मोगा रैली से शुरू हुआ 'ऑपरेशन लोटस': अमित शाह की हरी झंडी और AAP में महाबगावत

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India News Live,Digital Desk : आम आदमी पार्टी (AAP) के किले में हुई ऐतिहासिक सेंधमारी ने देश की राजनीति को हिलाकर रख दिया है। राज्यसभा में 'आप' के 10 में से 7 सांसदों का एक साथ भाजपा में जाना महज एक इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक बेहद सधे हुए 'ऑपरेशन' का नतीजा है। सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल के इन 7 'रत्नों' के पाला बदलने की पटकथा 14 मार्च 2026 को पंजाब के मोगा में गृह मंत्री अमित शाह की 'बदलाव रैली' के दौरान ही लिख दी गई थी।

मोगा में मिली 'हरी झंडी' और गुप्त मुलाकातों का दौर

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मोगा रैली के बाद से ही भाजपा का शीर्ष नेतृत्व उन सांसदों के संपर्क में था, जो पंजाब में भगवंत मान सरकार की कार्यशैली और दिल्ली में केजरीवाल के 'शीशमहल' विवाद से भीतर ही भीतर सुलग रहे थे। अमित शाह की पंजाब यात्रा के दौरान ही बगावत की रूपरेखा को अंतिम रूप दिया गया और समय का इंतजार किया गया। जैसे ही 29 अप्रैल के दूसरे चरण के चुनाव नजदीक आए, इस 'सियासी बम' को फोड़ दिया गया।

ED की जांच और 'अशोक मित्तल' का यू-टर्न

इस पूरी बगावत में सबसे दिलचस्प किरदार अशोक मित्तल का रहा। 2 अप्रैल को केजरीवाल ने बड़े भरोसे के साथ राघव चड्ढा को हटाकर मित्तल को राज्यसभा में उप-नेता बनाया था। लेकिन, लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के मालिक मित्तल पहले से ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रडार पर थे। अपनी व्यावसायिक सुरक्षा और भविष्य की राजनीति को देखते हुए मित्तल ने केजरीवाल के 'पद' के बजाय भाजपा के 'साथ' को चुनना ज्यादा बेहतर समझा।

2/3 का जादुई आंकड़ा: क्यों सुरक्षित हैं बागी सांसद?

आम आदमी पार्टी अब इन सांसदों को अयोग्य घोषित कराने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, लेकिन कानूनन वह मजबूर दिख रही है:

संविधान की 10वीं अनुसूची: दल-बदल विरोधी कानून के मुताबिक, यदि किसी दल के दो-तिहाई (2/3) सदस्य किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता रद्द नहीं होती।

गणित का खेल: राज्यसभा में 'आप' के कुल 10 सांसद थे। 7 सांसदों का एक साथ जाना 6.66 के अनिवार्य आंकड़े (2/3) को पार कर जाता है।

संजय सिंह की दलील: 'आप' नेता संजय सिंह इसे 'स्वैच्छिक त्याग' बताकर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की सदस्यता खत्म करने की मांग कर रहे हैं, हालांकि तकनीकी रूप से बागी गुट काफी मजबूत स्थिति में है।

भगवंत मान का तीखा तंज: 'कोई सरपंच बनने लायक भी नहीं'

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपने चिर-परिचित अंदाज में इस बगावत पर पलटवार किया। उन्होंने इन सांसदों की तुलना मसालों से करते हुए कहा, "अदरक, लहसुन, जीरा और लाल मिर्च मिलकर सब्जी को स्वाद तो दे सकते हैं, पर वे खुद सब्जी नहीं बन सकते। इनमें से कोई भी नेता अपने दम पर गांव का सरपंच बनने की भी काबिलियत नहीं रखता।" मान के इस बयान से साफ है कि पार्टी अब इन बागियों को गद्दार साबित करने के लिए आक्रामक प्रचार करेगी।

केजरीवाल के घर पहुंचे सिसोदिया, नई रणनीति तैयार

इस बड़े झटके के बाद मनीष सिसोदिया अपनी गुजरात यात्रा बीच में छोड़कर सीधे दिल्ली स्थित केजरीवाल के आवास पहुंचे। बताया जा रहा है कि पार्टी अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ जनता के बीच 'विक्टिम कार्ड' खेलने की तैयारी कर रही है। भाजपा ने जहां इसे केजरीवाल के 'भ्रष्टाचार' का नतीजा बताया है, वहीं 'आप' इसे लोकतंत्र की हत्या करार दे रही है।