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August 06 2026 05:25 pm

सूर्य ग्रहण: 100 साल बाद इस देश में दिन के उजाले में छा जाएगा घना अंधेरा, जानें भारत पर असर और नियम

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साल 2026 की सबसे बड़ी और अद्भुत खगोलीय घटना अब बस कुछ ही दिनों दूर है। आगामी 12 अगस्त 2026 को साल का सबसे बड़ा पूर्ण सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जिसे लेकर दुनिया भर के वैज्ञानिकों और खगोल प्रेमियों में भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह से सूर्य को ढक लेगा, जिसके परिणामस्वरूप पृथ्वी के कुछ चुनिंदा हिस्सों में दिन के उजाले में भी कुछ मिनटों के लिए पूरी तरह से घना अंधेरा छा जाएगा। शताब्दी में एक बार होने वाले इस दुर्लभ नजारे को देखने के लिए लाखों पर्यटक और शोधकर्ता उन देशों की ओर रुख कर रहे हैं जहां यह स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

किन देशों में दिखेगा पूर्ण सूर्य ग्रहण और क्या है इसका समय

खगोलविदों के अनुसार 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण और बड़े सूर्य ग्रहणों में गिने जाने वाले इस खगोलीय घटनाक्रम का मुख्य प्रभाव ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, रूस और पुर्तगाल के कई हिस्सों में पूरी तरह से देखा जा सकेगा। विशेष तौर पर स्पेन के कई प्रमुख शहरों में दिन के समय कुछ पलों के लिए रात जैसा नजारा देखने को मिलेगा और अंधेरा छा जाएगा। इसके अलावा यूरोप के बड़े हिस्से, उत्तरी अफ्रीका और उत्तर अटलांटिक क्षेत्र में आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) का नजारा दिखाई देगा। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों और खगोल विज्ञान के जानकारों की इस ऐतिहासिक घटना पर गहरी निगाहें टिकी हुई हैं।

क्या भारत में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? जानिए सूतक काल को लेकर नियम

भारतीय नागरिकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सूर्य ग्रहण भारत में भी नजर आएगा। उपलब्ध खगोलीय और वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का यह पूर्ण सूर्य ग्रहण भारत में बिल्कुल भी दिखाई नहीं देगा। सनातन धर्म और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल और ग्रहण के अन्य नियम केवल उन्हीं क्षेत्रों में प्रभावी होते हैं जहां ग्रहण दृश्यमान होता है। चूंकि यह भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए देश में सूतक काल मान्य नहीं होगा। यहां आम दिनों की तरह सभी धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ और मंदिरों के कपाट खुले रहेंगे तथा किसी भी प्रकार की पाबंदी लागू नहीं होगी।

वैज्ञानिक और धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है यह खगोलीय घटना?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूर्ण सूर्य ग्रहण का समय बेहद अनमोल माना जाता है, क्योंकि इस दौरान सूर्य के बाहरी आवरण यानी 'कोरोना' का अध्ययन करने का सुनहरा अवसर मिलता है। यही कारण है कि दुनिया भर की स्पेस एजेंसियां इस दौरान विशेष रिसर्च करती हैं। वहीं, दूसरी ओर पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान जप, ध्यान और इसके मोक्ष के बाद स्नान-दान का विशेष महत्व बताया गया है। हालांकि, चूंकि इस बार यह ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा, इसलिए देशवासियों को विशेष नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है और वे अपनी सामान्य जीवनचर्या का पालन कर सकते हैं।