यूरोपीय संसद के बाहर डोनाल्ड ट्रंप की नग्न सोने की मूर्ति, लिखा— 'अन्याय का राजा'; मचा भारी बवाल
फ्रांस के स्ट्रासबर्ग स्थित यूरोपीय संसद के विंस्टन चर्चिल भवन परिसर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बेहद विवादित और असामान्य मूर्ति प्रदर्शित की गई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति और राजनयिक गलियारों में तहलका मचा दिया है। प्रसिद्ध डेनिश मूर्तिकार जेन्स गैलशियोट (Jens Galschiøt) द्वारा तैयार की गई इस तांबे की विशालकाय मूर्ति को 23-कैरेट सोने की वर्क (गोल्ड लीफ) से मढ़ा गया है। मूर्ति में डोनाल्ड ट्रंप को पूरी तरह नग्न अवस्था में एक बेहद कमजोर, दुबले-पतले आम इंसान के कंधों और पीठ पर सवार दिखाया गया है।
इस कलाकृति का शीर्षक 'द ऑरेंज प्लेग' (The Orange Plague) रखा गया है। मूर्ति के आधार पर बड़े अक्षरों में 'द किंग ऑफ इनजस्टिस' (The King of Injustice - अन्याय का राजा) अंकित किया गया है। इस खुले प्रदर्शन ने न केवल यूरोपीय संसद में आने-जाने वाले सांसदों और प्रतिनिधियों का ध्यान खींचा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी इसके वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं।
'मैं उसकी पीठ पर बैठा हूं...': मूर्ति के नीचे लिखा व्यंग्यात्मक संदेश
कलाकृति के निचले हिस्से पर एक व्यंग्यात्मक प्रतिज्ञा (Satirical Pledge) उकेरी गई है, जो वैश्विक ताकतों और संभ्रांत वर्ग के ढोंग पर सीधा तंज कसती है। उस पर लिखा है:
"मैं एक इंसान की पीठ पर बैठा हुआ हूं। वह मेरे भारी बोझ तले दब रहा है। मैं उसकी मदद करने के लिए कुछ भी करने को तैयार हूं... सिवाय उसकी पीठ से नीचे उतरने के।"
हाथ में गोल्फ क्लब थामे और दूसरे हाथ में न्याय का तराजू लिए ट्रंप का यह रूप दरअसल उनके निजी शौक, सत्ता के अहंकार और जलवायु नीतियों के प्रति बेपरवाही को दर्शाने के लिए गढ़ा गया है। गोल्फ क्लब के ऊपर एक छोटी गेंद विश्व (ग्लोब) के रूप में बनाई गई है, जो यह संदेश देती है कि कैसे दुनिया का पर्यावरण और वैश्विक व्यवस्था शक्तिशाली नेताओं के खेल का खिलौना बनकर रह गई है।
मूर्तिकार का तर्क: 'द एम्परर्स न्यू क्लोथ्स' और क्लाइमेट संकट पर तीखा विरोध
मूर्तिकार जेन्स गैलशियोट ने इस कलाकृति को अमेरिका की अस्थिर विदेश नीतियों और जलवायु समझौतों से पीछे हटने के खिलाफ एक 'व्यंग्यात्मक चीख' (Satirical Outcry) करार दिया है। उन्होंने मशहूर लेखक हैंस क्रिश्चियन एंडरसन की अमर लोककथा 'द एम्परर्स न्यू क्लोथ्स' (राजा के नए कपड़े) का हवाला देते हुए कहा कि जैसे कथा में नग्न राजा यह समझता था कि उसने सबसे खूबसूरत पोशाक पहनी है, वैसे ही ट्रंप को लगता है कि 23-कैरेट का सोना उन्हें महान बनाता है, जबकि पूरी दुनिया उनके असली खोखलेपन और संवेदनहीनता को साफ देख सकती है।
गैलशियोट के अनुसार, दुनिया भर के कई देश और अंतरराष्ट्रीय संगठन टैरिफ के डर, फंड कटौती या निर्वासन की धमकियों के चलते ट्रंप प्रशासन की नीतियों के खिलाफ बोलने से हिचकिचाते हैं। ऐसे में कला के जरिए इस कड़वे सच को सामने लाना जरूरी था। मूर्तिकार ने प्रदर्शन के दौरान सांसदों और आगंतुकों को इस मूर्ति की हजारों 3D-प्रिंटेड छोटी प्रतिकृतियां (मिनी-रेप्लिका) भी बांटीं।
यूरोपीय संसद में राजनीतिक घमासान, दक्षिणपंथी गुटों ने जताया कड़ा विरोध
इस प्रदर्शनी को डेनिश सांसद और यूरोपीय संसद के सदस्य पेर क्लॉसन के सहयोग से स्ट्रासबर्ग में अस्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया। हालांकि, संसद के भीतर सभी दल इस प्रदर्शन से खुश नहीं हैं। संसद के कई दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी गुटों (जैसे स्वीडन डेमोक्रेट्स) ने इसे वामपंथी एजेंडा करार देते हुए तीखी आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एक लोकतांत्रिक महाशक्ति के वर्तमान राष्ट्रपति का इस तरह अश्लील और अपमानजनक रूप संसद परिसर में दिखाना कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
विवादों के बावजूद यह मूर्ति स्ट्रासबर्ग के बाद आगामी अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलनों में भी ले जाई जाने वाली है। ट्रंप की नीतियों के विरोध का यह अनोखा और चौंकाने वाला तरीका इस समय पूरे यूरोप और अमेरिका में चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।