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July 05 2026 03:21 am

8th Pay Commission: क्या सच में 69,000 रुपये हो जाएगी सरकारी कर्मचारियों की बेसिक पे? समझें मांग और पूरा फॉर्मूला

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देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर टिकी हुई हैं। कर्मचारी संगठनों की ओर से आयोग के सामने कई बड़ी मांगें रखी गई हैं, जिनमें सबसे प्रमुख न्यूनतम सैलरी में बंपर बढ़ोतरी है। वर्तमान में सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक पे (न्यूनतम मूल वेतन) 18,000 रुपये है। लेकिन अगर कर्मचारी संगठनों की नई मांगों और फॉर्मूले को मान लिया जाता है, तो यह बेसिक पे सीधे 69,000 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। आइए विस्तार से समझते हैं कि इस भारी बढ़ोतरी के पीछे क्या गणित और फैक्टर्स काम कर रहे हैं।

3.833 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की उठी पुरजोर मांग

केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी बढ़ाने में सबसे अहम भूमिका 'फिटमेंट फैक्टर' (Fitment Factor) की होती है। इस समय विभिन्न कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों की तरफ से आयोग के सामने फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.833 करने की जोरदार पैरवी की जा रही है। नेशनल काउंसिल-ज्वाइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) के स्टाफ साइड ने न्यूनतम बेसिक पे के मौजूदा कैलकुलेशन पर सवाल उठाए हैं। गणित के हिसाब से देखें तो यदि सरकार इस 3.833 के फिटमेंट फैक्टर वाले फॉर्मूले को मंजूरी दे देती है, तो कर्मचारियों का न्यूनतम बेसिक पे ₹$18,000 \times 3.833$ के फॉर्मूले से बढ़कर सीधे 69,000 रुपये के स्तर पर पहुंच जाएगा।

'फैमिली यूनिट' के फॉर्मूले में बड़े बदलाव की तैयारी

सैलरी तय करने के लिए एक खास 'फैमिली यूनिट' फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जाता है, जिसे बदलने की मांग इस बार की जा रही है। 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) के दौरान जो फॉर्मूला था, उसके तहत:

स्वयं कर्मचारी को: 1 यूनिट माना गया था।

पत्नी/पति को: 0.8 यूनिट का दर्जा दिया गया था।

दो बच्चों को: 0.8 और 0.8 यूनिट माना गया था।

इस पुराने फॉर्मूले के तहत कुल 3.6 यूनिट बनती थीं। लेकिन 8वें वेतन आयोग के सामने संगठनों ने मांग रखी है कि आश्रित माता-पिता या सास-ससुर को भी इस कैलकुलेशन में शामिल किया जाए और उनके लिए अतिरिक्त 0.8 यूनिट बढ़ाई जाए। अगर आयोग इस मांग को स्वीकार कर लेता है, तो कुल फैमिली यूनिट बढ़कर 5.2 हो जाएगी, जिससे बेसिक पे में करीब 9,000 रुपये का सीधा इजाफा वैसे ही हो जाएगा।

इन अहम भत्तों और खर्चों को भी शामिल करने का है प्लान

कर्मचारी संगठनों ने केवल सैलरी ही नहीं, बल्कि दैनिक जीवन के वास्तविक खर्चों को ध्यान में रखते हुए आयोग के सामने एक विस्तृत चार्ट पेश किया है:

कैलोरी इनटेक: भोजन और कपड़ों के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की सलाह के अनुसार रोजाना 3490 कैलोरी के खर्च को आधार बनाने की मांग की गई है।

मकान का खर्च: घर के रखरखाव से जुड़े खर्चों के अनुमान को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

यूटिलिटी बिल: फ्यूल, इलेक्ट्रिसिटी और पानी के चार्ज को कुल खर्च का 20 प्रतिशत माना जाए।

स्किल डेवलपमेंट: बच्चों और स्वयं की शिक्षा व स्किल डेवलपमेंट के खर्च को 25 प्रतिशत आंका जाए।

अन्य फुटकर खर्च: अन्य विविध आवश्यकताओं के लिए 5 प्रतिशत का प्रावधान हो।

कर्मचारी संगठनों का साफ कहना है कि ये सभी मांगें और आंकड़े आज के समय के वास्तविक खर्चों को दर्शाते हैं। अब गेंद पूरी तरह से 8वें वेतन आयोग और सरकार के पाले में है कि वे इनमें से कितनी मांगों पर अपनी मुहर लगाते हैं और कर्मचारियों की जेब कितनी गरम होती है।