकनीकी विशेषज्ञों ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ECIL) के इंजीनियर्स द्वारा की जाने वाली तकनीकी जांच, मॉक पोल, मॉक वोटिंग के प्रतिशत और एरर कोड्स के त्वरित समाधान के प्रोटोकॉल पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया।

वेयरहाउस सुरक्षा, सीसीटीवी निगरानी और स्ट्रॉन्ग रूम के कड़े मानक

कार्यशाला में मशीनों के भंडारण, लॉजिस्टिक्स और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा व्यवस्था की भी बिंदुवार समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि:

डबल लॉक सिस्टम और सीसीटीवी कवरेज: सभी जनपदों के ईवीएम वेयरहाउस में 24 घंटे अनवरत सीसीटीवी निगरानी होनी चाहिए और उसका बैकअप सुरक्षित रखा जाए।

फायर सेफ्टी और लॉगबुक: वेयरहाउस में अग्निशमन उपकरणों की कार्यक्षमता और प्रत्येक मूवमेंट का नियमित लॉगबुक में अंकन अनिवार्य होगा।

परिवहन में जीपीएस ट्रैकिंग: वेयरहाउस से मतदान केंद्रों तक मशीनों के परिवहन के दौरान उपयोग किए जाने वाले वाहनों में अनिवार्य रूप से जीपीएस (GPS) ट्रैकिंग डिवाइस सक्रिय रहेगी।

गौतमबुद्ध नगर और वाराणसी के बाद लखनऊ में हुआ तीसरा बड़ा चरण

निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के सभी 75 जिलों के प्रशासनिक अमले को चुनावी प्रक्रिया में दक्ष बनाने के लिए यह प्रशिक्षण चरणबद्ध तरीके से चलाया जा रहा है। इससे पूर्व पहले चरण में गौतमबुद्ध नगर में 21 जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों और दूसरे चरण में वाराणसी में 21 जिलों के अधिकारियों को एफएलसी की विशेष ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

सोमवार को लखनऊ में शेष 33 जनपदों की कार्यशाला पूरी होने के साथ ही पूरे प्रदेश में जिला निर्वाचन अधिकारियों और एफएलसी सुपरवाइजरों का प्रशिक्षण कार्य पूरा हो गया है। निर्वाचन आयोग का स्पष्ट संदेश है कि समय रहते सभी मशीनरी, प्रशासनिक अमले और तकनीकी संसाधनों को चाक-चौबंद कर लिया जाए, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव को पूरी तरह निर्विघ्न और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराया जा सके।