"नास्तिक होने के कारण 'ओ पालनहारे' लिखना मेरे लिए सबसे मुश्किल था..."लगान के 25 साल पूरे होने पर जावेद अख्तर का भावुक खुलासा, कल से फिर थिएटर्स में दिखेगी फिल्म
भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई आमिर खान की आइकॉनिक फिल्म 'लगान' (Lagaan) को रिलीज हुए 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक सिल्वर जुबली के मौके पर फैंस के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है— इस ब्लॉकबस्टर फिल्म को सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज (Re-release) किया जा रहा है। दर्शक 12 जून से 14 जून 2026 के बीच इस सिनेमाई मास्टरपीस का आनंद एक बार फिर बड़े पर्दे पर ले सकेंगे।
इस खास जश्न के बीच, ऑडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म 'स्पॉटिफाई' (Spotify) ने एक भव्य इवेंट का आयोजन किया। इस इवेंट में एक्टर-प्रोड्यूसर आमिर खान, ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान, दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर और डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर लंबे समय बाद एक साथ नजर आए। इस दौरान टीम ने फिल्म के टाइमलेस गानों को बनाने के पीछे के कई अनसुने और दिलचस्प किस्से साझा किए।
'ओ पालनहारे' के पीछे की इनसाइड स्टोरी: क्यों आई जावेद अख्तर को परेशानी?
फिल्म 'लगान' का मशहूर प्रार्थना गीत (भजन) 'ओ पालनहारे' आज भी लोगों की आंखों में आंसू ला देता है। इवेंट के दौरान मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने एक बेहद चौंकाने वाला और भावुक खुलासा करते हुए बताया कि इस पूरी फिल्म के एल्बम में से इस गाने को लिखना उनके जीवन का सबसे कठिन काम था।
जावेद अख्तर ने अपनी आध्यात्मिक कशमकश को बयां करते हुए कहा:
जावेद अख्तर का बयान: "जब भी लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरे पूरे करियर में ऐसा कौन-सा गाना रहा है, जिसे लिखने में मुझे सबसे ज्यादा मानसिक और कलात्मक मुश्किलों का सामना करना पड़ा, तो मैं हमेशा बिना झिझक 'ओ पालनहारे' का नाम लेता हूं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मैं निजी तौर पर एक नास्तिक (Atheist - जो ईश्वर को नहीं मानता) हूं। ए.आर. रहमान की बनाई इस धुन में भक्ति का ऐसा गहरा भाव था कि कोई भी इंसान इसकी रूह को महसूस कर सकता था। एक नास्तिक होने के नाते, इस गीत के बोल लिखने के लिए मुझे अपने भीतर छिपी मासूमियत, शुद्धता और पूर्ण समर्पण (Surrender) की भावना को खोजना पड़ा। आप ऐसे गानों को सिर्फ भाषाई ज्ञान या तुकबंदी के दम पर नहीं लिख सकते; इसके लिए दिल में सादगी और शुद्धता का होना जरूरी था।"
संगीत को 'टाइमलेस' बनाना चाहते थे ए.आर. रहमान
इवेंट के दौरान संगीत के जादूगर ए.आर. रहमान ने भी 'लगान' के म्यूजिक कंपोजिशन पर बात की। रहमान ने बताया कि वे 'लगान' के जरिए कुछ ऐसा संगीत रचना चाहते थे जो पीढ़ियों तक अमर (Timeless) रहे।
रहमान ने कहा, "मैं चाहता था कि यह संगीत समय की सीमाओं को पार कर जाए। यही वजह थी कि मैंने इस फिल्म के गानों के लिए स्वर कोकिला लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी महान गायिकाओं से संपर्क किया था। लता जी की दिव्य आवाज, जावेद साहब के रूहानी बोल, मेरा संगीत और आमिर व पूरी कास्ट की बेहतरीन एक्टिंग— इन सबने मिलकर 'लगान' के गानों को हमेशा-अमर (Timeless) बना दिया।"
'लगान' का बॉक्स ऑफिस इतिहास और ऑस्कर का सफर
| मुख्य बिंदु | विवरण |
|---|---|
| रिलीज वर्ष | 2001 (अब 2026 में री-रिलीज) |
| फिल्म का बजट | ₹24 करोड़ |
| वर्ल्डवाइड बॉक्स ऑफिस कलेक्शन | ₹65.97 करोड़ (उस दौर की ब्लॉकबस्टर) |
| ऐतिहासिक उपलब्धि | सर्वश्रेष्ठ विदेशी भाषा फिल्म श्रेणी में एकेडमी अवॉर्ड्स (ऑस्कर) नॉमिनेशन पाने वाली भारत की तीसरी फिल्म |
हालांकि, यह फिल्म अंतिम दौर में ऑस्कर पुरस्कार जीतने से चूक गई थी, लेकिन इसने वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा को एक नई पहचान दिलाई थी। आमिर खान ने भी इवेंट में पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि शुरुआत में उन्हें डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर की इस कहानी पर थोड़ा शक था कि क्या देश के दर्शक क्रिकेट और ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली इस इतनी लंबी फिल्म को पसंद करेंगे या नहीं, लेकिन रिलीज के बाद फिल्म ने इतिहास रच दिया।
यदि आप भी भुवन और उसकी टीम के उस ऐतिहासिक मैच और गानों का जादू दोबारा महसूस करना चाहते हैं, तो कल यानी 12 जून से अपने नजदीकी सिनेमाघरों का रुख कर सकते हैं।