बंगाल चुनाव के बीच ED का 'महा-ऐक्शन': दूसरे चरण की वोटिंग से पहले 9 ठिकानों पर छापेमारी
India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल में चुनावी सरगर्मियों के बीच केंद्रीय जांच एजेंसियों की सक्रियता ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। 29 अप्रैल 2026 को होने वाले दूसरे चरण के मतदान से ठीक पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) यानी राशन घोटाले में शनिवार को बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता से लेकर बर्धवान और हाबरा तक, ईडी की टीमों ने एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की, जिससे सप्लायरों और बड़े निर्यातकों में हड़कंप मच गया है।
गरीबों के गेहूं पर 'डाका': ऐसे हुआ करोड़ों का खेल
ईडी की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि गरीबों को मुफ्त या सस्ते दाम पर बंटने वाले गेहूं को साजिश के तहत खुले बाजार में बेच दिया गया।
कम दाम पर खरीद: सप्लायरों और डिस्ट्रिब्यूटरों ने सरकारी कोटे के गेहूं को बेहद कम दाम पर खरीदा।
बाजार में मुनाफाखोरी: इस गेहूं को ऊंचे दामों पर खुले बाजार में बेचकर करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई।
पहचान मिटाने का खेल: जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) और राज्य सरकार की मुहर वाली बोरियों को बदलकर गेहूं को नई बोरियों में भरा ताकि उसकी पहचान छिपाई जा सके।
इन बड़े नामों पर गिरी गाज, छापेमारी की सूची लंबी
शनिवार सुबह से शुरू हुई इस रेड में ईडी के निशाने पर कई रसूखदार कारोबारी और उनकी कंपनियां रहीं। मुख्य रूप से निरंजन चंद्र साहा के ठिकानों पर छापेमारी की गई। इसके अलावा:
सुशांत साहा और उनकी कंपनी 'सागर इंटरप्राइजेज'।
समीर कुमार चंद्र की फर्म 'मां अन्नपूर्णा राइस कंसर्न'।
पार्थ साहा की कंपनी 'आदर्श इंटरनेशनल'।
'साइनैक्स अन्नपूर्णा उद्योग' और उत्तरपारा के व्यवसायी दौलत राम गुप्ता के ठिकानों पर भी दस्तावेज खंगाले गए।
बसीरहाट से शुरू हुई थी जांच की आंच
इस घोटाले की जड़ें साल 2020 में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ी हैं। बसीरहाट पुलिस स्टेशन में सीमा शुल्क विभाग के डिप्टी कमिश्नर की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ था। तब आरोप लगा था कि जनता के लिए आवंटित अनाज की बड़े पैमाने पर जमाखोरी और कालाबाजारी हो रही है। इसी मामले में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के तहत केस दर्ज कर पूर्व खाद्य मंत्री ज्योतिप्रिय मल्लिक को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था।
चुनावी माहौल में छापेमारी पर थमी सांसें
पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को संपन्न हो चुका है, जबकि 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होनी है। चुनावी मौसम में इस तरह की छापेमारी को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 'राजनीतिक प्रतिशोध' करार दिया है। वहीं, भाजपा का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कानूनी प्रक्रिया है। फिलहाल, कोलकाता जोनल ऑफिस के अधिकारी जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की जांच कर रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।