राम मंदिर की सुरक्षा में बड़ा बदलाव: एआई कैमरे और स्मार्ट सेंसर से चुस्त होगा खुफिया नेटवर्क, नई रणनीति तैयार
अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान चोरी की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मॉनिटरिंग को पूरी तरह से हाईटेक बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। पारंपरिक सुरक्षा तंत्र के स्थान पर अब बहुस्तरीय (Multi-layered) तकनीक आधारित सुरक्षा नेटवर्क लागू किया जाएगा, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), डेटा एनालिसिस और रियल-टाइम इंटेलिजेंट सर्विलांस सिस्टम मुख्य आधार होंगे।
एआई कैमरे और स्मार्ट सेंसर से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
योजना के तहत मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों को एआई तकनीक से अपग्रेड किया जाएगा। ये कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित न रहकर भीड़ में असामान्य व्यवहार, संदिग्ध गतिविधियों और बिना अनुमति प्रवेश करने वालों की त्वरित पहचान करेंगे। किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर एआई सिस्टम तुरंत सुरक्षा बलों को रियल-टाइम अलर्ट भेजेगा। इसके अलावा परिसर की 4 किलोमीटर लंबी बाउंड्री पर 25 अत्याधुनिक वॉच टावर और संवेदनशील स्थानों पर इलेक्ट्रॉनिक सेंसर लगाए जाएंगे।
एसआईटी रिपोर्ट के बाद बदली सुरक्षा रणनीति
दान गिनती केंद्र में हुई चोरी की जांच में एसआईटी (SIT) को मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के उल्लंघन, ढीली तलाशी व्यवस्था और अप्रभावी मॉनिटरिंग जैसी गंभीर कमियां मिली थीं। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में कई संदिग्ध घटनाएं उजागर होने के बाद शासन ने सुरक्षा में तकनीकी अपग्रेडेशन का फैसला लिया है। उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर की सुरक्षा के लिए स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) की छठी बटालियन के तहत 1,155 स्थायी पदों के सृजन को भी हरी झंडी दे दी है।
अधिकारियों का नियमित रोटेशन और त्रैमासिक बैठक
लंबे समय से एक ही पद पर तैनात अधिकारियों की वजह से संस्थागत निगरानी प्रभावित होने की आशंका के बाद अब संवेदनशील पदों पर नियमित स्थानांतरण और रोटेशन नीति लागू की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था के इस नए एआई-आधारित प्रस्ताव को जल्द होने वाली उच्च स्तरीय सुरक्षा समिति (High-Power Committee) की त्रैमासिक बैठक में मंजूरी दी जाएगी, जिसमें एडीजी सुरक्षा, आईबी निदेशक और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल होंगे।