Devshayani Ekadashi 2026: क्या आपको मालूम हैं विष्णु जी के 108 नाम? देवशयनी एकादशी पर जाप से चमकेगी किस्मत
सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी का दिन अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी शुभ तिथि से भगवान श्री हरि विष्णु अगले चार महीनों के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं। ऐसे में चातुर्मास के प्रारंभ होने से पूर्व देवशयनी एकादशी के दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने और भगवान विष्णु के 108 दिव्य नामों का जाप करने का विशेष विधान है। माना जाता है कि आज के दिन सच्चे मन से विष्णु नामावली का पाठ करने से साधक की हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
विष्णु नामावली का पाठ क्यों है बेहद खास?
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए वैसे तो कई मंत्रों का विधान है, लेकिन उनके 108 नामों का उच्चारण सबसे सरल और प्रभावशाली माना जाता है। इससे घर में सुख-शांति, समृद्धि आती है और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
देवशयनी एकादशी पर करें भगवान विष्णु के इन 108 नामों का जाप
ऊँ श्री विष्णवे नम:
ऊँ श्री वासुदेवाय नम:
ऊँ श्री सुरेशाय नम:
ऊँ श्री कृष्णाय नम:
ऊँ श्री प्रजापतये नम:
ऊँ श्री हिरण्यगर्भाय नम:
ऊँ श्री विश्वकर्मणे नम:
ऊँ श्री सर्वदर्शनाय नम:
ऊँ श्री ईश्वराय नम:
ऊँ श्री केशवाय नम:
ऊँ श्री क्षेत्र क्षेत्राज्ञाय नम:
ऊँ श्री विराट पुरुषाय नम:
ऊँ श्री पुरुषोत्तमाय नम:
ऊँ श्री परमात्मने नम:
ऊँ श्री हृषीकेशाय नम:
ऊँ श्री पद्मनाभाय नम:
ऊँ श्री सर्वेश्वराय नम:
ऊँ श्री अच्युताय नम:
ऊँ श्री पुण्डरीक्षाय नम:
ऊँ श्री नर-नारायणा नम:
ऊँ श्री जनार्दनाय नम:
ऊँ श्री लोकाध्यक्षाय नम:
ऊँ श्री चतुर्भुजाय नम:
ऊँ श्री नारायणाय नम:
ऊँ श्री सिद्ध संकल्पयाय नम:
ऊँ श्री महेन्द्राय नम:
ऊँ श्री वामनाय नम:
ऊँ श्री अनन्तजिते नम:
ऊँ श्री महीधराय नम:
ऊँ श्री धर्माध्यक्षाय नम:
ऊँ श्री उपेन्द्राय नम:
ऊँ श्री महाबलाय नम:
ऊँ श्री माधवाय नम:
ऊँ श्री गोविन्दाय नम:
ऊँ श्री सहस्त्राक्षाय नम:
ऊँ श्री विश्वातमने नम:
ऊँ श्री गरुडध्वजाय नम:
ऊँ श्री लक्ष्मीपतये नम:
ऊँ श्री दामोदराय नम:
ऊँ श्री कमलापतये नम:
ऊँ श्री परमेश्वराय नम:
ऊँ श्री धनेश्वराय नम:
ऊँ श्री मुकुन्दाय नम:
ऊँ श्री आनन्दाय नम:
ऊँ श्री सत्यधर्माय नम:
ऊँ श्री चक्रगदाधराय नम:
ऊँ श्री वाराहाय नम:
ऊँ श्री नरसिंहाय नम:
ऊँ श्री रामाय नम:
ऊँ श्री हयग्रीवाय नम:
ऊँ श्री शोकनाशनाय नम:
ऊँ श्री विशुद्धात्मने नम:
ऊँ श्री धनंजाय नम:
ऊँ श्री ब्राह्मणप्रियाय नम:
ऊँ श्री यदुश्रेष्ठाय नम:
ऊँ श्री लोकनाथाय नम:
ऊँ श्री भगवते नम:
ऊँ श्री शान्तिदाय नम:
ऊँ श्री गोपतये नम:
ऊँ श्री श्रीपतये नम:
ऊँ श्री श्रीहरये नम:
ऊँ श्री श्रीरघुनाथाय नम:
ऊँ श्री कपिलेश्वराय नम:
ऊँ श्री भक्तवत्सलाय नम:
ऊँ श्री चतुर्मूर्तये नम:
ऊँ श्री एकपदे नम:
ऊँ श्री सुलोचनाय नम:
ऊँ श्री सर्वतोमुखाय नम:
ऊँ श्री सप्तवाहनाय नम:
ऊँ श्री वंशवर्धनाय नम:
ऊँ श्री योगिने नम:
ऊँ श्री धनुर्धराय नम:
ऊँ श्री प्रीतिवर्धनाय नम:
ऊँ श्री प्रभवे नम:
ऊँ श्री प्रकटाय नम:
ऊँ श्री गगनसदृश्यमाय नम:
ऊँ श्री हंसाय नम:
ऊँ श्री व्यासाय नम:
ऊँ श्री लक्ष्मीकान्ताय नम:
ऊँ श्री अक्रूराय नम:
ऊँ श्री दु:स्वपननाशनाय नम:
ऊँ श्री भूभवे नम:
ऊँ श्री प्राणदाय नम:
ऊँ श्री देवकी नन्दनाय नम:
ऊँ श्री शंख भृते नम:
ऊँ श्री कमलनयनाय नम:
ऊँ श्री जगतगुरूवे नम:
ऊँ श्री सनातनाय नम:
ऊँ श्री सच्चिदानन्दाय नम:
ऊँ श्री द्वारकानाथाय नम:
ऊँ श्री दानवेन्द्र विनाशकाय नम:
ऊँ श्री दयानिधये नम:
ऊँ श्री एकात्मने नम:
ऊँ श्री शत्रुजिते नम:
ऊँ श्री घनश्यामाय नम:
ऊँ श्री सर्वयज्ञफलप्रदाय नम:
ऊँ श्री जरा-मरण-वर्जिताय नम:
ऊँ श्री यशोदानन्दनाय नम:
ऊँ श्री परमधार्मिकाय नम:
जाप करते समय रखें इन बातों का ध्यान
देवशयनी एकादशी के दिन सुबह जल्दी स्नान करके पीले वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाकर शुद्ध मन व श्रद्धा भाव के साथ इन 108 नामों का जाप करें। पूजा के अंत में भगवान विष्णु को तुलसी दल और पीले फलों का भोग लगाएं।