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June 30 2026 03:19 am

"राम के नाम पर सत्ता पाई, अब दान भी लूट लिया": राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सांसद चंद्रशेखर का भाजपा पर सीधा हमला

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अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की रकम चोरी होने का मामला अब पूरी तरह से सियासी रंग ले चुका है। आजाद समाज पार्टी (आसपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने इस मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार पर तीखा और सीधा हमला बोला है। सहारनपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के सिलसिले में पहुंचे चंद्रशेखर ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि जो लोग भगवान श्री राम के नाम पर सत्ता में आए थे, आज उनके राज में राम मंदिर का दान भी सुरक्षित नहीं है।

"छोटे मोहरों पर एक्शन, बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश"

सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने राम मंदिर ट्रस्ट के भीतर हुई वित्तीय अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भगवान श्री राम के नाम पर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं की आस्था से जो धन जुटाया गया था, उसमें बड़े स्तर पर घपला हुआ है। चंद्रशेखर ने कहा:

"इस पूरे मामले में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों और निचले लोगों पर ही कार्रवाई की जा रही है, जबकि पर्दे के पीछे मौजूद बड़े और रसूखदार लोगों को साफ तौर पर बचाने का प्रयास किया जा रहा है। यदि जांच में उच्च स्तर के अधिकारियों या ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं, तो बिना किसी भेदभाव के पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।"

केंद्रीय जांच एजेंसियों की चुप्पी और एसआईटी पर उठाए सवाल

चंद्रशेखर आज़ाद ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में देश की बड़ी जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी उंगली उठाई। उन्होंने सवाल किया कि जब देश में छोटे-छोटे मामलों में केंद्रीय जांच एजेंसियां तुरंत सक्रिय हो जाती हैं, तो राम मंदिर जैसे संवेदनशील और इतनी बड़ी धनराशि की हेराफेरी के मामले में वे अब तक चुप क्यों हैं? इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि बिना किसी औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज किए सीधे विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर देना ही अपने आप में कई बड़े संदेह और सवाल पैदा करता है।

उत्तराखंड में एंट्री रोकने और हिंसक धमकियों का लगाया आरोप

अपने हालिया उत्तराखंड दौरे का जिक्र करते हुए नगीना सांसद ने वहां की कानून-व्यवस्था और प्रशासन को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें उत्तराखंड में पीड़ित परिवारों से मिलने और जनता की समस्याएं सुनने से जबरन रोका गया, क्योंकि वहां का प्रशासन जमीनी सच्चाई को बाहर नहीं आने देना चाहता। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां एक महापंचायत के दौरान उन्हें सार्वजनिक रूप से हिंसक धमकियां दी गईं, जो लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक है। उन्होंने साफ किया कि वे डरने वाले नहीं हैं और 30 जून को एक बार फिर उत्तराखंड के दौरे पर जाएंगे।

रामनगर हिंसा मामले में कोर्ट में हुए पेश, वारंट कराया रिकॉल

सहारनपुर आने का मुख्य कारण मई 2017 में कोतवाली देहात क्षेत्र के रामनगर गांव में हुई जातीय हिंसा का मामला था। इस मामले की सुनवाई अपर सत्र मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट चतुर्थ (एमपी-एमएलए कोर्ट) मीनल चावला की अदालत में हुई। मामले में नियमित रूप से पेश न होने के कारण अदालत ने चंद्रशेखर समेत आठ आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया था।

सोमवार को सांसद चंद्रशेखर आज़ाद अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और करीब 45 मिनट तक कोर्ट रूम में मौजूद रहे। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से गैर-जमानती वारंट को रिकॉल कराया और कोर्ट ने चार्ज फ्रेम करने की विधिक कार्रवाई भी पूरी की। इस मामले में कुल 14 आरोपी हैं, जिनमें से 6 नियमित आ रहे थे। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जुलाई 2026 की तारीख तय की है।