राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़ा एक्शन! गोपनीय जांच में ₹1.5 करोड़ बरामद, रडार पर कई कर्मचारी
Ayodhya Ram Mandir Controversey: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले दान की राशि में कथित हेराफेरी का मामला अब बेहद गंभीर मोड़ ले चुका है। समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद जहां देश का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, वहीं दूसरी तरफ बैकस्टेज एक बहुत बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया गया है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले की कमान अब सीधे दिल्ली ने अपने हाथ में ले ली है। इस बीच, एक बेहद गोपनीय जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ है और करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नगद राशि बरामद की जा चुकी है। मंदिर के नौ कर्मचारियों को हिरासत में लेकर उनसे कड़ी पूछताछ की जा रही है, जबकि कई अन्य संदिग्ध इस वक्त सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर हैं।
दिल्ली की सीधी निगरानी: नृपेंद्र मिश्रा की अयोध्या में इमरजेंसी मीटिंग
राम मंदिर के दानपात्र से चढ़ावे की धनराशि गायब होने की गूंज अब देश की राजधानी तक पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदेन न्यासी नृपेंद्र मिश्रा विशेष विमान से अचानक नई दिल्ली से अयोध्या पहुंचे। उन्होंने राम मंदिर परिसर में ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के डीजीएम और अयोध्या शाखा के प्रबंधक अरुण कुमार त्रिपाठी सहित शीर्ष अधिकारियों के साथ एक हाई-लेवल और अत्यंत गोपनीय बैठक की। इसके तुरंत बाद उन्होंने जिला प्रशासन के आला अधिकारियों के साथ भी चर्चा की। हालांकि, जब मीडिया ने उनसे इस विषय पर सवाल पूछने की कोशिश की, तो उन्होंने 'यह हमारा विषय नहीं है' कहकर कुछ भी बोलने से साफ इनकार कर दिया और मंगलवार को दिल्ली लौट गए।
पुलिस की सीक्रेट मदद से चल रहा है महा-ऑपरेशन, 1.5 करोड़ की रिकवरी
इस पूरे घोटाले की तह तक जाने के लिए ट्रस्ट बेहद गुपचुप तरीके से जांच पड़ताल में जुटा हुआ है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस जांच में पुलिस विभाग के कुछ बेहद तेजतर्रार और चुनिंदा अधिकारियों को अनधिकृत रूप से लगाया गया है। पुलिस के ये विशेष जवान संदिग्धों की धरपकड़ करने, उन पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने और गायब हुई रकम को रिकवर करने में ट्रस्ट की मदद कर रहे हैं। इसी संयुक्त सीक्रेट ऑपरेशन का नतीजा है कि अब तक करीब 1.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि बरामद की जा चुकी है। फिलहाल 9 संदिग्ध कर्मचारियों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है, जबकि कुछ अन्य कर्मचारियों की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
लग्जरी गाड़ियां, महंगी जमीनें और व्हीलचेयर कूरियर का सनसनीखेज कनेक्शन
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इसमें कई चौंकाने वाले पैटर्न सामने आ रहे हैं। शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि संदिग्ध कर्मचारियों के रहन-सहन और आर्थिक स्थिति में पिछले कुछ महीनों में अचानक बड़ा बदलाव आया था। इन लोगों ने कथित तौर पर हेराफेरी की रकम को महंगी जमीनों, आलीशान मकानों और लग्जरी गाड़ियों में इन्वेस्ट कर दिया था। इसके अलावा, एसबीआई (SBI) समेत अयोध्या की कई अन्य बैंक शाखाओं से इन संदिग्ध कर्मचारियों के बैंक खातों के स्टेटमेंट निकलवाकर उनके पिछले लेन-देन को बारीकी से खंगाला जा रहा है। सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि मंदिर में दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को व्हीलचेयर से दर्शन कराने वाले कुछ चुनिंदा लोग इस अवैध रकम को बाहर भेजने के लिए 'कूरियर' के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। इस खुलासे के बाद एसबीआई के डीजीएम ने नोटों की गिनती के काम में तैनात अपने कर्मचारियों से एक अलग और विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
CCTV और AI कैमरों की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल, विपक्ष हमलावर
राम मंदिर परिसर को सुरक्षा के लिहाज से बेहद आधुनिक सीसीटीवी (CCTV) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस कैमरों से कवर किया गया है। यहां तक कि दानपात्र से पैसे निकालने और उनकी गिनती करने की पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग एक विशेष कंट्रोल रूम से होती है। ऐसे में अब यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न बन गया है कि इतनी हाई-टेक निगरानी के बावजूद इतनी बड़ी हेराफेरी कैसे होती रही? क्या गिनती के वक्त जानबूझकर कैमरे बंद किए गए थे या फिर सुरक्षा में कोई बहुत बड़ा लूपहोल है? इस चूक ने राम मंदिर की पूरी अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। हालांकि, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने एक वीडियो और लिखित बयान जारी कर स्थिति को संभालने की कोशिश की है, लेकिन विपक्ष के तीखे और तार्किक सवालों के सामने ट्रस्ट की सफाई फिलहाल कमजोर नजर आ रही है। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर पक्ष-विपक्ष में भारी जंग छिड़ी हुई है।
संघ के एक वरिष्ठ प्रचारक को भी दिखाया गया बाहर का रास्ता!
इस पूरे विवाद के बीच अयोध्या के गलियारों में एक और बड़ी खबर तेजी से तैर रही है। राम मंदिर निर्माण की शुरुआत से ही यहां अपनी अवैतनिक (बिना वेतन के) सेवाएं दे रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक बेहद वरिष्ठ प्रचारक, जो पहले किसी बड़े तकनीकी संस्थान में उच्च पद पर रह चुके हैं, उन्हें अचानक यहां से कार्यमुक्त कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि वे अपने घर लौट चुके हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, उन पर भी कुछ वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, जिसे लेकर ट्रस्ट के कुछ जिम्मेदार पदाधिकारियों के साथ उनकी तीखी बहस हुई थी, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया। इस पूरे प्रकरण से संघ परिवार और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंदरूनी हलकों में भी भारी तनाव का माहौल देखा जा रहा है।