Bangladesh Political Crisis: राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन का इस्तीफा; शेख हसीना से फोन कॉल के विवाद के बाद बड़ा फैसला
पड़ोसी देश बांग्लादेश में अगस्त 2024 के तख्तापलट के बाद शुरू हुआ राजनीतिक गतिरोध थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने शुक्रवार को अपने कार्यकाल के समाप्त होने से दो वर्ष पूर्व ही पद से त्यागपत्र (Resignation) दे दिया है।
अपदस्थ पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के करीबी माने जाने वाले 76 वर्षीय शहाबुद्दीन के इस्तीफे की मुख्य वजह निर्वासित नेता शेख हसीना के साथ हुई एक गोपनीय फोन कॉल का उजागर होना और सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार का बढ़ता राजनीतिक दबाव माना जा रहा है।
शेख हसीना से फोन कॉल पर शुरू हुआ था विवाद
सूत्रों और बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टीं के अनुसार, मई में लंदन में इलाज के दौरान राष्ट्रपति शहाबुद्दीन ने भारत में निर्वासित पूर्व पीएम शेख हसीना से संपर्क साधने का प्रयास किया था।
बीएनपी सरकार से तनाव: इस फोन कॉल का खुलासा होते ही तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी सरकार और राष्ट्रपति भवन (बंगभवन) के बीच तल्खी बढ़ गई।
हसीना की वापसी का ऐलान: हाल ही में शेख हसीना द्वारा इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की घोषणा के बाद बीएनपी सरकार ने राष्ट्रपति पर अपना रुख और कड़ा कर दिया था।
स्वास्थ्य कारणों का हवाला, संसद अध्यक्ष हफीजुद्दीन बने कार्यवाहक राष्ट्रपति
इस्तीफे के बाद पत्रकारों से बातचीत में शहाबुद्दीन ने कहा कि वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे हैं।
संसद अध्यक्ष को सौंपा पत्र: बंगभवन के प्रवक्ता के अनुसार, त्यागपत्र संसद के अध्यक्ष (Speaker) हफीजुद्दीन अहमद को सौंप दिया गया है।
संवैधानिक प्रावधान: बांग्लादेश के संविधान के अनुसार, नए राष्ट्रपति का चुनाव होने तक संसद अध्यक्ष हफीजुद्दीन अहमद ही देश के कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में दायित्व संभालेंगे।
अवामी लीग काल का आखिरी संवैधानिक स्तंभ भी ढहा
अप्रैल 2023 में 5 साल के कार्यकाल के लिए चुने गए पूर्व न्यायाधीश और 1971 के मुक्ति संग्राम सेनानी शहाबुद्दीन, अवामी लीग शासन का एकमात्र ऐसा संवैधानिक चेहरा थे जो अगस्त 2024 के हिंसक छात्र आंदोलन के बाद भी पद पर बने रहे थे।
फरवरी 2026 के राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में बीएनपी की जीत और नई सरकार के गठन के बाद से ही उन्हें हटाए जाने की चर्चाएं तेज थीं। शहाबुद्दीन के इस इस्तीफे के साथ ही बांग्लादेश की राजनीति में शेख हसीना युग के अंतिम प्रशासनिक अवशेष का भी अंत हो गया है।