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September 14 2026 05:20 pm

काशी-हरिद्वार के बाद अब लंदन में गूंजे 'हर हर गंगे' के जयकारे: टेम्स नदी के किनारे हुई भव्य गंगा आरती

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काशी के दशाश्वमेध घाट और हरिद्वार के हर की पौड़ी पर होने वाली दिव्य गंगा आरती की अलौकिक छवि अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन में भी जीवंत हो उठी है। लंदन की ऐतिहासिक टेम्स नदी (River Thames) के तट पर भारतीय सनातन परंपरा और संस्कृति का एक बेहद अद्भुत व भव्य दृश्य देखने को मिला, जब सैकड़ों की संख्या में जुटे भारतीय प्रवासियों और स्थानीय नागरिकों ने वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और डमरू की गूंज के बीच महाआरती की। ब्रिटिश संसद (वेस्टमिंस्टर पैलेस) और लंदन आई के ठीक सामने टेम्स नदी के किनारे जब विशाल पीतल के दीपदान जगमगाए, तो पूरा माहौल 'हर-हर गंगे' और 'ॐ नमः शिवाय' के उद्घोष से भक्तिमय हो उठा।

पीतल के दीपदान और वैदिक ऋचाओं से महका टेम्स का किनारा

इस ऐतिहासिक महाआरती का आयोजन बिल्कुल उसी शास्त्रीय पद्धति और भव्यता से किया गया, जैसी आरती प्रतिदिन काशी और ऋषिकेश के गंगा तटों पर देखने को मिलती है।

पारंपरिक परिधान—धोती-कुर्ता और अंगवस्त्रम पहने पुरोहितों ने विशेष मंच पर खड़े होकर हाथ में भारी पीतल के बहुमंजिला दीपदान उठाए और वैदिक ऋचाओं के सस्वर पाठ के साथ टेम्स के जल को नमन किया। धूप, लोबान, कपूर की सुगंध और घंटियों की लयबद्ध ध्वनि ने टेम्स नदी के घाट को पूरी तरह भारतीय तीर्थस्थल के रंग में रंग दिया। वहां मौजूद विदेशी पर्यटक और स्थानीय ब्रिटिश नागरिक भी इस अनूठी आध्यात्मिक ऊर्जा को देखकर मंत्रमुग्ध रह गए और अपने कैमरों में इस पल को कैद करते नजर आए।

भारतीय संस्कृति और जल संरक्षण का वैश्विक संदेश

आयोजकों और प्रवासी भारतीय संगठनों के अनुसार, टेम्स नदी के तट पर गंगा आरती के आयोजन का मकसद केवल धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करना नहीं था, बल्कि इसके जरिए भारतीय संस्कृति के 'वसुधैव कुटुंबकम' और प्रकृति संरक्षण के दर्शन को पूरी दुनिया तक पहुंचाना था।

संबोधन के दौरान संतों और प्रबुद्धजनों ने कहा कि सनातन संस्कृति में नदियों को केवल पानी का स्रोत नहीं, बल्कि जीवनदायिनी 'मां' का दर्जा दिया गया है। जैसे भारत में मां गंगा जीवन और मोक्ष का प्रतीक हैं, वैसे ही टेम्स नदी भी लंदन की जीवनरेखा रही है। इस आयोजन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर स्वच्छ जल, नदियों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का गहरा आध्यात्मिक संदेश दिया गया।

ब्रिटिश सांसदों और प्रवासियों ने लिया बढ़-चढ़कर हिस्सा

इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए लंदन, बर्मिंघम, मैनचेस्टर और आसपास के शहरों से बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय परिवार जुटे।

कार्यक्रम में ब्रिटेन के कई प्रमुख सांसद, स्थानीय काउंसलर और भारतीय उच्चायोग के वरिष्ठ राजनयिक भी शामिल हुए। प्रवासी भारतीयों का कहना था कि विदेश में रहकर भी अपनी मिट्टी, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहने का यह एक भावुक और अविस्मरणीय अनुभव रहा। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि लंदन की टेम्स नदी के किनारे उन्हें काशी और हरिद्वार की वही दिव्य अनुभूति प्राप्त होगी।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा विहंगम वीडियो

टेम्स नदी के किनारे संपन्न हुई इस भव्य आरती के वीडियो और तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।

लोग इसे भारतीय संस्कृति के वैश्विक विस्तार और 'सॉफ्ट पावर' का अनुपम उदाहरण बता रहे हैं। उपयोगकर्ताओं का कहना है कि जिस ब्रिटिश साम्राज्य ने सदियों तक भारत पर शासन किया, आज उसी देश के दिल कहे जाने वाले लंदन में मां गंगा की आरती का शंखनाद गूंजना हर भारतीय के लिए गर्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक है।