अक्षय कुमार ने अपनी बेटी से जुड़े डरावने साइबर अनुभव को साझा किया, की बच्चों के लिए इंटरनेट सुरक्षा की अपील
- by Priyanka Tiwari
- 2025-10-04 15:02:00
India News Live,Digital Desk : बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार ने हाल ही में अपनी 13 साल की बेटी से जुड़े एक डरावने वाकये का जिक्र किया। इस अनुभव के जरिए उन्होंने बताया कि कैसे आज के बच्चे ऑनलाइन गेम्स खेलते-खेलते साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। यह घटना Mumbai में आयोजित Cyber Awareness Month 2025 के उद्घाटन समारोह में सामने आई।
वाकया: ऑनलाइन गेम में खतरनाक संदेश
अक्षय ने बताया कि कुछ महीने पहले उनकी बेटी एक ऑनलाइन मल्टीप्लेयर गेम खेल रही थी। तभी उसे एक अजनबी का मैसेज आया, जिसमें पूछा गया – “तुम लड़का हो या लड़की?” उनकी बेटी ने जवाब दिया “लड़की।” इसके बाद उसी शख्स ने बेटी से कहा कि क्या वह अपनी न्यूड तस्वीरें भेज सकती है।
खुशकिस्मती से, उनकी बेटी ने तुरंत गेम बंद कर दिया और अपनी मां ट्विंकल खन्ना को यह घटना बताई। अक्षय ने कहा, “यहीं से साइबर क्राइम शुरू होता है।”
अक्षय की महाराष्ट्र सरकार से खास अपील
इस घटना के बाद अक्षय ने महाराष्ट्र सरकार से अनुरोध किया कि हर स्कूल में 7वीं से 10वीं तक के छात्रों के लिए हर हफ्ते एक ‘साइबर पीरियड’ रखा जाए। इसमें बच्चों को सिखाया जाए कि इंटरनेट और गेमिंग की दुनिया में कौन-कौन से खतरे छिपे हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।
अक्षय ने कहा, “आज साइबर क्राइम सड़कों पर होने वाले अपराधों से भी बड़ा खतरा बन गया है। बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जागरूक करना बेहद जरूरी है।”
साइबर अपराधी बच्चों को कैसे फंसाते हैं?
1. ब्लैकमेलिंग:
ऑनलाइन स्कैमर अक्सर गेम्स में चीट कोड या शॉर्टकट का लालच देकर बच्चों को खतरनाक लिंक पर क्लिक करने के लिए मजबूर करते हैं। इन लिंक्स से स्पाइवेयर इंस्टॉल हो जाता है और अपराधियों को फोन का पूरा एक्सेस मिल जाता है। इसके बाद वे बच्चों की फोटो, चैट और बैंक डिटेल्स चुरा कर ब्लैकमेल करने लगते हैं।
उदाहरण के तौर पर:
लखनऊ: छठी कक्षा के एक छात्र ने ऑनलाइन गेमिंग में पिता के अकाउंट से 14 लाख रुपये गंवा दिए और बाद में डर और शर्म के चलते आत्महत्या कर ली।
इंदौर: 7वीं के छात्र ने इसी तरह ब्लैकमेलिंग की वजह से अपनी जान दे दी।
2. ग्रूमिंग:
अपराधी गेमिंग चैट रूम और वॉयस चैनलों में बच्चों से दोस्ती करते हैं। धीरे-धीरे भरोसा जीत कर वे बच्चों पर दबाव डालते हैं कि वे अपनी निजी फोटो या वीडियो शेयर करें।
NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में देशभर में 4199 मामले ऐसे दर्ज हुए, जिनमें बच्चों को इसी तरह ग्रूमिंग और शोषण का शिकार बनाया गया।
क्यों जरूरी है बच्चों की जागरूकता?
साइबर अपराधी बहुत चालाकी से बच्चों को फंसाते हैं। पहले दोस्ती, फिर लालच या धमकी देकर निजी जानकारी देने पर मजबूर करते हैं। इसलिए:
पैरेंट्स को चाहिए कि बच्चों के ऑनलाइन गेमिंग और चैट पर नजर रखें।
बच्चों को इंटरनेट सुरक्षा और साइबर खतरे के बारे में समय-समय पर समझाएं।