पीएम श्री स्कूलों और आंगनवाड़ी बालवाटिकाओं को मिलेंगे ब्लूटूथ स्पीकर, 61.75 लाख रुपये मंजूर
उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, बाल-सुलभ और डिजिटल माध्यमों से समृद्ध करने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट कक्षाओं से लैस करने के बाद अब सरकार का ध्यान प्री-प्राइमरी स्तर के नन्हे-मुन्ने बच्चों (नौनिहालों) की प्रारंभिक शिक्षा को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर केंद्रित हो गया है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने पीएम श्री (PM SHRI) विद्यालयों के परिसरों में संचालित को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों और बालवाटिकाओं के लिए अत्याधुनिक ब्लूटूथ स्पीकर उपलब्ध कराने की औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस नवाचार और ऑडियो-आधारित लर्निंग प्रोजेक्ट के लिए शासन की ओर से 61 लाख 75 हजार रुपये (61.75 लाख रुपये) की वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।
शिक्षाविदों और बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों में सीखने की क्षमता ध्वन्यात्मक और दृश्यात्मक गतिविधियों के माध्यम से कई गुना बढ़ जाती है। इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अपनाते हुए योगी सरकार परिषदीय स्कूलों में चल रही बालवाटिकाओं को 'प्ले-वे' और गतिविधि आधारित शिक्षा का केंद्र बना रही है। ब्लूटूथ स्पीकर की उपलब्धता से अब शिक्षक और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां बच्चों को सिर्फ पारंपरिक किताबों तक सीमित नहीं रखेंगी, बल्कि कविताओं, बालगीतों, शैक्षिक कहानियों और अक्षरों के सही उच्चारण का अभ्यास सीधे डिजिटल ऑडियो ट्रैक के जरिए कराएंगी। इस पहल से ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के सरकारी आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले गरीब और वंचित तबके के बच्चों को भी निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक शिक्षण माहौल मिल सकेगा।
पीएम श्री स्कूलों के को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्रों को सीधे मिलेगा लाभ
केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी पीएम श्री योजना के तहत उत्तर प्रदेश के चयनित विद्यालयों को मॉडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इन परिसरों में जो आंगनवाड़ी केंद्र पहले से संचालित हैं, उन्हें 'को-लोकेटेड आंगनवाड़ी केंद्र' या बालवाटिका के रूप में समेकित किया गया है। प्राथमिक शिक्षा में आने से पहले बच्चों की नींव को मजबूत करने के लिए यह व्यवस्था तैयार की गई है।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, 61.75 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से इन सभी को-लोकेटेड केंद्रों पर गुणवत्तापूर्ण, पोर्टेबल और रिचार्जेबल ब्लूटूथ स्पीकर खरीदे जाएंगे। इन स्पीकर्स को शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों के स्मार्टफोन, टैबलेट या स्कूल के स्मार्ट टीवी से आसानी से कनेक्ट किया जा सकेगा। इससे दूरदराज के उन केंद्रों में भी जहां बिजली की आवाजाही अनिश्चित रहती है, बैटरी बैकअप वाले ब्लूटूथ स्पीकर के जरिए शिक्षण कार्य बिना किसी बाधा के निरंतर जारी रखा जा सकेगा।
खेल-खेल में पढ़ाई: बालगीत, कविताएं और ऑडियो मॉड्यूल से आसान होगी समझ
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और निपुण भारत मिशन के तहत मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता (FLN) को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। बालवाटिका स्तर पर बच्चों में भाषा विकास और बुनियादी गणितीय अवधारणाओं को विकसित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले ही प्रेरणा पोर्टल और दीक्षा ऐप पर कई ऑडियो-विजुअल लर्निंग मॉड्यूल तैयार किए हैं। अब इन ब्लूटूथ स्पीकर्स के माध्यम से कक्षा में उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो में तुकबंदी वाले बालगीत, वर्णमाला का ध्वनि ज्ञान (Phonics), प्रेरणादायक बाल कहानियां और नैतिक मूल्यों पर आधारित नाटक सुनाए जाएंगे।
जब बच्चे सामूहिक रूप से गीतों और धुनों के साथ अक्षरों व शब्दों को दोहराते हैं, तो उनकी झिझक दूर होती है और स्कूल आने के प्रति उनका आकर्षण बढ़ता है। इससे सरकारी स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं में ड्रॉपआउट दर को कम करने और नियमित उपस्थिति बढ़ाने में बड़ी मदद मिलेगी। आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों को इसके संचालन और ऑडियो सामग्री के चयन के लिए विशेष प्रशिक्षण व डिजिटल कंटेंट सूची भी उपलब्ध कराई जा रही है।
पारदर्शी खरीद प्रक्रिया और वित्तीय नियंत्रण पर सख्त निर्देश
शासन ने इस 61.75 लाख रुपये के बजट आवंटन के साथ ही जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और वित्त एवं लेखाधिकारियों को खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। ब्लूटूथ स्पीकर की खरीद गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल के माध्यम से निर्धारित तकनीकी मानकों और वारंटी शर्तों के अनुरूप ही की जाएगी।
अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि किसी भी केंद्र पर घटिया उपकरण न पहुंचे और उपकरणों का भौतिक सत्यापन करने के बाद ही भुगतान स्वीकृत किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक और आंगनवाड़ी कार्यकत्री की संयुक्त जिम्मेदारी तय की गई है कि वे इन स्पीकर्स का दैनिक शिक्षण समय सारिणी में नियमित उपयोग सुनिश्चित करें और उनकी सुरक्षा व रखरखाव का पूरा ध्यान रखें।
बुनियादी शिक्षा का कायाकल्प: डिजिटल और स्मार्ट बन रहे यूपी के सरकारी स्कूल
उत्तर प्रदेश सरकार पिछले कुछ वर्षों से 'ऑपरेशन कायाकल्प' के जरिए बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की तस्वीर बदलने में जुटी हुई है। हाल ही में कैबिनेट द्वारा राज्य के 14 हजार से अधिक परिषदीय विद्यालयों को 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से स्मार्ट स्कूलों में बदलने की मंजूरी दी गई थी। इसके अतिरिक्त छात्रों के लिए निःशुल्क यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी की धनराशि सीधे अभिभावकों के खातों में डीबीटी के जरिए भेजी जा रही है।
अब बालवाटिकाओं और आंगनवाड़ी स्तर पर ब्लूटूथ स्पीकर जैसी तकनीकी सुविधाओं का विस्तार यह साबित करता है कि सरकार प्राथमिक शिक्षा के शुरुआती पायदान से ही बच्चों को तकनीकी रूप से सशक्त और दक्ष बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। जानकारों का मानना है कि यह छोटा लेकिन व्यावहारिक कदम प्रदेश के नौनिहालों के बौद्धिक विकास और सरकारी प्राथमिक शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने में एक मील का पत्थर साबित होगा।