आर्थिक तबाही के बीच पाकिस्तान ने हर ढाई महीने में लॉन्च की नई सैटेलाइट, भारत के लिए क्यों खड़ी हुई बड़ी सुरक्षा चिंता?
कंगाली और भारी विदेशी कर्ज के दलदल में धंसे पड़ोसी देश पाकिस्तान से एक ऐसी खबर सामने आ रही है, जिसने भारतीय रक्षा और रणनीतिक रणनीतिकारों के कान खड़े कर दिए हैं। "खाने को रोटी नहीं, लेकिन अंतरिक्ष में सुपरपावर बनने की होड़"— यह जुमला इस समय पाकिस्तान पर बिल्कुल सटीक बैठ रहा है।
ताजा रणनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, गंभीर आर्थिक बदहाली के बावजूद पाकिस्तान ने चीन की मदद से पिछले 16 महीनों के भीतर 6 अत्याधुनिक अर्थ-ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (Earth-Observation Satellites) अंतरिक्ष में स्थापित कर दिए हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि पाकिस्तान औसतन हर ढाई महीने में एक नई सैटेलाइट लॉन्च कर रहा है। पाकिस्तान की इस अचानक बढ़ी अंतरिक्षीय सक्रियता ने भारत के नीति-निर्माताओं की चिंता इसलिए बढ़ा दी है क्योंकि इसी दौरान भारत का अपना स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (नाविक) अपने इतिहास के सबसे बड़े तकनीकी संकट से गुजर रहा है।
पाकिस्तान की 'आसमानी आँखें': भारत के हर कोने पर नजर
रक्षा विशेषज्ञों और सेवानिवृत्त रियर एडमिरल सुधीर पिल्लई के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा इतनी तेजी से लॉन्च किए जा रहे इन उपग्रहों की बनावट (Architecture) और उनके सेंसर पेलोड केवल नागरिक उपयोग के लिए नहीं हैं। यह असल में पाकिस्तान का एक शक्तिशाली और गुप्त सैन्य निगरानी तंत्र (Surveillance System) है, जिसे भारतीय क्षेत्र की जासूसी करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO (सुपारको) ने चीन के स्पेस इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉन्चिंग पैड और भारी-भरकम रॉकेटों की मदद से जिन 6 सैटेलाइट्स का जाल बिछाया है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
PAUSAT-1
PRSC-EO1
PRSS-2
HS-1
PRSC-EO2
PRSC-EO3
भारत के लिए क्यों बनी 'डबल टेंशन' की बात?
पाकिस्तान की यह चाल भारत के लिए दोहरे संकट की तरह सामने आई है:
1. सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट और खुफिया निगरानी (Espionage)
पाकिस्तान की ये सभी सैटेलाइट्स सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (Sun-synchronous orbit) में तैनात की गई हैं। यह एक ऐसी विशेष कक्षा होती है जहां से ये उपग्रह भारत के उत्तरी और पश्चिमी संवेदनशील क्षेत्रों, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और पंजाब की सीमाओं के ऊपर से बार-बार गुजरते हैं।
दिखावा बनाम हकीकत: आधिकारिक कागजातों में पाकिस्तान ने दावा किया है कि ये उपग्रह कृषि, मैपिंग और आपदा प्रबंधन (Civilian Use) के लिए हैं।
सैन्य खतरा: लेकिन हकीकत यह है कि इनमें बेहद उच्च क्षमता वाले हाई-रिज़ॉल्यूशन ऑप्टिकल इमेजिंग और हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं। इनके जरिए पाकिस्तानी सेना भारतीय सीमाओं पर सैनिकों की तैनाती, बंकरों के निर्माण, सैन्य काफिलों की आवाजाही और रणनीतिक हवाई अड्डों की बेहद साफ तस्वीरें चौबीसों घंटे हासिल कर रही है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि चीन भी इस डेटा का सीधा इस्तेमाल भारत के खिलाफ कर सकता है।
2. संकट में भारत का 'स्वदेशी GPS' (NavIC)
एक तरफ जहां पाकिस्तान का जासूसी नेटवर्क मजबूत हो रहा है, वहीं अमेरिकी जीपीएस (GPS) पर भारत की निर्भरता खत्म करने के लिए बनाया गया हमारा स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम NavIC (Navigation with Indian Constellation) इस वक्त तकनीकी विफलताओं से जूझ रहा है:
परमाणु घड़ियों की विफलता: NavIC उपग्रहों में सटीक स्थिति (Positioning) बताने के लिए लगाई गई सबसे महत्वपूर्ण 'रूबिडियम परमाणु घड़ियाँ' (Rubidium Atomic Clocks) कई सैटेलाइट्स में एक-एक कर खराब हो चुकी हैं।
उम्र पूरी होना और कक्षा की समस्या: साल 2013 से 2016 के बीच छोड़े गए भारत के पहली पीढ़ी (First Generation) के कई उपग्रह अब अपनी कार्य अवधि (Life Span) पूरी कर चुके हैं। इसरो (ISRO) ने जब इनके विकल्प के रूप में दूसरी पीढ़ी का रिप्लेसमेंट उपग्रह NVS-02 लॉन्च किया, तो वह प्रोपल्शन (प्रणोदन) संबंधी दिक्कतों के कारण अपनी सही और सटीक कक्षा (Orbit) में स्थापित नहीं हो सका।
संख्या बल में कमी: किसी भी क्षेत्रीय नेविगेशन प्रणाली को प्रभावी ढंग से चलाने के लिए कम से कम 7 उपग्रहों का एक्टिव होना अनिवार्य है। विश्वसनीय 3D पोजीशनिंग के लिए न्यूनतम 4 उपग्रह चाहिए, लेकिन वर्तमान में भारत के पास केवल 3 उपग्रह (IRNSS-1B, IRNSS-1I और NVS-01) ही पूर्ण सेवा दे पा रहे हैं।
कारगिल की सीख और संप्रभुता का सवाल
भारत के लिए NavIC का सुचारू रूप से चलना सिर्फ मोबाइल मैपिंग के लिए नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता और सैन्य सुरक्षा के लिए बेहद नाजुक है। साल 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान जब भारत ने घुसपैठियों की सही लोकेशन जानने के लिए अमेरिका से जीपीएस (GPS) डेटा मांगा था, तो अमेरिका ने सुरक्षा कारणों का हवाला देकर मना कर दिया था। इसी कड़वे अनुभव के बाद भारत ने अपना खुद का सिस्टम विकसित किया था, जो मिसाइल गाइडेंस (Missile Guidance), नौसेना संचालन और सुरक्षित सैन्य संचार के लिए रीढ़ की हड्डी है।
ऐसे समय में जब पाकिस्तान और चीन मिलकर भारत की सीमाओं पर आसमान से चौबीसों घंटे नजर रख रहे हैं, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए अपने NavIC सिस्टम को नए उपग्रहों के जरिए तुरंत पुनर्जीवित करना और अंतरिक्ष में भारत की बढ़त को बनाए रखना बेहद जरूरी हो गया है।