मामले का राजनीतिकरण न करें ममता बनर्जी के SC में पेश होने के विरोध वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

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India News Live,Digital Desk :सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की व्यक्तिगत पेशी के विरोध में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि न्यायिक प्रक्रिया को राजनीतिक रंग देने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में आ गया है।

क्या थी याचिका और क्या मांग की गई थी
याचिका में ममता बनर्जी के सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने पर आपत्ति जताई गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनकी पेशी से प्रशासनिक कामकाIndia News Live,Digital Desk :ज प्रभावित हो सकता है। इसी आधार पर अदालत से राहत की मांग की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून के सामने सभी बराबर हैं और किसी संवैधानिक पद पर होने से न्यायिक प्रक्रिया से छूट नहीं मिलती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में राजनीति को घसीटना अनुचित है और इससे न्याय व्यवस्था की गरिमा पर असर पड़ता है।

‘न्यायिक प्रक्रिया से ऊपर कोई नहीं’
शीर्ष अदालत ने दो टूक कहा कि यदि किसी मामले में अदालत ने व्यक्तिगत उपस्थिति का निर्देश दिया है, तो उसका पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि बार-बार ऐसी याचिकाएं दायर कर प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।

राजनीतिक हलकों में बयानबाजी तेज
याचिका खारिज होने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। तृणमूल कांग्रेस ने इसे कानून और संविधान की जीत बताया है, जबकि विपक्षी दलों का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान सभी को करना चाहिए। इस फैसले को आगामी चुनावी माहौल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

कानूनी और सियासी मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक स्पष्ट संदेश देता है। अदालत ने यह जता दिया है कि न्यायिक आदेशों को राजनीतिक नजरिये से चुनौती देना आसान नहीं होगा और हर व्यक्ति को कानूनी दायरे में रहकर जवाब देना होगा।