राम मंदिर दान चोरी मामले में बड़ा मोड़! पुलिस ने नहीं मांगी रिमांड, कोर्ट ने 14 दिनों के लिए जेल भेजा
अयोध्या के भव्य और ऐतिहासिक श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी करने के मामले में गिरफ्तार सभी आठों आरोपियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को सुरक्षा कारणों के चलते इन आरोपियों की कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल) के जरिए पेशी कराई गई। इस दौरान पुलिस ने फिलहाल आरोपियों की कस्टडी रिमांड की मांग नहीं की, जिसके बाद अदालत ने सभी आठों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।
एसआईटी की रिपोर्ट के बाद पुलिस का ताबड़तोड़ एक्शन
आपको बता दें कि राम मंदिर के दानपात्र से करोड़ों रुपये की हेराफेरी और चोरी का यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संज्ञान में आने के बाद बेहद गंभीर हो गया था। सीएम के कड़े निर्देशों पर गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आते ही पुलिस प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तरफ से नोटों की गिनती के काम में लगाए गए आठ कर्मचारियों के खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई थी, जिसके कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए सभी को धर दबोचा। पुलिस ने अब तक आरोपियों के पास से करीब 80 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की है।
इन 8 नामजद आरोपियों पर गिरी गाज
राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर जिन आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव
अनुकल्प मिश्रा
लवकुश मिश्रा
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
करुणेश पांडेय
मनीष यादव
अविनाश शुक्ला
रमाशंकर मिश्रा
रिमांड न मांगने के पीछे क्या है पुलिस की रणनीति?
अदालत में सरकारी वकील ने अब तक की गई तफ्तीश की प्रगति रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने फिलहाल आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड नहीं मांगी है क्योंकि शुरुआती पूछताछ में मिले इनपुट्स के आधार पर जांच टीमें अपनी पड़ताल को आगे बढ़ा रही हैं। पुलिस इस वक्त सबूतों को पुख्ता करने के लिए ताबड़तोड़ छापेमारी, बैंक खातों की जांच और संदिग्ध दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन (Verification) में जुटी है। कानून के जानकारों का कहना है कि न्यायिक हिरासत के दौरान यदि आगे कभी भी पूछताछ की आवश्यकता पड़ती है, तो पुलिस दोबारा कोर्ट से उनकी कस्टडी रिमांड की मांग कर सकती है।
आरोपियों के आलीशान रहन-सहन से खुले राज, परिजनों में सन्नाटा
चढ़ावे की रकम की चोरी के आरोप में कर्मचारियों के जेल जाने के बाद उनके घरों पर सन्नाटा पसरा हुआ है और परिजन पूरी तरह से खामोश हैं। वहीं, पड़ोसियों और स्थानीय लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं आम हैं। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि उन्हें काफी समय से कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा था, क्योंकि पिछले कुछ समय में इन कर्मचारियों के रहन-सहन, गाड़ियों और प्रॉपर्टी में एकाएक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिल रहा था। चोरी की गई रकम को प्लॉट खरीदने, लग्जरी गाड़ियों और रिश्तेदारों में बांटने की बात भी सामने आ रही है।
ट्रस्ट के आला अधिकारियों ने मंदिर परिसर से बनाई दूरी
इस बेहद संवेदनशील और शर्मनाक मामले के सामने आने के बाद राम मंदिर परिसर के प्रशासनिक गलियारों में भी भारी बेचैनी का माहौल है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और उनके प्रमुख सहयोगी डॉ. अनिल मिश्र, जिनकी उपस्थिति मात्र से परिसर का स्टाफ सतर्क रहता था, वे पिछले दो दिनों से मंदिर परिसर और उसके आसपास नजर नहीं आए हैं। अमूमन ऐसा तभी होता था जब वे अयोध्या से बाहर होते थे, लेकिन सूत्रों के मुताबिक दोनों अधिकारी शहर में ही मौजूद हैं और उन्होंने फिलहाल मंदिर परिसर की गतिविधियों से थोड़ी दूरी बना रखी है।