June 19 2026 01:58 am

स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्यता पर उपभोक्ता परिषद का विरोध तेज, सुप्रीम कोर्ट आदेश का हवाला देकर विकल्प की मांग

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India News Live,Digital Desk : पावर कॉरपोरेशन द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर को अनिवार्य करने के फैसले का विरोध अब और तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सोमवार को विद्युत नियामक आयोग में एक प्रस्ताव दाखिल करते हुए उपभोक्ताओं को विकल्प देने की मांग की है। परिषद ने अपने प्रस्ताव के साथ सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की प्रति भी सौंपी, जिसमें कहा गया है कि प्रीपेड मीटर उपभोक्ता की इच्छा पर आधारित विकल्प होना चाहिए, न कि जबरन थोपे जाने वाली व्यवस्था।

परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने आयोग अध्यक्ष अरविंद कुमार को बताया कि दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने “माधव केआरजी बनाम पंजाब स्टेट पावर कारपोरेशन लिमिटेड” मामले में स्पष्ट रूप से कहा था कि मौजूदा उपभोक्ता यदि प्रीपेड मीटर चुनते हैं, तो उनकी जमानत राशि समायोजन के माध्यम से लौटाई जाए। इससे साफ है कि प्रीपेड मीटर विकल्प है, अनिवार्यता नहीं।

वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन उपभोक्ताओं पर दबाव बनाकर प्रीपेड मीटर लगवा रहा है, जो गलत है। उन्होंने मांग की कि आयोग स्पष्ट रूप से घोषणा करे कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर पूरी तरह वैकल्पिक हैं, ताकि उपभोक्ताओं के बीच फैला भ्रम खत्म हो सके।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए कनेक्शन पर उपभोक्ताओं से 6016 रुपये वसूले जा रहे हैं, जबकि मीटर की वास्तविक कीमत 2600 से 2800 रुपये के बीच है। परिषद ने इस वसूली पर तुरंत रोक लगाने और अतिरिक्त वसूली गई राशि वापस कराने की मांग की है। इसके साथ ही, कास्ट डेटा बुक को अंतिम रूप देने के लिए सप्लाई कोड रिव्यू पैनल की सब कमेटी की जल्द बैठक बुलाने की बात भी कही गई है।