सीएम योगी के ड्रीम प्रोजेक्ट में बड़ी लापरवाही, यूपी का पहला आयुष विश्वविद्यालय बना रही कंपनी पर FIR दर्ज
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में बन रहे प्रदेश के पहले आयुष विश्वविद्यालय (महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय) के निर्माण में लेटलतीफी को लेकर शासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। बार-बार चेतावनी और मुख्यमंत्रियों की फटकार के बाद भी काम में तेजी न लाने पर आखिरकार लोक निर्माण विभाग (PWD) ने निर्माणकर्ता कंपनी के ठेकेदार के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद से ही प्रशासनिक और निर्माण गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है।
2024 में पूरा होना था काम, 2026 तक भी लटका रहा प्रोजेक्ट
इस महत्वाकांक्षी विश्वविद्यालय के निर्माण का प्रस्ताव साल 2021 में पास हुआ था, जिसके बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई थी। शासन का दावा था कि तीन साल के भीतर इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
काम शुरू होने की तारीख: 3 जनवरी 2022
अनुबंध के अनुसार समाप्ति तिथि: 10 नवंबर 2024
ठेकेदार द्वारा दी गई नई समयसीमा: 26 फरवरी 2026
इन तमाम तारीखों के बीत जाने के बाद भी 15 जून 2026 तक यूनिवर्सिटी का निर्माण कार्य अधूरा पड़ा रहा। लगातार हो रही देरी की वजह से आयुष विश्वविद्यालय का शैक्षणिक और प्रशासनिक सत्र बुरी तरह प्रभावित हो रहा था।
सीएम योगी की फटकार और आयुष मंत्री के तेवर का असर
इस प्रोजेक्ट की कमान खुद सीएम योगी आदित्यनाथ संभाले हुए थे। उन्होंने 15 फरवरी 2023 को विवि की ओपीडी का उद्घाटन किया था, जिसके बाद जून 2023, जून 2025 में लगातार औचक निरीक्षण कर कार्यदायी संस्था को कड़ी फटकार लगाई थी। हाल ही में 13 जून 2026 को उत्तर प्रदेश के आयुष मंत्री दयाशंकर मिश्र 'दयालु' ने भी विश्वविद्यालय परिसर का दौरा किया था और ठेकेदार के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। जून के पहले हफ्ते में लखनऊ में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में इस सुस्त रफ्तार को देखते हुए कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने के भी निर्देश दिए जा चुके हैं।
नोटिस देने पर लोनिवि अधिकारी को दी अपशब्द और धमकी
लोनिवि (भवन) के सहायक अभियंता दिनेश कुमार शर्मा की तहरीर पर पुलिस ने 'मेसर्स विजय निर्माण कंपनी प्राइवेट लिमिटेड' (कर्नाटक की संस्था) के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। तहरीर के मुताबिक, जब पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने ठेकेदार पर काम जल्द पूरा करने का दबाव बनाया, तो कंपनी के प्रतिनिधियों ने लोनिवि अधिकारियों के साथ अभद्रता की, अपशब्द कहे और उन्हें अंजाम भुगतने की धमकी दी। पुलिस अब इस मामले की कानूनी जांच कर रही है।
एफआईआर के बाद कैंपस में मची खलबली, निर्माण जारी
मुकदमा दर्ज होने की खबर फैलते ही विश्वविद्यालय परिसर में अचानक हलचल तेज हो गई है। कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी कैंपस में बेहद सक्रिय नजर आ रहे हैं और मजदूरों को तेजी से काम पर लगा दिया गया है। हालांकि, जब इस पूरे विवाद और एफआईआर को लेकर विजय निर्माण कंपनी के प्रोजेक्ट डायरेक्टर जुबिन सिक्का से संपर्क किया गया, तो उन्होंने इस संवेदनशील मामले पर किसी भी तरह का बयान देने से साफ मना कर दिया।