लापरवाही की तो नपेंगे अफसर, जनसुनवाई पर CM योगी का कड़ा अल्टीमेटम; बोले- शिकायतों के निस्तारण में कोताही पर सीधे ऐक्शन होगा
उत्तर प्रदेश में आम जनता की समस्याओं के समाधान को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक मशीनरी को एक बार फिर बेहद सख्त और कड़ा संदेश दिया है। सरकारी दफ्तरों में फाइलों को लटकाने, जनता दर्शन और आईजीआरएस पोर्टल पर आने वाले प्रार्थना पत्रों के निस्तारण में हीला-हवाली करने वाले अफसरों पर शासन की नजरें टेढ़ी हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा है कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। यदि किसी भी स्तर पर अधिकारियों या कर्मचारियों द्वारा पीड़ितों की शिकायतों के समाधान में संवेदनहीनता, लापरवाही या केवल कागजी खानापूरी की गई, तो संबंधित जिम्मेदार सीधे दंडात्मक कार्रवाई के लिए तैयार रहें।
'घबराइए मत, समस्या का होगा समाधान': जनता दर्शन में सीएम का कड़ा रुख
गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर परिसर और लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास पर नियमित रूप से आयोजित होने वाले 'जनता दर्शन' में रोजाना सैकड़ों फरियादी अपनी व्यथा लेकर पहुंचते हैं। सीएम योगी ने हर एक फरियादी के पास खुद जाकर उनकी अर्जियां लीं और उनकी पीड़ा को बेहद संजीदगी से सुना। कई मामलों में पीड़ितों ने स्थानीय थाना, तहसील और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों द्वारा सुनवाई न किए जाने की शिकायत दर्ज कराई। इस पर मुख्यमंत्री ने मौके पर मौजूद नोडल अधिकारियों और संबंधित जिलाधिकारियों को तलब करते हुए सख्त निर्देश दिए कि जनता के प्रार्थना पत्रों पर तत्परता और पूरी निष्पक्षता से काम होना चाहिए। उन्होंने पीड़ितों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि 'घबराइए मत, नए उत्तर प्रदेश में किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा'।
कागजी खानापूरी नहीं चलेगी, वास्तविक समाधान और फीडबैक बनेगा आधार
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा आईजीआरएस (IGRS) और सीएम हेल्पलाइन (1076) पर दर्ज शिकायतों की लगातार समीक्षा की जा रही है। सीएम योगी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अफसर केवल पोर्टल पर 'डिस्पोज्ड' (निस्तारित) दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकते। अब शिकायतों के वास्तविक निस्तारण को ही माना जाएगा, जिसके लिए शिकायतकर्ता से मिलने वाले क्रॉस-वेरिफिकेशन और फीडबैक को मुख्य पैमाना बनाया गया है। यदि किसी फरियादी ने निस्तारण से असंतोष जाहिर किया या यह पाया गया कि बिना मौके पर गए ही झूठी रिपोर्ट लगा दी गई है, तो संबंधित जांच अधिकारी और विभागाध्यक्ष के खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि (कंडक्ट एंट्री) दर्ज होगी और विभागीय जांच बैठाई जाएगी।
जमीन कब्जे और दबंगई पर 'जीरो टॉलरेंस', सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश
जनता दर्शन में सबसे अधिक मामले जमीन विवाद, पैमाइश और अवैध कब्जों से जुड़े सामने आ रहे हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने राजस्व और पुलिस विभाग को संयुक्त रूप से अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सीएम ने कहा कि यदि किसी गरीब, कमजोर या असहाय व्यक्ति की जमीन पर किसी दबंग या भूमाफिया ने अवैध कब्जा करने की कोशिश की है, तो तत्काल जमीन को कब्जामुक्त कराया जाए और दोषियों के खिलाफ एंटी-भूमाफिया कानून के तहत कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शांति, सुरक्षा और कानून का राज ही प्रदेश की पहचान है और इसमें रुकावट डालने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
हर कार्यदिवस सुबह 10 से 12 बजे तक अनिवार्य जनसुनवाई का फरमान
शासन ने सभी जनपदों के जिलाधिकारियों (DM), पुलिस कप्तानों (SP/SSP), उपजिलाधिकारियों (SDM) और क्षेत्राधिकारियों (CO) को निर्देशित किया है कि वे हर कार्यदिवस में सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य रूप से अपने कार्यालय कक्ष में बैठकर जनसुनवाई करें। इस समयावधि में अधिकारियों को फील्ड विजिट या बैठकें टालने की हिदायत दी गई है, ताकि दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों को मायूस न लौटना पड़े। सीएम डैशबोर्ड पर जनसुनवाई की रैंकिंग को जिलाधिकारियों और पुलिस कप्तानों की वार्षिक गोपनीय प्रविष्टि (ACR) से जोड़ा जा चुका है। खराब रैंकिंग वाले 'सी' और 'डी' श्रेणी के जिलों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए उनके वेतन रोकने और तबादले जैसी सख्त कार्रवाइयां अमल में लाई जा रही हैं।