महंगाई की मार: टमाटर और प्याज की कीमतों में लगी भीषण आग! दिल्ली में दाम हुए दोगुने, क्या और बिगड़ेगा आपकी रसोई का बजट?
यदि पिछले कुछ दिनों से सब्जी मंडी जाने पर आपकी जेब पर बोझ बढ़ा है, तो यह कोई भ्रम नहीं है। देश भर में आम नागरिकों की रसोई का सबसे अहम हिस्सा माने जाने वाले टमाटर, प्याज और आलू (TOP) की कीमतों में अचानक भारी उछाल आया है। भीषण गर्मी, कमजोर सप्लाई चेन और मानसून की अनिश्चितता के कारण एक बार फिर खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) बढ़ने का गंभीर खतरा मंडराने लगा है, जिसने मध्यम और गरीब परिवारों के मासिक बजट को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
सरकारी आंकड़ों में महंगाई की गवाही
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज एक महीने के भीतर:
टमाटर: की औसत खुदरा कीमतों में करीब 18 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है।
प्याज: लगभग 11 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है।
आलू: की कीमतों में भी करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।
भारतीय रसोई में इन तीनों सब्जियों की केंद्रीय भूमिका है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी रिटेल महंगाई को मापने वाले इंडेक्स में इनका संयुक्त योगदान करीब 1.75 प्रतिशत है। यही वजह है कि इनके दामों में होने वाली कोई भी बढ़ोतरी सीधे देश के कुल महंगाई आंकड़ों को बढ़ा देती है। अगर पिछले साल (2025) की समान अवधि से तुलना करें, तो टमाटर के दाम 25% और प्याज के दाम 3.3% से अधिक ऊपर जा चुके हैं।
दिल्ली में दोगुने हुए दाम, यूपी-बिहार में 50% की उछाल
मंडी समीक्षकों और 'द इकोनॉमिक टाइम्स' की एक ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इस सीजन में सबसे ज्यादा मार टमाटर की कीमतों पर पड़ी है।
राज्यों का हाल: उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े उत्पादक व उपभोक्ता राज्यों में टमाटर की खुदरा कीमतें 50 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं।
दिल्ली-एनसीआर में हाहाकार: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तो टमाटर के दाम लगभग दोगुने (100% महंगा) हो चुके हैं।
दामों में आग लगने की 3 मुख्य वजहें:
भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तापमान: इस साल पड़ी अत्यधिक गर्मी और लू के कारण टमाटर की खड़ी फसलें झुलस गईं, जिससे कुल उत्पादन में भारी गिरावट आई है।
ढुलाई में भारी नुकसान: अत्यधिक गर्म मौसम के कारण खेतों से मंडियों तक लंबी दूरी की ट्रांसपोर्टेशन (ढुलाई) के दौरान टमाटर रास्ते में ही पककर सड़ जा रहे हैं, जिससे आवक प्रभावित हुई है। दिल्ली की प्रसिद्ध आजादपुर मंडी के आढ़तियों के मुताबिक, हरियाणा और राजस्थान से होने वाली टमाटर की दैनिक आवक में भारी कमी आई है।
बेमौसम बारिश और अल-नीनो का असर: प्याज के मामले में विशेषज्ञों का कहना है कि कटाई के समय हुई बेमौसम बारिश से प्याज की गुणवत्ता और उसकी भंडारण क्षमता (Storage) को तगड़ा नुकसान पहुंचा है। इसके साथ ही अल-नीनो (El-Nino) के प्रभाव और मानसून की सुस्त रफ्तार ने संकट को और ज्यादा गहरा कर दिया है।
क्या आगे और महंगे होंगे टमाटर-प्याज?
कृषि और बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के शुरुआती महीनों (जून-जुलाई) में सब्जियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव होना एक सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन इस बार मौसमी मार इतनी तगड़ी है कि यदि आगामी हफ्तों में देश भर में मानसून की बारिश सामान्य नहीं रही या लॉजिस्टिक्स सप्लाई में सुधार नहीं हुआ, तो कीमतें अभी और ज्यादा ऊपर जा सकती हैं।
फिलहाल, देश के आम उपभोक्ताओं की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए क्या कदम उठाती है और मानसून की अगली चाल कैसी रहती है।