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September 30 2026 11:39 pm

'खूब पैसा कमाया होगा...', पूर्व IAS दिव्या मित्तल के राजनीति में आने पर बोले ओपी राजभर; कहा- IAS बनना आसान

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उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर राजनीति में उतरने के ऐलान के बाद प्रदेश की सियासत में तीखी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। मंगलवार को दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया पर वीडियो संदेश जारी कर उत्तर प्रदेश को अपनी कर्मभूमि बताया और किसी भी दल का झंडा थामने के बजाय जनता के बीच रहकर स्वतंत्र रूप से व्यवस्था से हिसाब मांगने की घोषणा की थी। इस घोषणा के कुछ ही घंटों के भीतर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश (ओपी) राजभर का बेहद तीखा और विवादित बयान सामने आया है। अपने बेबाक और चुटीले अंदाज के लिए जाने जाने वाले राजभर ने पूर्व आईएएस अधिकारी के फैसले पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि आज के दौर में जिसके पास पैसा आ जाता है, वह सीधे राजनीति का रुख कर लेता है।

'उन्होंने भी खूब पैसा कमाया होगा': ओपी राजभर का तीखा तंज

जब मीडिया ने पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल के राजनीति में आने और उत्तर प्रदेश से चुनावी किस्मत आजमाने की संभावनाओं को लेकर कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर से सवाल पूछा, तो उन्होंने तंज कसने में जरा भी देर नहीं लगाई। राजभर ने कहा कि आजकल का चलन बन गया है कि जो भी व्यक्ति पैसा कमा लेता है, वह सीधे राजनीति में कूदना चाहता है। उन्होंने आगे तंजिया लहजे में कहा कि जब वे इतने बड़े पद पर रहीं, तो उन्होंने भी खूब पैसा कमाया होगा और उनके पास खूब पैसा होगा, इसलिए वे चुनाव लड़ने की सोच रही हैं। राजभर के इस बयान ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है, क्योंकि दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में सिस्टम की खामियों, भ्रष्टाचार और नेताओं की नीयत पर सवाल खड़े किए थे, और अब सत्ता पक्ष के मंत्री ने सीधे तौर पर उनके ही वित्तीय बैकग्राउंड और इरादों पर सवाल दाग दिए हैं।

'IAS बनना आसान, लेकिन विधायक बनना मुश्किल': राजभर की दो टूक

ओपी राजभर ने नौकरशाही से राजनीति में आने वाले लोगों को जमीनी हकीकत का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि सरकारी कुर्सी पर बैठकर हुक्म चलाना और जनता के बीच जाकर चुनाव जीतना दो बिल्कुल अलग बातें हैं। राजभर ने कहा कि एक बार पढ़ाई करके प्रतियोगिता पास कर आईएएस बनना आसान हो सकता है, लेकिन जनता के बीच जाकर चुनाव लड़ना और विधायक (MLA) बनना कतई आसान नहीं है। राजनीति कोई फूलों की सेज नहीं है; यहां जमीन पर पसीना बहाना पड़ता है, धूप-धूल सहनी पड़ती है और कई बार तो जनता की गालियां और खरी-खोटी भी सुननी पड़ती हैं। राजभर ने संकेत दिया कि बड़े दफ्तरों के एसी कमरों से निकलकर चुनावी राजनीति के कड़े इम्तिहान में उतरना पूर्व अफसरों के लिए एक बेहद कठिन चुनौती साबित होगा।

दिव्या मित्तल का वीडियो और स्वतंत्र राजनीति का ऐलान

गौरतलब है कि साल 2013 बैच की आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त को राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद से इस्तीफा दिया था, जिसे हाल ही में सरकार ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद मंगलवार सुबह उन्होंने एक भावुक वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने बताया कि मिर्जापुर, बस्ती और संतकबीरनगर में बतौर डीएम काम करने के दौरान उन्होंने देखा कि योजनाओं की मंजूरी और बजट होने के बावजूद आम जनता के काम नहीं होते। उन्होंने कहा कि 80 साल से जिन दलों के झंडे के नीचे व्यवस्था नहीं बदली, उनके साथ जाकर हिसाब नहीं मांगा जा सकता। उन्होंने एक मोबाइल नंबर जारी कर शिक्षकों, छात्रों, किसानों और युवाओं से सीधे जुड़ने की अपील की और कहा कि वे यूपी की माटी छोड़कर कहीं नहीं जाएंगी। माना जा रहा है कि वे पूर्वांचल की किसी सीट से निर्दलीय या एक स्वतंत्र जनआंदोलन के जरिए 2027 के चुनावी दंगल में उतर सकती हैं।

पूर्वांचल की सियासत में क्यों गरमाया दोनों का आमना-सामना?

दिव्या मित्तल का प्रशासनिक करियर पूर्वांचल के जिलों में काफी चर्चित रहा है। मिर्जापुर के लहुरियादह गांव में आजादी के 75 साल बाद नल से जल पहुंचाने की मुहिम के बाद वे स्थानीय स्तर पर बेहद लोकप्रिय हो गई थीं। दूसरी ओर, ओम प्रकाश राजभर का मुख्य राजनीतिक आधार भी पूर्वांचल के ही गाजीपुर, मऊ, बलिया, वाराणसी और देवरिया क्षेत्र में केंद्रित है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि दिव्या मित्तल पूर्वांचल की जमीन से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करती हैं, तो वे उन पढ़े-लिखे और तटस्थ मतदाताओं को आकर्षित कर सकती हैं जो पारंपरिक जातिगत राजनीति से ऊब चुके हैं। यही कारण है कि ओपी राजभर ने उनके ऐलान के फौरन बाद आक्रामक रुख अपनाते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि चुनावी राजनीति में प्रशासनिक ग्लैमर काम नहीं आता।

विपक्ष पर भी बरसे राजभर, इंडिया ब्लॉक को बताया 'दगे कारतूस'

दिव्या मित्तल पर टिप्पणी के अलावा ओम प्रकाश राजभर ने विपक्षी गठबंधन 'इंडिया ब्लॉक' और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा। विपक्षी दलों के बीच सीट शेयरिंग को लेकर चल रही खींचतान पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि 'इंडिया' गठबंधन में शामिल सभी नेता दगे हुए कारतूस साबित हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस चाहे 150 सीटों पर समझौता करें या सभी 403 विधानसभा सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ लें, उत्तर प्रदेश में उनका कोई जनाधार नहीं बचने वाला और एनडीए की पूर्ण बहुमत से वापसी तय है।