2021 की हार का बदला लेंगी ममता या शुभेंदु बचाएंगे अपना किला? जानें इस हाई-प्रोफाइल सीट की इनसाइड स्टोरी

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India News Live,Digital Desk : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में नंदीग्राम एक बार फिर सत्ता के संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। 2021 के चुनावों में इसी मिट्टी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अपनी राजनीतिक यात्रा की सबसे कड़वी हार का स्वाद चखाया था, जब भाजपा के शुभेंदु अधिकारी ने उन्हें महज 1,956 वोटों के अंतर से हराया था। आज, 2026 की चुनावी दहलीज पर खड़े बंगाल में सवाल वही है—क्या दीदी अपनी उस हार का बदला ले पाएंगी या शुभेंदु अपनी 'भूमिपुत्र' की छवि को बरकरार रखेंगे?

2021 से 2026 तक: कितना बदला नंदीग्राम?

2021 की जीत के बाद से नंदीग्राम में भाजपा ने अपना आधार काफी मजबूत किया है। वर्तमान में 17 में से 11 ग्राम पंचायतों पर भाजपा का कब्जा है। 2024 के लोकसभा चुनावों में भी भाजपा ने यहां 8,000 से अधिक वोटों की बढ़त हासिल की थी। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा यहां संगठनात्मक रूप से काफी प्रभावशाली स्थिति में है।

टीएमसी का दांव: 'शुभेंदु के पूर्व करीबी' मैदान में

ममता बनर्जी ने इस बार नंदीग्राम में बेहद रणनीतिक कदम उठाया है। टीएमसी ने शुभेंदु अधिकारी के पूर्व करीबी और भाजपा के ही पूर्व नेता पवित्र कर को अपना उम्मीदवार बनाया है। पवित्र कर ने नामांकन से कुछ ही समय पहले टीएमसी का दामन थामा था।

स्थानीय बनाम स्थानीय: पवित्र कर को उतारकर टीएमसी ने मुकाबले को 'भूमिपुत्र बनाम भूमिपुत्र' बनाने की कोशिश की है।

अभिषेक बनर्जी की निगरानी: टीएमसी के महासचिव अभिषेक बनर्जी खुद नंदीग्राम की कमान संभाल रहे हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को संदेश दिया है कि इस सीट की जीत ममता बनर्जी के लिए सम्मान की बात है।

विवादों के घेरे में चुनाव

नंदीग्राम का चुनाव केवल रैलियों तक सीमित नहीं है, बल्कि कानूनी और तकनीकी विवादों में भी उलझा है:

SIR (मतदाता सूची से नाम हटाना): टीएमसी ने आरोप लगाया है कि नंदीग्राम में तकनीकी सॉफ्टवेयर (SIR) का दुरुपयोग कर हजारों मतदाताओं, विशेष रूप से एक विशेष समुदाय के नाम सूची से हटा दिए गए हैं।

शुभेंदु की दो सीटों पर दावेदारी: शुभेंदु अधिकारी न केवल नंदीग्राम से बल्कि ममता बनर्जी के गढ़ भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया है कि वह दोनों सीटों पर जीत दर्ज करेंगे।

एफआईआर का खेल: टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर पर चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद मारपीट और लूट के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है, जिसे टीएमसी ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

क्यों अहम है नंदीग्राम?

नंदीग्राम वही भूमि है जहां 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने 34 साल के वामपंथी शासन की चूलें हिला दी थीं और ममता बनर्जी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाया था। आज यह सीट विकास, पहचान और 'दीदी बनाम दादा' की प्रतिष्ठा का प्रतीक बन चुकी है। भाजपा जहां 'जंगलराज' और भ्रष्टाचार को मुद्दा बना रही है, वहीं टीएमसी 'बंगाल की बेटी' और कल्याणकारी योजनाओं के भरोसे अपनी वापसी की उम्मीद कर रही है।

मतदान का समय

नंदीग्राम में 23 अप्रैल 2026 को पहले चरण में मतदान होना है। पूरे बंगाल की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि 4 मई को जब नतीजे आएंगे, तो नंदीग्राम का 'खेला' किसके पक्ष में होगा।