BREAKING:
October 08 2026 06:34 pm

फोन पर शादी और अगले ही दिन फांसी, ईरान की जेल से आई रोंगटे खड़े कर देने वाली दर्दनाक कहानी

Post

ईरान की दस्तगर्द सेंट्रल जेल से सामने आई एक घटना ने पूरी दुनिया के मानवाधिकार संगठनों और आम नागरिकों के दिलों को झकझोर कर रख दिया है। सरकार विरोधी प्रदर्शनों के आरोप में मौत की सजा पाने वाले 25 वर्षीय युवक अलीरेजा सेपाही ने अपनी जिंदगी के आखिरी घंटों में एक ऐसा फैसला लिया, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। फांसी दिए जाने से ठीक एक दिन पहले, 4 अक्टूबर को अलीरेजा ने जेल की चारदीवारी से अपनी मंगेतर महशाद काशानी के साथ फोन पर शादी की रस्में पूरी कीं। लेकिन शादी के चंद घंटों बाद ही, 5 अक्टूबर की सुबह ईरानी हुकूमत ने उसे फांसी के फंदे पर लटका दिया।

इस दर्दनाक दास्तान पर नोबेल शांति पुरस्कार विजेता शिरीन इबादी ने बेहद भावुक शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा— "वह कल दूल्हा बना था, और आज उन्होंने उसे फांसी दे दी।" जेल की सलाखों, अलग-अलग बैरकों और मौत के साए के बीच हुई इस शादी ने ईरान में मानवाधिकारों की भयावह स्थिति को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब कर दिया है।

अलग-अलग जेलों में बंद था जोड़ा, वकील ने टेलीफोन पर कराई शादी

अलीरेजा सेपाही और 22 साल की महशाद काशानी की गिरफ्तारी से पहले ही सगाई हो चुकी थी। जनवरी में हुए देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान दोनों को अलग-अलग ठिकानों से हिरासत में ले लिया गया था। महशाद काशानी को पांच साल की कैद की सजा सुनाकर दौलताबाद जेल भेज दिया गया, जबकि अलीरेजा को इस्फहान की दस्तगर्द जेल में मौत की सजा का इंतजार करने के लिए बंद रखा गया। जब यह तय हो गया कि अलीरेजा को अगली सुबह फांसी दी जानी है, तो मानवाधिकार वकील अमीरसलार दाऊदी की मदद से दोनों के बीच एक फोन कॉल का प्रबंध किया गया।

जेल प्रशासन ने दोनों को आखिरी बार आमने-सामने मिलने या एक-दूसरे का हाथ थामने की इजाजत देने से साफ इनकार कर दिया था। अधिकारियों का तर्क था कि चूंकि कागजों पर उनकी शादी दर्ज नहीं थी, इसलिए उन्हें व्यक्तिगत मुलाकात का अधिकार नहीं है। ऐसे में अलग-अलग जेलों से फोन लाइन पर ही शादी की कसमें पढ़ी गईं। दोनों परिवारों की सहमति से पवित्र कुरान, रॉक कैंडी और एक लाल गुलाब के प्रतीकात्मक मेहर के साथ निकाह कबूल किया गया। वकीलों को उम्मीद थी कि शादी की यह औपचारिकता शायद फांसी को कुछ समय के लिए टालने का कानूनी आधार बन सके, लेकिन प्रशासन ने अगली ही सुबह फांसी का फरमान तामील कर दिया।

पहले हार्ट अटैक ने बचाई थी जान, लेकिन मौत के साए से नहीं बच सका अलीरेजा

अलीरेजा सेपाही का केस शुरू से ही बेहद विवादों में रहा था। उसे इस्फहान के 'अलीखानी स्क्वायर' में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान चार पुलिस अधिकारियों की मौत के मामले में 14 अन्य लोगों के साथ आरोपी बनाया गया था। हालांकि मानवाधिकार संगठनों और निष्पक्ष फुटेज से यह बात सामने आई थी कि घटना के वक्त वह उस जगह मौजूद ही नहीं था। इसके बावजूद सुरक्षा एजेंसियों ने कथित तौर पर जबरन कबूलनामे के आधार पर उसे मौत की सजा दिलवाई।

दिलचस्प और त्रासद पहलू यह है कि 28 जुलाई को अलीरेजा को सरेआम चौराहे पर फांसी दी जानी थी। लेकिन फांसी के तख्ते पर चढ़ने से चंद मिनट पहले ही उसे दिल का गंभीर दौरा (हार्ट अटैक) पड़ गया। बेहोश होने के कारण उसे आनन-फानन में अल-जहरा अस्पताल ले जाया गया, जिससे उस दिन उसकी फांसी टल गई, जबकि उसके चचेरे भाई को उसी वक्त फांसी दे दी गई। इलाज के बाद जैसे ही वह स्वस्थ हुआ, उसे दोबारा जेल की कालकोठरी में डाल दिया गया और आखिरकार 5 अक्टूबर को उसकी जान ले ली गई।

अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को नहीं सौंपा गया शव, 200 किमी दूर भेजा गया

क्रूरता का सिलसिला अलीरेजा की मौत के बाद भी नहीं थमा। संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार विशेष दूत (UN Special Rapporteur) माई सातो के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने अलीरेजा का शव उसके गृहनगर इस्फहान में दफनाने के लिए परिवार को सौंपने से इनकार कर दिया। सरकार को डर था कि उसके जनाजे में जुटने वाली भीड़ कहीं दोबारा बड़े जन-आंदोलन का रूप न ले ले।

अधिकारियों ने परिवार को निर्देश दिया कि वे इस्फहान से करीब 200 किलोमीटर दूर 'काशान' शहर जाएं, जहां कड़े सुरक्षा पहरे के बीच उसके शव को सीधे दफना दिया गया। पीछे छूट गई उसकी 22 वर्षीय दुल्हन महशाद, जो अब दौलताबाद जेल की सलाखों के पीछे बेबसी और आंसुओं के साथ अपनी पांच साल की सजा काट रही है। फोन पर शादी और अगले ही दिन फंदे की यह कहानी आज दुनिया भर में सत्ता की अमानवीयता और एक अधूरी प्रेम कहानी के प्रतीक के तौर पर गूंज रही है।