अखिलेश यादव ने घोषित किए MLC उम्मीदवार: प्रत्याशियों के नाम पर बोले सब चौंक जाएंगे
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आगामी विधान परिषद (एमएलसी) चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में वरिष्ठ नेताओं, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ अहम बैठक के बाद शिक्षक और स्नातक क्षेत्र के लिए पार्टी प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अखिलेश यादव ने जहां एक ओर सभी प्रत्याशियों की जीत का दावा करते हुए उनके समर्थन की अपील की, वहीं दूसरी ओर अपने चिर-परिचित सियासी अंदाज में यह कहकर सबको चौंका दिया कि जब पार्टी के आगामी उच्च सदन के चेहरों के नाम पूरी तरह सामने आएंगे, तो राजनीतिक गलियारों में हर कोई आश्चर्यचकित रह जाएगा।
सपा प्रमुख के इस बयान के बाद राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली के राजनीतिक हलकों तक अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह बयान केवल एक सामान्य टिप्पणी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सामाजिक समीकरणों, शिक्षक-कर्मचारी वर्ग को साधने और 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के दायरे को उच्च सदन तक विस्तार देने की सोची-समझी रणनीति छिपी है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि उनके द्वारा चुने गए उम्मीदवार सीधे जमीन से जुड़े हुए हैं और उनके नामों की घोषणा विरोधी खेमे की चुनावी रणनीतियों को पूरी तरह ध्वस्त कर देगी।
शिक्षक और स्नातक MLC सीटों पर सपा का दांव: मैदान में उतरे ये दिग्गज चेहरे
समाजवादी पार्टी ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अपने अनुभवी और जमीनी संघर्ष से जुड़े नेताओं पर भरोसा जताया है। अखिलेश यादव ने विधान परिषद में विपक्ष के नेता रहे लाल बिहारी यादव के संघर्षों की खुलकर सराहना करते हुए उन्हें मिर्जापुर-वाराणसी शिक्षक क्षेत्र से दोबारा मैदान में उतारा है। उन्होंने कहा कि लाल बिहारी यादव ने हमेशा सदन में शिक्षकों के हक और मान-सम्मान की लड़ाई मुखर होकर लड़ी है।
इसके साथ ही सपा प्रमुख ने शिक्षक क्षेत्र के लिए लखनऊ सीट से सुशील कुमार, आगरा खंड से प्रकाश चंद्र गुप्ता, गोरखपुर-फैजाबाद निर्वाचन क्षेत्र से कमलेश यादव, मुरादाबाद-बरेली से दानिश अख्तर और मेरठ खंड से डॉ. नितिन तोमर को समाजवादी पार्टी का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। वहीं स्नातक निर्वाचन सीटों की बात करें तो लखनऊ स्नातक क्षेत्र से कांति सिंह, वाराणसी से आशुतोष सिन्हा, इलाहाबाद (प्रयागराज) से मान सिंह यादव, आगरा से शशांक यादव और मेरठ खंड से डॉ. परमिंदर भाटी को पार्टी का उम्मीदवार बनाया गया है। अखिलेश यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि शिक्षकों और शिक्षित युवाओं का पूरा सहयोग सपा प्रत्याशियों को मिलेगा।
'सब आश्चर्यचकित रह जाएंगे'... आखिर क्यों बोले सपा प्रमुख?
प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों द्वारा उच्च सदन और आगामी उम्मीदवारी पर पूछे गए सवालों के जवाब में अखिलेश यादव ने सस्पेंस भरा बयान दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी जब अपने आगामी फैसलों और राज्यसभा व उच्च सदन के बाकी नामों को अंतिम रूप देकर सार्वजनिक करेगी, तो लोग दंग रह जाएंगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, अखिलेश यादव के इस बयान के तीन प्रमुख सियासी मायने निकाले जा रहे हैं:
पहला कारण यह माना जा रहा है कि सपा इस बार उच्च सदन में परंपरागत जातीय समीकरणों से इतर ऐसे गैर-पारंपरिक और अप्रत्याशित चेहरों को आगे ला सकती है, जो समाज के बौद्धिक, शिक्षक और कर्मचारी वर्ग का वास्तविक प्रतिनिधित्व करते हों। दूसरा पहलू यह है कि हालिया लोकसभा चुनाव में 'पीडीए' फॉर्मूले की सफलता के बाद अखिलेश यादव विरोधी खेमे के मजबूत वोट बैंक माने जाने वाले शिक्षक और प्रबुद्ध वर्ग में सीधी सेंध लगाने की तैयारी में हैं। तीसरा कारण विरोधी दलों को अंतिम समय तक असमंजस में रखना है, ताकि विपक्षी दल पहले से कोई काट या जवाबी घेराबंदी न तैयार कर सकें।
पुरानी पेंशन योजना (OPS) और शिक्षामित्रों को लेकर फिर दोहराया बड़ा संकल्प
एमएलसी प्रत्याशियों की घोषणा के मंच से अखिलेश यादव ने एक बार फिर राज्य के कर्मचारियों और शिक्षकों के सबसे बड़े भावनात्मक मुद्दे को हवा दी। सपा प्रमुख ने दो टूक शब्दों में ऐलान किया कि 2027 में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनते ही उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को तुरंत प्रभाव से बहाल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी के आगामी घोषणापत्र में इसका पूरा वित्तीय मॉडल प्रस्तुत किया जाएगा कि कैसे राजकोष पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना ओपीएस को सफलतापूर्वक लागू किया जा सकता है।
इसके अलावा, प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में वर्षों से उपेक्षा का शिकार रहे शिक्षामित्रों को उनका खोया हुआ सम्मान लौटाने, उन्हें नियमित शिक्षक के रूप में समायोजित करने और वित्तविहीन शिक्षकों के लिए एक सम्मानजनक व स्थायी मानदेय नियमावली बनाने का वादा भी दोहराया गया। अखिलेश यादव ने कहा कि संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों के लंबित मुद्दों का समाधान और मदरसों की व्यवस्थाओं को पारदर्शी व सुदृढ़ बनाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।
23 अक्टूबर को मतदान, 27 को आएंगे नतीजे: क्या बदलेगा सियासी गणित?
उत्तर प्रदेश विधान परिषद के इन शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए चुनाव आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को औपचारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर निर्धारित की गई है, जबकि 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की संवीक्षा (जांच) होगी और 9 अक्टूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। इसके बाद 23 अक्टूबर को मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे और 27 अक्टूबर को मतों की गणना के साथ परिणाम घोषित किए जाएंगे।
एमएलसी का यह चुनाव राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी और सत्ता पक्ष दोनों के लिए अपनी जमीनी पकड़ साबित करने की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है। शिक्षक और स्नातक मतदाता सीधे तौर पर पढ़े-लिखे मध्यम वर्ग और सरकारी तंत्र का हिस्सा होते हैं। ऐसे में अखिलेश यादव द्वारा घोषित यह प्रत्याशी सूची और उनका चौंकाने वाला सियासी दावा यह दर्शाता है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा आम चुनाव से पहले हर छोटे-बड़े मंच पर अपनी आक्रामक मौजूदगी दर्ज कराने के मूड में है।