'भाई, टीम के लिए जो सही हो वही करो': संजू सैमसन को प्लेइंग-11 से बाहर करने पर कैसा था उनका रिएक्शन? सूर्यकुमार यादव ने किया बड़ा खुलासा

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मुंबई/नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट टीम में प्लेइंग-11 का चयन हमेशा से एक पेचीदा और चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है, विशेष रूप से तब जब बेंच पर बैठा खिलाड़ी भी शीर्ष स्तर का मैच-विनर हो। केरल के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज संजू सैमसन (Sanju Samson) के अंतरराष्ट्रीय करियर में कई ऐसे मोड़ आए हैं जब शानदार प्रदर्शन के बावजूद टीम संयोजन (Team Combination) और रणनीतिक संतुलन के चलते उन्हें अंतिम एकादश से बाहर बैठना पड़ा है। अक्सर ऐसे फैसलों के बाद खिलाड़ियों के भीतर निराशा या असंतोष देखने को मिलता है, लेकिन भारतीय टी-20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने खुलासा किया है कि जब उन्होंने संजू सैमसन को टीम से बाहर रखने का फैसला सुनाया था, तब संजू का रिएक्शन दिल जीतने वाला और असाधारण था। एक विस्तृत साक्षात्कार में सूर्या ने भारतीय ड्रेसिंग रूम के अंदरूनी संवाद का पर्दाफाश करते हुए बताया कि कैसे संजू ने बिना किसी शिकायत के टीम के हित को अपने व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखा और एक सच्चे टीम मैन की मिसाल पेश की।

'भाई, टीम के लिए जो सही हो वो करो': जब सूर्या ने संजू को प्लेइंग-11 से बाहर करने की दी थी खबर

सूर्यकुमार यादव ने उस भावुक और संवेदनशील पल को याद करते हुए बताया कि एक कप्तान के तौर पर अपने ही साथी और इन-फॉर्म खिलाड़ी को यह बताना सबसे कठिन काम होता है कि वह अगला मैच नहीं खेल रहा है। सूर्या ने बताया कि वे किसी भी खिलाड़ी को अंधेरे में रखने या मैच से ठीक पहले झटका देने के सख्त खिलाफ हैं, इसलिए वे टॉस से काफी पहले खिलाड़ी से आमने-सामने बैठकर बात करते हैं।

सूर्या ने संजू सैमसन के साथ हुई उस बातचीत का ब्योरा देते हुए कहा, "जब हमें टीम संयोजन और परिस्थितियों के आधार पर संजू को बाहर बैठाने का कड़ा फैसला लेना पड़ा, तो मैं सीधे उनके पास गया। मैंने उनसे कहा, 'संजू, मुझे तुमसे एक जरूरी बात करनी है। हम इस मैच के लिए तुम्हें अंतिम एकादश में शामिल नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि पिच की स्थिति और गेंदबाजी विकल्पों के चलते हमें एक अलग संतुलन की दरकार है।' मुझे लगा था कि वे निराश होंगे, जो स्वाभाविक भी था। लेकिन संजू ने मेरी बात सुनी, मुस्कुराए और कहा—'सूर्या भाई, आपको बिल्कुल भी संकोच करने की जरूरत नहीं है। आप कप्तान हैं और टीम जो चाहेगी, मैं वही करूंगा। टीम की जीत सबसे पहले है, मैं बाहर बैठकर भी पानी पिलाने और साथियों का हौसला बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।' संजू का यह जवाब सुनकर मेरा दिल भर आया और उनके प्रति मेरा सम्मान कई गुना बढ़ गया।"

ड्रेसिंग रूम में पारदर्शी संवाद: सूर्या और गंभीर की 'नो-फिल्टर' कप्तानी शैली

भारतीय टी-20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव और मुख्य कोच गौतम गंभीर की अगुवाई में टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम में एक नए और पारदर्शी संवाद का युग शुरू हुआ है। सूर्या का मानना है कि जब नेतृत्व करने वाला व्यक्ति खिलाड़ियों के साथ खुला और ईमानदार रहता है, तो टीम के भीतर आपसी अविश्वास या असुरक्षा की कोई भावना नहीं पनपती।

सूर्या ने बताया कि पहले के दौर में कई बार खिलाड़ियों को टीम से बाहर किए जाने की सही वजह नहीं बताई जाती थी, जिससे उनके प्रदर्शन और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ता था। लेकिन वर्तमान टीम प्रबंधन ने यह नियम बनाया है कि चाहे संजू सैमसन हों, अर्शदीप सिंह हों या कोई अन्य सीनियर खिलाड़ी—हर खिलाड़ी को स्पष्ट रूप से समझाया जाता है कि उन्हें किस सामरिक कारण से बाहर रखा गया है। जब संजू सैमसन जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभवी खिलाड़ी इस तरह के फैसलों को सकारात्मकता से लेते हैं, तो इससे पूरे ड्रेसिंग रूम में एक मजबूत और एकजुट संस्कृति का निर्माण होता है।

निराशा के बीच सकारात्मकता: संजू सैमसन के धैर्य और मैच्योरिटी की मिसाल

संजू सैमसन का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सफर अत्यधिक उतार-चढ़ाव, लंबे इंतजार और सीमित अवसरों से भरा रहा है। साल 2015 में टी-20 डेब्यू करने के बाद से उन्हें लगातार 2-3 मैचों के बाद बाहर कर दिया जाता था, जिसके चलते सोशल मीडिया पर अक्सर 'जस्टिस फॉर संजू सैमसन' का ट्रेंड चलता रहा है।

हालांकि, इन तमाम कठिन परिस्थितियों के बावजूद संजू ने कभी भी सार्वजनिक रूप से कोई नकारात्मक टिप्पणी नहीं की और न ही कभी मैदान पर अपना गुस्सा जाहिर किया। सूर्यकुमार यादव ने संजू के इसी मानसिक संतुलन और परिपक्वता की जमकर सराहना की। सूर्या ने कहा कि संजू को अपनी प्रतिभा पर अटूट भरोसा है। वे जानते हैं कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर किसी को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। जब वे मैदान से बाहर होते हैं, तब भी वे नेट्स में सबसे ज्यादा पसीना बहाते हैं और मैच के दौरान सब्स्टीट्यूट फील्डर के रूप में 100 प्रतिशत ऊर्जा झोंकते हैं।

जब मौका मिला तो ठोका तूफानी शतक: बैकअप से मैच-विनर बनने का ऐतिहासिक सफर

सूर्यकुमार यादव ने यह भी रेखांकित किया कि संजू सैमसन के भीतर की इसी निस्वार्थ भावना और धैर्य का फल उन्हें बाद में मिला। जब टीम प्रबंधन ने संजू को टी-20 में ओपनिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी और उन्हें लगातार मौके दिए, तो उन्होंने इस भरोसे को दोनों हाथों से लपका।

संजू सैमसन ने बांग्लादेश और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार टी-20 अंतरराष्ट्रीय शतक जड़कर इतिहास रच दिया और दुनिया को दिखा दिया कि सही समर्थन और स्पष्ट भूमिका मिलने पर वे कितने घातक साबित हो सकते हैं। सूर्या ने कहा कि जब संजू ने बैक-टू-बैक शतक ठोके, तो पूरे ड्रेसिंग रूम ने खड़े होकर उनके लिए तालियां बजाईं क्योंकि हर खिलाड़ी जानता था कि संजू ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए कितना लंबा और मौन संघर्ष किया है। संजू की यह सफलता दर्शाती है कि जो खिलाड़ी टीम के लिए त्याग करने को तैयार रहता है, क्रिकेट का खेल आखिरकार उसे उसका हक जरूर लौटाता है।

युवा खिलाड़ियों के लिए बड़ा सबक और टीम इंडिया का मजबूत बेंच स्ट्रेंथ कल्चर

सूर्यकुमार यादव का यह खुलासा भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए तमाम युवा खिलाड़ियों के लिए एक बहुत बड़ा जीवन सबक है। आज के अत्यधिक प्रतिस्पर्धी दौर में जब हर स्थान के लिए तीन-तीन दावेदार मौजूद हैं, तब व्यक्तिगत कुंठाओं से ऊपर उठकर टीम के विजन को अपनाना ही किसी खिलाड़ी को महान बनाता है।

सूर्या ने कहा कि एक चैंपियन टीम केवल 11 खिलाड़ियों से नहीं बनती, बल्कि वह उन 15-16 खिलाड़ियों के समूह से बनती है जो एक ही लक्ष्य यानी 'भारत की जीत' के लिए समर्पित होते हैं। संजू सैमसन का यह आचरण भारतीय क्रिकेट के उस स्वर्णिम बेंच स्ट्रेंथ कल्चर का प्रतीक है जहां हर खिलाड़ी एक-दूसरे की सफलता का जश्न मनाता है। आगामी वैश्विक प्रतियोगिताओं और टी-20 अभियानों के लिए भारतीय टीम का यह निस्वार्थ भाईचारा और आपसी विश्वास टीम की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है।