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July 05 2026 03:01 am

Gold Price Today: सोने में 5058 रुपये और चांदी में 8433 रुपये की रिकॉर्ड उछाल, जानें अब कहां तक जाएगा भाव

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सर्राफा बाजार में निवेश करने वालों और आम ग्राहकों के लिए यह हफ्ता भारी उथल-पुथल वाला रहा है। शादियों और त्योहारों के सीजन से पहले सोने और चांदी की कीमतों ने आसमान छूना शुरू कर दिया है। इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस कारोबारी हफ्ते में सोने और चांदी दोनों की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है। जहां सोने के भाव में प्रति 10 ग्राम 5,000 रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है, वहीं चांदी भी प्रति किलोग्राम 8,000 रुपये से अधिक महंगी हो गई है।

इस हफ्ते सोने-चांदी ने बनाए नए रिकॉर्ड

बुलियन मार्केट के आंकड़ों के अनुसार, इस हफ्ते 24 कैरेट शुद्ध सोने का रेट 1,46,344 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गया। पूरे हफ्ते के दौरान सोने की कीमतों में कुल 5,058 रुपये की भारी तेजी देखने को मिली है। वहीं चांदी की बात करें, तो शुक्रवार को बाजार बंद होने तक इसका रेट 2,33,858 रुपये प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर जा पहुंचा। चांदी में इस हफ्ते कुल 8,433 रुपये प्रति किलो का बंपर उछाल आया है। तुलना के लिए बता दें कि इसी हफ्ते सोमवार को सोने का दाम 1,41,286 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का दाम 2,25,425 रुपये प्रति किलोग्राम था।

14 कैरेट से लेकर 23 कैरेट गोल्ड का ताजा भाव

इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी आधिकारिक कीमतों के मुताबिक, अलग-अलग कैरेट के सोने के दाम कुछ इस प्रकार हैं:

23 कैरेट गोल्ड: 1,45,758 रुपये प्रति 10 ग्राम

22 कैरेट गोल्ड (ज्वेलरी के लिए): 1,34,051 रुपये प्रति 10 ग्राम

18 कैरेट गोल्ड: 1,09,758 रुपये प्रति 10 ग्राम

14 कैरेट गोल्ड: 85,611 रुपये प्रति 10 ग्राम

5000 डॉलर तक जा सकता है सोना, क्या कहते हैं ग्लोबल एक्सपर्ट्स?

वैश्विक संस्था वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 की दूसरी छमाही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का रेट 4,500 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक स्थितियां मजबूत और स्पष्ट बनी रहीं, तो सोना 5,000 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक आंकड़े को भी पार कर सकता है।

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सोने की इस तेजी में तीन बड़े फैक्टर्स सबसे अहम भूमिका निभाएंगे। पहला—वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और घमासान में कमी आना, दूसरा—केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों को बढ़ाए जाने की आशंकाओं में बदलाव होना, और तीसरा—बाजार में लॉन्ग टर्म इनवेस्टर्स (दीर्घकालिक निवेशकों) की भागीदारी का बढ़ना। इसके अलावा, साल 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार 2.9 प्रतिशत और अमेरिका की ग्रोथ रेट 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिस पर सर्राफा बाजार की पैनी नजर बनी हुई है।

भारत में इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने का क्या होगा असर?

विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने के निवेशकों को दो प्रमुख कारकों पर कड़ी नजर रखनी होगी—पहला विभिन्न देशों के सेंट्रल बैंक और दूसरा भारतीय बाजार। भारत दुनिया में सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है, जहां सालाना करीब 800 टन सोने की नेट डिमांड रहती है। बता दें कि अप्रैल के महीने में केंद्र सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी (आयात शुल्क) को 6 प्रतिशत से बढ़ाकर सीधे 15 प्रतिशत कर दिया था। काउंसिल का अनुमान है कि इस ड्यूटी हाइक की वजह से देश में गोल्ड बार और कॉइन की डिमांड में 50 से 60 टन की गिरावट आ सकती है, जिससे सालाना मांग में 10 प्रतिशत की कमी देखी जा सकती है।

काउंसिल का यह भी कहना है कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों में बढ़ोतरी सोने के बाजार के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। हालांकि, यदि मौजूदा ऊंचे रेट्स की तुलना में सोने के दाम में 10% से 15% का कोई करेक्शन (गिरावट) आता है, तो भारतीय बाजार में अचानक खरीदारी की भारी मांग देखने को मिल सकती है।