यूपी में लैंड यूज बदलवाना हुआ आसान और सस्ता, विकास प्राधिकरणों को मिले नए अधिकार
उत्तर प्रदेश में निजी व व्यावसायिक निर्माण के लिए जमीन का भू-उपयोग (लैंड यूज) बदलवाने की प्रक्रिया को योगी सरकार ने बेहद सरल, पारदर्शी और सस्ता बना दिया है। शासन स्तर से जारी ऐतिहासिक शासनादेश अब प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों—जैसे एलडीए, केडीए, जीडीए और नोएड़ा में पहुंच चुका है। नए नियमों के तहत 6,000 वर्ग मीटर (लगभग 1.5 एकड़) तक के भूखंडों का लैंड यूज बदलने की पूरी शक्ति अब स्थानीय विकास प्राधिकरण बोर्ड को सौंप दी गई है। पहले छोटे-से-छोटे प्लॉट के भू-उपयोग परिवर्तन के लिए भी फाइल शासन (सचिवालय) भेजनी पड़ती थी, जिससे महीनों तक काम लटका रहता था। अब स्थानीय स्तर पर ही फाइलों का त्वरित निस्तारण होगा, जिससे आम भूस्वामियों, छोटे उद्यमियों और रियल एस्टेट सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी।
6,000 वर्ग मीटर तक शासन की मंजूरी से छूट, 22 दिनों की समयसीमा तय
आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरुप्रसाद द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, मास्टर प्लान या जोनल प्लान के दायरे में आने वाली 6,000 वर्ग मीटर या उससे कम क्षेत्रफल वाली जमीनों के आवेदनों को शासन की मंजूरी की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं:
22 दिनों में संस्तुति: आवेदन जमा होने के बाद विकास प्राधिकरण को 22 दिनों के भीतर अपनी तकनीकी संस्तुति देनी होगी।
15 दिन में आपत्ति व सुझाव: प्राधिकरण बोर्ड के प्रारंभिक निर्णय के 15 दिनों के भीतर अखबार और वेबसाइट पर सार्वजनिक नोटिस जारी कर आपत्तियां मांगी जाएंगी।
त्वरित स्वीकृति: कोई वैध आपत्ति न आने पर विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष के अनुमोदन के बाद मात्र 15 दिनों के भीतर परिवर्तन शुल्क का नोटिस जारी कर दिया जाएगा।
एक प्रतिशत की सीमा: विकास प्राधिकरण बोर्ड किसी भी मौजूदा मास्टर प्लान भू-उपयोग का अधिकतम 1 प्रतिशत तक ही परिवर्तन स्वीकृत कर सकेगा, जिससे सुनियोजित विकास का संतुलन न बिगड़े।
परिवर्तन शुल्क में 50% तक की कटौती, किस्तों के ब्याज पर भी राहत
सरकार ने न केवल लालफीताशाही खत्म की है बल्कि भू-उपयोग परिवर्तन की लागत को भी आधा कर दिया है। संशोधित नियमों के तहत लैंड यूज कन्वर्जन चार्ज की दरों में 5 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक की भारी कमी की गई है।
इसके साथ ही किस्तों पर भुगतान करने वाले भूस्वामियों के लिए ब्याज दरों में बड़ा फेरबदल किया गया है। पहले किस्तों पर सीधे 12 प्रतिशत का भारी वार्षिक ब्याज वसूला जाता था। अब इसे घटाकर MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) + 1% कर दिया गया है, जिससे ब्याज का वित्तीय बोझ काफी कम हो जाएगा। इसके अलावा निर्धारित समयावधि में भुगतान न कर पाने की स्थिति में विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष को आवेदन देकर इस अवधि को एक वर्ष और बढ़ाने की राहत भी दी गई है।
छह सदस्यीय समिति करेगी आपत्तियों का निस्तारण
भू-उपयोग परिवर्तन के दौरान आने वाली आपत्तियों और जनसुझावों के निष्पक्ष परीक्षण के लिए एक उच्चस्तरीय छह सदस्यीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति के अध्यक्ष संबंधित विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष होंगे। इसमें जिलाधिकारी स्तर से नामित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, नगर आयुक्त, सहयुक्त नगर नियोजक, मंडलायुक्त के प्रतिनिधि और मुख्य नगर नियोजक (सदस्य सचिव) शामिल रहेंगे। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब इसे कम से कम एक प्रमुख समाचार पत्र और प्राधिकरण की आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य किया गया है।
रियल एस्टेट, उद्योगों और आम जनता को मिलेगा सीधा फायदा
इस नीतिगत सुधार का सबसे बड़ा लाभ उन छोटे भूखंड मालिकों और व्यवसायियों को मिलेगा जो अपनी आवासीय या कृषि भूमि पर वेयरहाउस, छोटे उद्योग, अस्पताल, स्कूल या दुकानें खोलना चाहते थे। पहले फाइलों के लखनऊ सचिवालय में महीनों फंसे रहने से परियोजनाएं अटक जाती थीं और भ्रष्टाचार की गुंजाइश बनी रहती थी। अब स्थानीय प्राधिकरण स्तर पर 22 दिनों की निश्चित समयसीमा और आधी फीस लागू होने से प्रदेश में 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई रफ्तार मिलेगी।