गाजियाबाद में ‘दस्तक अभियान’ का आगाज: 1000 टीमें करेंगी 5 लाख घरों की स्क्रीनिंग, जानें क्यों जरूरी है आभा आईडी

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India News Live,Digital Desk : संचारी रोगों (Infectious Diseases) पर लगाम कसने के लिए गाजियाबाद प्रशासन ने कमर कस ली है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 से पूरे जिले में 'दस्तक अभियान' की शुरुआत हो रही है, जो 30 अप्रैल तक जारी रहेगा। इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की 1000 से अधिक टीमें घर-घर जाकर बीमारियों की पहचान करेंगी और लोगों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करेंगी।

अभियान की मुख्य बातें

लक्ष्य: जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग 5 लाख घरों तक पहुंचना।

स्क्रीनिंग: टीमें मुख्य रूप से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और स्क्रब टायफस के संदिग्ध मरीजों की पहचान करेंगी।

डिजिटल पहल: इस बार पहली बार स्क्रीनिंग के साथ-साथ मौके पर ही लोगों की आभा आईडी (ABHA ID) भी बनाई जाएगी।

आभा आईडी (ABHA ID) क्यों है जरूरी?

सरकार का लक्ष्य स्वास्थ्य सेवाओं का पूरी तरह डिजिटलीकरण करना है। आभा आईडी (Ayushman Bharat Health Account) के कई फायदे हैं:

मेडिकल हिस्ट्री एक जगह: इस आईडी के बनने के बाद आप देश के किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में जाएं, आपकी पुरानी बीमारियों, टेस्ट रिपोर्ट और इलाज का पूरा इतिहास डॉक्टर की स्क्रीन पर एक क्लिक में उपलब्ध होगा।

कागजों से मुक्ति: आपको भारी-भरकम फाइलें या पुरानी पर्चियां साथ ले जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

त्वरित पंजीकरण: अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर लंबी कतारों में लगने के बजाय सिर्फ आईडी नंबर बताकर तुरंत पंजीकरण पर्ची प्राप्त की जा सकेगी।

आभा आईडी बनवाने की प्रक्रिया

जब स्वास्थ्य टीम आपके घर आए, तो आप अपनी आभा आईडी बनवा सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित आवश्यकताएं होंगी:

आधार कार्ड: पहचान के सत्यापन के लिए आधार कार्ड दिखाना होगा।

ओटीपी (OTP): पंजीकरण के समय आपके मोबाइल पर एक ओटीपी आएगा, जिसे टीम को बताना अनिवार्य होगा।

गाजियाबाद की वर्तमान स्थिति

जिला सर्विलांस अधिकारी डॉ. आरके गुप्ता के अनुसार, जिले की लगभग 50 लाख की आबादी में से अब तक केवल 9 लाख लोगों की ही आभा आईडी बन पाई है। इस अभियान के जरिए इस संख्या को तेजी से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।