टीम इंडिया की प्लेइंग-11 में जगह न मिलने के बाद अब इस टीम के लिए तहलका मचाएंगे गुरनूर बराड़: कल से मैदान पर उतरेगा 6 फीट 4 इंच का 'स्पीड स्टार'
बेंगलुरु/चंडीगढ़: भारतीय अंतरराष्ट्रीय टेस्ट स्क्वॉड के साथ ड्रेसिंग रूम साझा करने और टीम इंडिया की मुख्य बेंच स्ट्रेंथ में शामिल होने के बावजूद प्लेइंग-11 में डेब्यू का मौका न मिलने वाले पंजाब के घातक तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ (Gurnoor Brar) अब लाल गेंद क्रिकेट में अपनी तूफानी रफ्तार का जलवा बिखेरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और राष्ट्रीय चयन समिति ने युवा तेज गेंदबाज को केवल बेंच पर बैठाए रखने के बजाय घरेलू क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित लाल गेंद टूर्नामेंट 'दलीप ट्रॉफी' (Duleep Trophy) में मैच टाइम देने का रणनीतिक फैसला किया है। गुरनूर बराड़ कल से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) के मैदान पर शुरू हो रहे दलीप ट्रॉफी के हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल मुकाबले में नॉर्थ जोन (North Zone) की जर्सी में उतरेंगे। साउथ जोन के खिलाफ होने वाले इस चार दिवसीय नॉकआउट मुकाबले में बराड़ का मुख्य लक्ष्य अपनी तेज गति, अतिरिक्त उछाल और स्विंग से विपक्षी बल्लेबाजों की कड़ी परीक्षा लेना और राष्ट्रीय चयनकर्ताओं को यह संदेश देना होगा कि वे टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े मंच के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
टीम इंडिया में नहीं मिला डेब्यू का मौका: बेंच पर बैठने के बाद BCCI ने लिया बड़ा फैसला
श्रीलंका दौरे पर खेले गए टेस्ट मैचों के दौरान जब नियमित तेज गेंदबाजों मोहम्मद सिराज और प्रसिद्ध कृष्णा को वर्कलोड मैनेजमेंट के तहत आराम दिया गया था, तब चयनकर्ताओं ने पंजाब के लंबे कद के तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ और जम्मू-कश्मीर के आकिब नबी को भारतीय टेस्ट स्क्वॉड में बैकअप सीमर्स के रूप में शामिल किया था। हालांकि, उपमहाद्वीप की टर्निंग पिचों, अतिरिक्त स्पिनरों की जरूरत और टीम के रणनीतिक संतुलन के चलते गुरनूर को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण (Debut) का अवसर नहीं मिल सका।
भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर का यह स्पष्ट मानना है कि किसी भी इन-फॉर्म युवा तेज गेंदबाज के लिए लंबे समय तक केवल नेट्स में पसीना बहाना और मैचों के दौरान बेंच पर बैठना उसकी मैच फिटनेस को प्रभावित कर सकता है। इसी सोच के तहत बीसीसीआई के थिंक-टैंक ने योजना बनाई कि जब आकिब नबी को काउंटी क्रिकेट खेलने के लिए इंग्लैंड भेजा जा रहा है, तब गुरनूर बराड़ को तुरंत घरेलू सर्किट में दलीप ट्रॉफी के नॉकआउट मैचों में उतारा जाए। रेड-बॉल क्रिकेट में 15 से 20 ओवर के लंबे स्पैल डालने से गुरनूर की मैच फिटनेस और लय बरकरार रहेगी।
नॉर्थ जोन की जर्सी में मचेगा तहलका: साउथ जोन के खिलाफ सेमीफाइनल में संभालेंगे पेस अटैक
दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन का सामना बेहद मजबूत और संतुलित मानी जाने वाली साउथ जोन की टीम से होने जा रहा है। नॉर्थ जोन के टीम प्रबंधन ने गुरनूर बराड़ के स्क्वॉड से जुड़ते ही उन्हें सीधे प्लेइंग-11 में शामिल करने का फैसला किया है। गुरनूर को टीम में सुनील कुमार की जगह प्लेइंग-11 में शामिल किया जा रहा है।
साउथ जोन की टीम में तकनीकी रूप से सक्षम और प्रथम श्रेणी क्रिकेट के कई अनुभवी बल्लेबाज मौजूद हैं, जो स्पिन और पेस दोनों को बखूबी खेलते हैं। ऐसे में नॉर्थ जोन के लिए गुरनूर बराड़ का आक्रमण एक बड़ा एक्स-फैक्टर साबित होगा। बेंगलुरु की परिस्थितियां सुबह के वक्त तेज गेंदबाजों के अनुकूल रहती हैं, जहां हवा में अच्छी नमी और पिच पर बाउंस देखने को मिलता है। गुरनूर अपनी अतिरिक्त गति और लेंथ से शुरुआती ओवरों में साउथ जोन के शीर्ष क्रम को झकझोरने का प्रयास करेंगे।
6 फीट 4.5 इंच का लंबा कद और 140+ की रफ्तार: जानिए कौन हैं पंजाब के तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़
पंजाब के मुकेरियां से आने वाले 24 वर्षीय गुरनूर बराड़ को भारतीय घरेलू क्रिकेट के सबसे रोमांचक और दुर्लभ तेज गेंदबाजी प्रतिभाओं में गिना जाता है। गुरनूर की सबसे बड़ी शारीरिक ताकत उनकी 6 फीट 4.5 इंच की असाधारण लंबाई है, जो उन्हें किसी भी सामान्य पिच से अप्रत्याशित और असहज करने वाला उछाल (Steep Bounce) हासिल करने में मदद करती है।
गुरनूर लगातार 140 से 145 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी करने में सक्षम हैं। जब एक लंबा गेंदबाज अपनी पूरी ऊंचाई से गेंद को पिच पर जोर से पटकता है (Hit the Deck), तो बल्लेबाजों के लिए गेंद की ऊंचाई और लाइन का सही अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा गुरनूर के पास इन-स्विंगर और लेग-कटर का भी बेहतरीन मिश्रण है। आईपीएल में पंजाब किंग्स और गुजरात टाइटंस के नेट्स और मुकाबलों में शीर्ष अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजों को अपनी रफ्तार से छकाने के बाद गुरनूर ने रणजी ट्रॉफी में पंजाब के लिए कई मैच-जिताऊ स्पैल फेंककर चयनकर्ताओं की डायरी में अपना नाम दर्ज कराया था।
अर्शदीप सिंह और अंशुल कंबोज के साथ तिकड़ी: सेमीफाइनल में विरोधी बल्लेबाजों की खैर नहीं
दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में नॉर्थ जोन का तेज गेंदबाजी आक्रमण टूर्नामेंट का सबसे खतरनाक और बहुआयामी पेस अटैक बनकर उभरा है। नॉर्थ जोन की पेस बैटरी में गुरनूर बराड़ के साथ भारत के स्टार बाएं हाथ के तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और हरियाणा के युवा सीम सनसनी अंशुल कंबोज मौजूद हैं।
यह तिकड़ी साउथ जोन के बल्लेबाजों के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनने वाली है:
अर्शदीप सिंह: नई गेंद से दोनों तरफ स्विंग कराने की क्षमता और बाएं हाथ का अनूठा एंगल प्रदान करेंगे।
अंशुल कंबोज: अपनी सटीक लाइन-लेंथ, स्टंप टू स्टंप बॉलिंग और निरंतर दबाव बनाने के लिए जाने जाते हैं।
गुरनूर बराड़: अपनी प्रचंड गति, बैक ऑफ लेंथ बाउंसर्स और भारी गेंद से मिडिल ओवर्स में बल्लेबाजों को बैकफुट पर धकेलने का काम करेंगे।
तीनों गेंदबाजों की यह विविधता नॉर्थ जोन के कप्तान को किसी भी सत्र में विपक्षी टीम पर चौतरफा दबाव बनाने का विकल्प देती है।
रेड-बॉल क्रिकेट में लय तलाशने का मिशन: वर्कलोड मैनेजमेंट और मैच फिटनेस पर जोर
आधुनिक क्रिकेट में तेज गेंदबाजों के लिए सबसे बड़ी चुनौती विभिन्न प्रारूपों (टी-20, वनडे और टेस्ट) के बीच शरीर को ढालने की होती है। टी-20 में जहां केवल 4 ओवर का छोटा स्पैल फेंकना होता है, वहीं चार दिवसीय प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक दिन में 15 से 20 ओवर की गेंदबाजी करनी पड़ती है, जिसके लिए असाधारण शारीरिक सहनशक्ति (Endurance) और फिटनेस की जरूरत होती है।
गुरनूर बराड़ के लिए दलीप ट्रॉफी का यह सेमीफाइनल अपनी गेंदबाजी क्षमता को साबित करने का सबसे सही मंच है। भारतीय टीम के नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) के फिजियो और ट्रेनर्स लगातार गुरनूर के वर्कलोड और बॉलिंग लोड की निगरानी कर रहे हैं। कोच गौतम गंभीर चाहते हैं कि गुरनूर न केवल शुरुआती स्पैल में तेज गेंद डालें, बल्कि दिन के तीसरे और अंतिम सत्र में भी उसी 140+ की गति और तीव्रता के साथ गेंदबाजी करने की क्षमता विकसित करें।
न्यूजीलैंड और बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के लिए ऑडिशन: चयनकर्ताओं की पैनी नजर
भारतीय टेस्ट टीम के लिए आने वाले कुछ महीने बेहद व्यस्त और चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं। भारत को पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ उसकी उछाल भरी पिचों पर दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलनी है और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की महा-सीरीज बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी (BGT) में उतरना है।
विदेशी पिचों (सेना देशों) पर भारतीय टीम को हमेशा ऐसे लंबे और भारी तेज गेंदबाजों की जरूरत होती है जो कूकाबुरा गेंद से पिच पर सीम प्रहार कर सकें, ठीक वैसे ही जैसे ऑस्ट्रेलिया के लिए मिचेल स्टार्क व पैट कमिंस या दक्षिण अफ्रीका के लिए मार्को जानसन करते हैं। यदि गुरनूर बराड़ दलीप ट्रॉफी के सेमीफाइनल और फाइनल में साउथ जोन जैसी मजबूत टीम के खिलाफ 5 या 6 विकेट का बड़ा हॉल निकालते हैं, तो वे आगामी विदेशी टेस्ट दौरों के लिए मुख्य भारतीय दल में अपनी जगह लगभग पक्की कर सकते हैं। कल सुबह जब गुरनूर अपनी लंबी रन-अप के साथ गेंद हाथ में थामेंगे, तो मैदान पर मौजूद हर आंख इस युवा सितारे की रफ्तार और जुनून को देखने के लिए उत्सुक होगी।