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July 28 2026 12:13 pm

सावधान! रुद्राक्ष पहनने में न करें ये बड़ी गलतियां, फायदे की जगह हो सकता है भारी नुकसान; जानें सही नियम और विधि

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नई दिल्ली। सनातन धर्म में रुद्राक्ष को बेहद पवित्र और पूजनीय माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है, इसलिए इसे साक्षात महादेव का स्वरूप माना जाता है। रुद्राक्ष धारण करने से न केवल मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है, बल्कि यह सेहत और समृद्धि के लिए भी अचूक माना गया है।

लेकिन, क्या आप जानते हैं कि रुद्राक्ष एक अत्यंत संवेदनशील और दिव्य वस्तु है? आजकल लोग इसे एक सामान्य फैशन एक्सेसरी या बिना नियमों को जाने गले में पहन लेते हैं। ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार, यदि रुद्राक्ष को सही नियमों के साथ न पहना जाए, तो इसकी दिव्य शक्ति तो खत्म होती ही है, साथ ही इसके गंभीर और अशुभ परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं। आइए जानते हैं रुद्राक्ष धारण करने की सही शास्त्रीय विधि और जरूरी नियम।

रुद्राक्ष की माला खरीदते समय इन बातों का रखें विशेष ध्यान

बाजार से जब भी रुद्राक्ष या इसकी माला खरीदें, तो सबसे पहले उसकी प्रामाणिकता और बनावट की जांच करें। ध्यान रहे कि रुद्राक्ष के दाने कहीं से भी टूटे, चटके या खंडित न हों। शास्त्रों में 108 दानों वाली रुद्राक्ष माला को सबसे उत्तम और फलदायी माना गया है।

धागे के चयन में भी विशेष सावधानी बरतें। रुद्राक्ष की माला को हमेशा लाल या पीले रंग के रेशमी या सूती धागे में ही पिरोना चाहिए। भूलकर भी काले धागे का इस्तेमाल न करें। यदि आप इसे सोने या चांदी की चेन में बनवाना चाहते हैं, तो कारीगर से कहें कि वह इसे इस तरह डिजाइन करे कि रुद्राक्ष का दाना सीधे आपकी त्वचा (Skin) को स्पर्श करता रहे।

बिना शुद्ध और जागृत किए रुद्राक्ष पहनना है वर्जित, यह है सही विधि

अक्सर लोग बाजार से रुद्राक्ष लाते हैं और सीधे गले में डाल लेते हैं, जो कि सबसे बड़ी भूल है। बिना शुद्धि और प्राण-प्रतिष्ठा के रुद्राक्ष धारण करने से कोई लाभ नहीं मिलता।

इसे जागृत करने के लिए किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के सोमवार का दिन चुनें। सबसे पहले माला को गंगाजल से अच्छी तरह धो लें। इसके बाद इसे पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, गोमूत्र और गोबर) में कुछ देर के लिए डुबोकर पवित्र करें। फिर साफ पानी से धोकर इसे एक साफ सफेद कपड़े से पोंछ लें। अब पूजा स्थान पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर रुद्राक्ष रखें और उस पर धूप, दीप, अक्षत और फूल अर्पित करें। इसे शिवलिंग से स्पर्श कराएं और कम से कम 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए पूरी श्रद्धा के साथ धारण करें।

रुद्राक्ष धारण करने के कड़े नियम: कब उतारना है जरूरी?

रुद्राक्ष की पवित्रता बनाए रखने के लिए शास्त्रों में कुछ बेहद कड़े नियम बताए गए हैं, जिनका पालन हर हाल में किया जाना चाहिए:

स्नान के बाद ही पहनें: रुद्राक्ष को हमेशा सुबह स्नान करने के बाद, साफ-सुथरे शरीर और मन से ही धारण करना चाहिए।

सोते समय उतार दें: रात को सोने से पहले रुद्राक्ष की माला को उतारकर किसी पवित्र स्थान या मंदिर में रख देना चाहिए। सोते समय शरीर की अशुद्धि और माला के टूटने का डर रहता है।

इन जगहों पर जाने से बचें: शौच जाते समय, किसी के अंतिम संस्कार (श्मशान घाट) में जाते समय, या घर में सूतक काल (बच्चे के जन्म या किसी की मृत्यु के समय का अशुद्ध समय) के दौरान रुद्राक्ष को तुरंत उतार देना चाहिए।

भोजन पर नियंत्रण: रुद्राक्ष धारण करने वाले व्यक्ति को मांस, मदिरा (शराब) और तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।

दूसरों से न बदलें: अपनी रुद्राक्ष माला कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति को पहनने के लिए न दें और न ही किसी और की पहनी हुई माला खुद पहनें। हर व्यक्ति की ऊर्जा अलग होती है, इसलिए इसे निजी रखें।

इन गलतियों से रूठ सकते हैं महादेव, मिल सकते हैं विपरीत परिणाम

यदि आप अपवित्र हाथों से रुद्राक्ष को छूते हैं या ऊपर बताए गए नियमों की अनदेखी करते हैं, तो रुद्राक्ष का नकारात्मक प्रभाव शुरू हो सकता है। अशुद्ध अवस्था में इसे पहने रखने से जीवन में मानसिक तनाव, कार्यों में बाधा और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां खड़ी हो सकती हैं। रुद्राक्ष शिव का साक्षात आशीर्वाद है, इसकी दिव्यता का सम्मान करना हर धारक का कर्तव्य है।

सही तरीके से पहनने पर मिलते हैं ये चमत्कारी फायदे

यदि आप पूरी अटूट श्रद्धा और नियमों का पालन करते हुए रुद्राक्ष धारण करते हैं, तो आपके जीवन में चमत्कारिक बदलाव देखने को मिलते हैं। यह आपके ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और दिल की बीमारियों से बचाने में सहायक माना जाता है। इससे एकाग्रता और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। चारों तरफ से आ रही नकारात्मक शक्तियां और तंत्र-मंत्र के बुरे असर समाप्त हो जाते हैं और जातक पर भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा हमेशा बनी रहती है।