नाना पाटेकर को याद कर कैमरे के सामने फूट-फूटकर रोए अनुपम खेर, बोले- 'ये गलत है, उन्हें नहीं जाना था'
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से पूरी फिल्म इंडस्ट्री गहरे सदमे में है। सिनेमा जगत के हर छोटे-बड़े कलाकार की आंखें नम हैं, लेकिन वरिष्ठ अभिनेता अनुपम खेर इस दुख को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं कर पाए। सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक भावुक वीडियो में अनुपम खेर अपने दोस्त और समकालीन साथी नाना पाटेकर को याद करते हुए कैमरे के सामने ही फूट-फूटकर रो पड़े। नम आंखों और रुंधे हुए गले से उन्होंने कहा कि उन्हें इस खबर पर यकीन ही नहीं हो रहा है और यह समय उनके जाने का बिल्कुल नहीं था।
अनुपम खेर ने अपने वीडियो में हाथ जोड़ते हुए कहा, "नाना का जाना मेरी निजी क्षति है। मैं स्तब्ध हूं। भगवान ने उन्हें बहुत जल्दी बुला लिया... ये बहुत गलत है, उन्हें अभी नहीं जाना था।" अपनी बात कहते-कहते अनुपम खेर इस कदर भावुक हो गए कि कुछ पलों के लिए वे शब्द भी नहीं जुटा पाए। उनके इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लाखों प्रशंसकों का दिल झकझोर दिया है।
चार दशकों की दोस्ती और एनएसडी के दिनों का अनूठा रिश्ता
अनुपम खेर और नाना पाटेकर का रिश्ता केवल बड़े पर्दे पर साथ काम करने तक सीमित नहीं था, बल्कि दोनों के बीच चार दशकों से अधिक का गहरा और आत्मीय नाता था। 80 के दशक में मुंबई की गलियों में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए अनुपम खेर ने बताया कि वे और नाना अक्सर अपनी कला, थिएटर और जीवन की कठिनाइयों पर घंटों बातें किया करते थे। दोनों ने ही रंगमंच की तपस्या से निकलकर भारतीय सिनेमा में अपनी पहचान बनाई थी।
अनुपम खेर ने कहा कि नाना पाटेकर उन गिने-चुने लोगों में से थे जो कभी मुखौटा पहनकर नहीं जिए। जो उनके दिल में होता था, वही उनकी जुबान पर होता था। उन्होंने कहा, "नाना बाहर से जितने सख्त और तीखे नजर आते थे, भीतर से उतने ही संवेदनशील, सच्चे और फकीर मिजाज इंसान थे। हमने कई प्रोजेक्ट्स में साथ काम किया, कभी वैचारिक मतभेद भी हुए, लेकिन प्यार और सम्मान कभी कम नहीं हुआ। उनका यूं खामोशी से चले जाना मुझे भीतर तक खाली कर गया है।"
सिर्फ महान कलाकार ही नहीं, किसानों के मसीहा थे नाना
अपने शोक संदेश में अनुपम खेर ने नाना पाटेकर के सामाजिक सरोकारों को भी नमन किया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने केवल संवाद बोलकर शोहरत नहीं बटोरी, बल्कि धूप और धूल में जाकर देश के अन्नदाताओं के आंसू पोंछे। 'नाम फाउंडेशन' के जरिए उन्होंने जिस तरह बेसहारा किसानों और उनके परिवारों को गले लगाया, वह काम कोई साधारण इंसान नहीं कर सकता।
अनुपम खेर ने आगे कहा कि आज देश ने सिर्फ एक महान और कालजयी अभिनेता नहीं खोया है, बल्कि एक ऐसा सच्चा इंसान खो दिया है जो देश की मिट्टी और उसके लोगों से बेइंतहा प्यार करता था। वीडियो के अंत में उन्होंने नाना के परिवार और उनके बेटे मल्हार के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से प्रार्थना की कि वे इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दें। अनुपम खेर का यह रुदन साबित करता है कि नाना पाटेकर अपने पीछे एक ऐसा शून्य छोड़ गए हैं, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा।