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May 16 2026 06:07 pm

Adhik Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में भूलकर भी न करें ये 10 काम, रुक जाएगी तरक्की और बढ़ जाएगी कंगाली

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India News Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 एक विशेष वर्ष है क्योंकि इस साल अधिक मास लग रहा है। इसे 'पुरुषोत्तम मास' या 'मलमास' भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है और इस दौरान किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक मिलता है।

लेकिन, शास्त्रों में इस महीने के लिए कुछ कड़े नियम भी बताए गए हैं। अधिक मास में कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही है। यदि आप इन नियमों की अनदेखी करते हैं, तो आपको आर्थिक तंगी और मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।

अधिक मास में क्या न करें? (वर्जित कार्य)

मांगलिक कार्य: अधिक मास में विवाह, मुंडन, छेदन, यज्ञोपवीत (जनेऊ) और तिलक जैसे शुभ और मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित होते हैं। माना जाता है कि इस दौरान किए गए मांगलिक कार्यों से वैवाहिक सुख में कमी आती है।

नया व्यापार: यदि आप नया बिजनेस शुरू करने या किसी नई साझेदारी (Partnership) की योजना बना रहे हैं, तो इस महीने रुक जाएं। अधिक मास में शुरू किया गया कार्य आर्थिक हानि का कारण बन सकता है।

गृह प्रवेश और निर्माण: नया घर खरीदना, भूमि पूजन करना या गृह प्रवेश करना इस महीने शुभ नहीं माना जाता।

तामसिक भोजन का त्याग: पुरुषोत्तम मास में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इस महीने सात्विक आहार और ब्रह्मचर्य का पालन करना सर्वोत्तम है।

कीमती वस्तुओं की खरीदारी: सोने-चांदी के आभूषण, नई गाड़ी या महंगी इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीदारी से इस महीने बचना चाहिए।

झूठ और विवाद: इस महीने किसी का अपमान न करें, न ही झूठ बोलें। वाद-विवाद से दूर रहें, अन्यथा भगवान विष्णु की कृपा से वंचित रह सकते हैं।

क्या करना होता है शुभ?

जहाँ एक ओर कई कार्य वर्जित हैं, वहीं कुछ कार्यों को करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है:

दीपदान: शाम के समय तुलसी के पास या मंदिर में दीपदान करना बहुत फलदायी होता है।

श्रीमद्भागवत कथा: इस महीने भागवत पुराण या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से कष्टों से मुक्ति मिलती है।

दान-पुण्य: गरीबों को अनाज, वस्त्र और पीले रंग की वस्तुओं का दान करें।

मंत्र जाप: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का निरंतर जाप करना चाहिए।

क्यों आता है अधिक मास?

खगोलीय गणना के अनुसार, सौर वर्ष 365 दिन और 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है। इन दोनों के बीच हर साल लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इसी अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है, जिसे 'अधिक मास' कहते हैं।