अलीगढ़ के बस अड्डों को मिलेगी नई पहचान: शहीदों और महापुरुषों के नाम पर होंगे नामकरण
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) के प्रमुख बस स्टेशनों को अब एक नई सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान मिलने जा रही है। ताला और तालीम की नगरी के रूप में मशहूर अलीगढ़ और आसपास के ग्रामीण अंचलों में स्थित रोडवेज बस डिपो व टर्मिनलों के नाम अब देश की आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले अमर शहीदों, स्वतंत्रता सेनानियों और क्षेत्र के प्रमुख ऐतिहासिक महापुरुषों के नाम पर रखे जाएंगे। शासन की मंशा के अनुरूप परिवहन निगम मुख्यालय ने इस प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति जताते हुए स्थानीय प्रशासन व क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों से नामों का पैनल और विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों के माध्यम से आने वाली पीढ़ियों को क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और बलिदानियों के योगदान से परिचित कराना है।
मदार गेट, गांधी पार्क और सारसौल जैसे अड्डों का बदलेगा स्वरूप
वर्तमान में अलीगढ़ शहर और जिले के अधिकांश बस स्टैंड अपने मोहल्लों या भौगोलिक चौराहों के नाम से जाने जाते हैं—जैसे मदार गेट बस स्टैंड, गांधी पार्क बस स्टेशन, सारसौल और अतरौली बस अड्डा। नए प्रस्ताव के तहत इन सभी प्रमुख बस स्टेशनों का कायाकल्प करने के साथ-साथ उनके प्रवेश द्वारों और मुख्य टिकट परिसरों पर संबंधित महापुरुष या बलिदानी के नाम का भव्य तोरणद्वार व स्मारक पट्टिका लगाई जाएगी। स्थानीय जन प्रतिनिधियों और इतिहासविदों की सलाह से क्षेत्र के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों और परमवीर चक्र या शौर्य चक्र विजेताओं के नामों को प्राथमिकता दी जा रही है।
आधुनिक सुविधाओं और एयरपोर्ट की तर्ज पर पुनर्विकास से भी जुड़ेगी योजना
बस अड्डों के केवल नाम ही नहीं बदले जाएंगे, बल्कि उन्हें आधुनिक जनसुविधाओं से भी लैस किया जाएगा। परिवहन विभाग की योजना के अनुसार, पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत चयनित बस स्टेशनों को हाई-टेक यात्री सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। इनमें वातानुकूलित वेटिंग लाउंज, डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड, ऑटोमेटेड टिकट वेंडिंग मशीनें, स्वच्छ खान-पान केंद्र और आधुनिक सुरक्षा प्रणाली शामिल होंगी। बस स्टेशन परिसर में संबंधित महापुरुष की जीवनी और उनके योगदान को दर्शाने वाली डिजिटल वॉल या गैलरी भी बनाई जाएगी ताकि दूर-दराज से आने वाले मुसाफिर उनके जीवन से प्रेरणा ले सकें।
स्थानीय स्तर पर स्वागत, जल्द शासन स्तर से जारी होगी अंतिम अधिसूचना
परिवहन निगम के इस कदम का स्थानीय नागरिकों, पूर्व सैनिकों के संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने खुलकर स्वागत किया है। लोगों का मानना है कि लंबे समय से उपेक्षित रहे स्थानीय बलिदानियों और विभूतियों को सम्मान देने का यह एक सराहनीय और सार्थक प्रयास है। क्षेत्रीय प्रबंधक के अनुसार, जिला स्तरीय समिति की संस्तुति के बाद नामों की अंतिम सूची शासन को भेजी जाएगी, जिसके बाद कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी कर नामकरण की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।