क्या केंद्रीय कर्मचारियों को मिलेगी मनचाही पेंशन? मोदी सरकार पेंशन स्ट्रक्चर में स्वतंत्रता देने की कर रही तैयारी

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India News Live,Digital Desk : केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए पेंशन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। खबरों के अनुसार, सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसमें केंद्रीय कर्मचारियों को अपनी पेंशन संरचना चुनने की अधिक स्वतंत्रता मिल सकती है। कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इस दिशा में अगले कुछ महीनों में ठोस प्रगति देखने को मिल सकती है।

पेंशन व्यवस्था में बदलाव की क्यों है जरूरत?

वर्तमान में, 1 जनवरी 2004 के बाद नियुक्त हुए अधिकांश कर्मचारी नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के दायरे में आते हैं, जो पूरी तरह से बाजार के रिटर्न पर आधारित है। वहीं, कर्मचारी संगठन पुरानी पेंशन योजना (OPS) जैसी 'निश्चित पेंशन की गारंटी' की मांग लंबे समय से कर रहे हैं। हाल ही में सरकार ने 'यूनिफाइड पेंशन स्कीम' (UPS) भी शुरू की है, जो NPS और OPS का एक मिला-जुला स्वरूप है।

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि पेंशन का बाजार पर निर्भर होना कर्मचारियों के लिए भविष्य की अनिश्चितता पैदा करता है। इसलिए, वे एक ऐसी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं जहाँ कर्मचारियों के पास विकल्प हों और रिटायरमेंट के बाद उन्हें वित्तीय सुरक्षा व स्पष्टता मिल सके।

क्या हो सकते हैं संभावित विकल्प?

विकल्प चुनने की स्वतंत्रता: चर्चा है कि कर्मचारियों को अलग-अलग पेंशन स्कीम के बीच चयन करने का मौका दिया जा सकता है।

निश्चितता की मांग: कर्मचारी OPS की तरह महंगाई भत्ते (DA) से जुड़ी गारंटीड पेंशन की मांग कर रहे हैं।

स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS): VRS से संबंधित मौजूदा नियमों में भी संशोधन की मांग कर्मचारी यूनियनों द्वारा की गई है।

8वें वेतन आयोग का इंतजार

इन तमाम मांगों को 'ऑल इंडिया NPS एम्प्लॉइज फेडरेशन' (AINPSEF) ने आठवें वेतन आयोग के समक्ष भी रखा है। माना जा रहा है कि वेतन आयोग की सिफारिशें साल 2027 की पहली छमाही तक सरकार को सौंपी जा सकती हैं। वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों और संबंधित संगठनों से सुझाव मांगे हैं और उनके साथ बैठकों का दौर जारी है।

हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन कर्मचारी संगठनों का मानना है कि आने वाले 2 से 4 महीनों में इस पर कोई बड़ा फैसला आ सकता है।