पाकिस्तान के कहने पर ईरान को दी मोहलत...', राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा खुलासा; भारत-पाक परमाणु युद्ध रोकने का भी किया दावा!
वाशिंगटन से अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीति को हिलाकर रख देने वाली एक बेहद बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार, 10 जून 2026 को वाइट हाउस में मीडिया से बातचीत और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की गुजारिश पर ईरान को सैन्य कार्रवाई से थोड़ी राहत (मोहलत) दी थी। इसके साथ ही ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच 'परमाणु युद्ध' (Nuclear War) रुकवाने का अपना पुराना दावा एक बार फिर दोहराया और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी सेना के एक अत्यंत गुप्त और सफल 'ऑपरेशन' की जानकारी दुनिया के सामने रखी।
'अगर मैं न होता तो भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध हो जाता'
वाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी सेना की ताकत का लोहा माना और दक्षिण एशिया (South Asia) के भू-राजनीतिक समीकरणों पर बोलते हुए भारत का विशेष जिक्र किया।
डोनाल्ड ट्रंप का सनसनीखेज दावा: "पाकिस्तान के अनुरोध पर मैंने ईरान को थोड़ी राहत दी थी। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने मुझसे इसके लिए खास गुजारिश की थी। इसके बदले में हमने उन्हें (पाकिस्तान को) भारत के साथ युद्ध करने से रोका। मैं पूरी ईमानदारी से कहता हूं कि अगर उस वक्त मैं (मध्यस्थ के रूप में) न होता, तो भारत और पाकिस्तान के बीच विनाशकारी परमाणु युद्ध हो गया होता।"
ट्रंप ने आगे कहा कि पाकिस्तान के ईरान के साथ बेहद करीबी और दोस्ताना संबंध हैं। यही वजह है कि पाकिस्तानी नेतृत्व वर्तमान में ईरान को सही रास्ते पर लाने और अमेरिका के साथ शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिका का 'खुफिया मिशन' सफल, निकाला 10 करोड़ बैरल तेल
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना द्वारा पिछले महीने चलाए गए एक महा-गुप्त मिशन (Secret Military Mission) का भंडाफोड़ करते हुए अपनी पीठ थपथपाई।
ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर इस मिशन की इनसाइड स्टोरी साझा करते हुए लिखा:
गुप्त निर्देश: "पिछले महीने, मैंने अपनी शानदार अमेरिकी मिलिट्री को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल टैंकरों और अंतरराष्ट्रीय कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए एक बेहद गुप्त मिशन चलाने का आदेश दिया था।"
मिशन के नतीजे: "आज मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिकी सेना के इस गुप्त पराक्रम के चलते 10 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते सुरक्षित रूप से वैश्विक खुले बाजार (Global Market) तक पहुंच गया है।"
जहाजों का रेस्क्यू: इस खतरनाक ऑपरेशन के दौरान दुनिया के अलग-अलग देशों के 200 से अधिक कमर्शियल जहाजों को ईरानी खतरे के बीच से सुरक्षित बाहर निकाला गया।
ईरान को भनक तक नहीं लगी: ट्रंप का दावा है कि जब यह पूरा ऑपरेशन चल रहा था, तब ईरान की सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। ट्रंप ने गरजते हुए कहा कि अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान का नहीं, बल्कि अमेरिका का पूरा नियंत्रण है, जो कि ईरान की बड़ी सैन्य हार और उसके आर्थिक संकट का सबसे बड़ा सबूत है। इस खुफिया मिशन की वजह से ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आई है।
'परमाणु संपन्न ईरान इजरायल को नामोनिशान मिटा देता'
ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं (Nuclear Ambitions) पर कड़ा प्रहार करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने पूरी दुनिया को आगाह किया। उन्होंने कहा कि एक परमाणु-हथियार संपन्न ईरान पूरे मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) को हमेशा के लिए अस्थिर कर देगा। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा, "अगर ईरान के पास परमाणु बम आ जाता, तो वे इजरायल का नामोनिशान मिटा देते। पूरा मिडल ईस्ट तबाह हो जाता और वे निश्चित रूप से हम पर (अमेरिका) भी मिसाइलें फायर करने से पीछे नहीं हटते।"
अपाचे हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद हमलों की झड़ी
अपने आक्रामक तेवर दिखाते हुए ट्रंप ने साफ किया कि ईरान द्वारा अमेरिकी 'AH-64 अपाचे' हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने के बाद अब अमेरिका के पास ईरान को मटियामेट करने का पूरा कानूनी और सैन्य आधार है।
सैन्य कार्रवाई पर ट्रंप के तीखे बोल: "हेलीकॉप्टर की उस कायराना घटना के आधार पर, मुझे लगता है कि हमें ईरान के भीतर घुसकर सैन्य कार्रवाई करने का पूरा अधिकार मिल गया है। हमने कल भी उन पर करारा प्रहार किया था और आज भी हम उन पर अब तक का सबसे जोरदार हमला करने जा रहे हैं। हम चुप नहीं बैठेंगे और ईरान पर बेहद जबरदस्त तरीके से सैन्य हमले जारी रखेंगे।"
कूटनीति बनाम सैन्य दबाव: अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बहुआयामी बयान अमेरिकी विदेश नीति के 'कैरेट एंड स्टिक' (गाजर और छड़ी) सिद्धांत को दर्शाता है। अमेरिका एक तरफ जहां पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक समझौते की खिड़की खुली रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ वह ईरान पर चौतरफा सैन्य और आर्थिक दबाव बनाकर उसे घुटनों पर लाने की रणनीति पर काम कर रहा है।