भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ेगा तनाव? जमात-ए-इस्लामी का विरोध मार्च और 'ह्यूमन शील्ड' बनाने का बड़ा ऐलान
भारत और बांग्लादेश के बीच जारी कूटनीतिक और सीमाई सरगर्मियों के बीच एक बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश की प्रमुख कट्टरपंथी विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी 11 इस्लामी दलों के गठबंधन ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने की घोषणा की है।
यह प्रदर्शन कथित तौर पर भारत द्वारा की जा रही 'पुश-इन' (जबरन घुसपैठ) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की कार्रवाई में बांग्लादेशी नागरिकों के मारे जाने के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। सबसे संवेदनशील बात यह है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना-विरोधी छात्र संगठन नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) ने सीमा पर रहने वाले आम बांग्लादेशी नागरिकों से भारत के खिलाफ 'ह्यूमन शील्ड' (मानव दीवार) बनकर खड़े होने का खुला आह्वान किया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब दोनों देशों के बीच नई दिल्ली में उच्च स्तरीय सीमा वार्ता अभी-अभी समाप्त हुई है।
क्या है जमात-ए-इस्लामी का पूरा शेड्यूल?
बुधवार को ढाका स्थित जमात-ए-इस्लामी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन के समन्वयक और जमात के सहायक महासचिव एएचएम हामिदुर रहमान आजाद ने आंदोलन के विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा की:
12 जून (शुक्रवार): भारत से सटे बांग्लादेश के सभी सीमावर्ती जिलों और महत्वपूर्ण सीमा चौकियों (Border Outposts) पर विशाल विरोध रैलियां और मार्च निकाला जाएगा।
15 जून (सोमवार): देश की राजधानी ढाका में एक विशाल विरोध सभा और जुलूस का आयोजन कर सरकार और भारत के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।
गठबंधन की ताकत: आपको बता दें कि इस 11 दलीय गठबंधन में नेशनल सिटीजन पार्टी, बांग्लादेश खिलाफत मजलिस, खिलाफत मजलिस, अमर बांग्लादेश पार्टी और जातीय गणतांत्रिक पार्टी जैसे प्रमुख संगठन शामिल हैं। यह गठबंधन इसी साल 12 फरवरी को हुए आम चुनाव से ठीक पहले वजूद में आया था और वर्तमान में बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ी विपक्षी ताकत के रूप में उभरा है।
'ह्यूमन शील्ड' बनाने की खतरनाक अपील
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एनसीपी (NCP) के मुख्य समन्वयक नासिरुद्दीन पटवारी ने सीमाई इलाकों में रहने वाले नागरिकों को उकसाते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश सीमा की 'जीरो लाइन' के पास रहने वाले हमारे भाई-बहन गंभीर मानवीय संकट का सामना कर रहे हैं।
पटवारी ने मांग की कि 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' (BGB) को सीमा पर और अधिक आक्रामक तथा मजबूत किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय निवासियों से कहा कि वे खुद बॉर्डर पर 'ह्यूमन शील्ड' (मानवीय ढाल) बनकर खड़े हो जाएं ताकि भारत की तरफ से किसी भी तरह की गतिविधि को रोका जा सके।
विपक्ष ने अपनी ही सरकार और भारत पर मढ़े गंभीर आरोप
जमात नेता हामिदुर रहमान आजाद ने वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान की बीएनपी (BNP) सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि सरकार भारत के सामने पूरी तरह 'नरम रुख' अपनाए हुए है और देश की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कुछ आंकड़े पेश करते हुए निम्नलिखित दावे किए:
कथित पुश-इन: पिछले तीन महीनों (मार्च, अप्रैल और मई) में सीमा पर भारत की तरफ से 50 से अधिक कथित 'पुश-इन' की घटनाएं हुईं, जिसके तहत 2,479 लोगों को जबरन बांग्लादेश भेजने का प्रयास किया गया।
मौतों का दावा: बीएनपी सरकार के शुरुआती 100 दिनों के भीतर भारतीय बीएसएफ की गोलीबारी में 19 बांग्लादेशी नागरिक मारे गए और 24 घायल हुए। इसके अलावा, बीएसएफ और म्यांमार की अराकान आर्मी द्वारा कुल 83 लोगों को हिरासत में लिया गया।
भारत का दोटूक जवाब: 'कानूनी प्रक्रिया के तहत हो रहा है निर्वासन'
भारत सरकार ने बांग्लादेशी विपक्षी दलों द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) का आधिकारिक रुख: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत किसी भी नागरिक को जबरन सीमा पार नहीं धकेल रहा है। देश की सुरक्षा और संप्रभुता के तहत कानूनन केवल उचित राष्ट्रीयता सत्यापन (Verification) और पूरी कानूनी प्रक्रियाओं के बाद ही अवैध विदेशी नागरिकों को द्विपक्षीय समझौतों के तहत वापस उनके देश भेजा जा रहा है। भारत ने बांग्लादेश सरकार से अपील की है कि वे राष्ट्रीयता सत्यापन की प्रक्रिया को और तेज करें ताकि अवैध प्रवासियों का प्रत्यावर्तन (Deportation) सुचारू और शांतिपूर्ण ढंग से हो सके।
राज्यों में सख्त कार्रवाई जारी: भारतीय अधिकारियों के अनुसार, पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की पहचान का काम तेजी से चल रहा है। पश्चिम बंगाल सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कानूनी रूप से लगभग 4,800 अवैध प्रवासियों को वापस बांग्लादेश भेजा जा चुका है, जबकि 836 अन्य को उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत हिरासत में रखा गया है।
कूटनीतिक बातचीत के बीच सड़क पर संग्राम की तैयारी
गौर करने वाली बात यह है कि जमात-ए-इस्लामी का यह हिंसक और आक्रामक रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब 8 से 11 जून तक नई दिल्ली में भारत के 'बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स' (BSF) और 'बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश' (BGB) के बीच 57वीं महानिदेशक (DG) स्तरीय वार्ता संपन्न हुई है। ढाका ने इस आधिकारिक बैठक में 'पुश-इन' के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था।
लेकिन, दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों के बीच कूटनीतिक समाधान की कोशिशों के बीच बांग्लादेश के कट्टरपंथी संगठनों द्वारा मुद्दे को सड़कों पर ले जाने और 'ह्यूमन शील्ड' बनाने के ऐलान ने 4,096 किलोमीटर लंबी विश्व की सबसे बड़ी स्थलीय सीमाओं में से एक पर सुरक्षा बलों के लिए एक नया और गंभीर सुरक्षा संकट खड़ा कर दिया है।