शनि जब बन जाए 'मारकेश' तो मच जाती है तबाही, जानें लघु पाराशरी के अनुसार इसके प्रभाव और उपाय
India News Live, Digital Desk: ज्योतिष शास्त्र में शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना गया है। लेकिन जब कुंडली में शनि 'मारकेश' की स्थिति में आ जाते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में कष्टों का अंबार लग जाता है। 'लघु पाराशरी' (Laghu Parashari) जैसे महत्वपूर्ण ज्योतिषीय ग्रंथ में शनि की इस अवस्था का विस्तार से वर्णन किया गया है। मारकेश शनि का अर्थ केवल मृत्यु नहीं, बल्कि मृत्यु तुल्य कष्ट, भारी धन हानि और मानसिक अशांति भी होता है। आइए जानते हैं कि कुंडली में शनि कब मारकेश बनते हैं और इसके प्रभाव से कैसे बचा जा सकता है।
क्या होता है 'मारकेश' और शनि की भूमिका?
कुंडली के दूसरे (द्वितीय) और सातवें (सप्तम) भाव को 'मारक स्थान' कहा जाता है। इन भावों के स्वामी को 'मारकेश' कहते हैं। लघु पाराशरी के सिद्धांतों के अनुसार, यदि शनि इन मारक भावों का स्वामी होकर या इनके स्वामियों के साथ संबंध बनाकर अशुभ स्थिति में बैठ जाए, तो वह 'मारकेश' की भूमिका निभाने लगता है। शनि की अपनी प्रकृति क्रूर और मंद है, इसलिए जब वह मारक बनता है, तो व्यक्ति को लंबे समय तक चलने वाले कष्ट देता है।
लघु पाराशरी के अनुसार मारकेश शनि के लक्षण
जब किसी जातक की कुंडली में शनि मारकेश बनकर सक्रिय होता है, तो उसे निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:
शारीरिक कष्ट: पुरानी बीमारियां उभरने लगती हैं या किसी गंभीर दुर्घटना का भय बना रहता है।
मानसिक तनाव: व्यक्ति बिना कारण चिंता और अवसाद (Depression) में रहने लगता है।
आर्थिक संकट: व्यापार में अचानक बड़ा घाटा होना या संचित धन का तेजी से खत्म होना।
पारिवारिक कलह: रिश्तों में कड़वाहट और अलगाव की स्थिति पैदा होना।
किन राशियों पर होता है सबसे ज्यादा असर?
लघु पाराशरी के अनुसार, लग्न कुंडली के आधार पर शनि के मारक होने की तीव्रता बदल जाती है। विशेष रूप से मेष, कर्क और सिंह लग्न वालों के लिए शनि की स्थिति पर बारीकी से गौर करना जरूरी होता है। यदि शनि इन लग्नों में अशुभ भावों का स्वामी होकर मारक स्थानों से संबंध बनाए, तो इसकी महादशा या अंतर्दशा अत्यंत कष्टकारी साबित हो सकती है।
मारकेश शनि के दुष्प्रभाव से बचने के अचूक उपाय
ज्योतिष शास्त्र में जहां समस्याएं हैं, वहीं उनके समाधान भी बताए गए हैं। शनि को शांत करने के लिए ये उपाय कारगर साबित हो सकते हैं:
महामृत्युंजय मंत्र का जाप: मारकेश की दशा में भगवान शिव की आराधना सबसे श्रेष्ठ है। 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे...' मंत्र का नियमित पाठ करें।
हनुमान चालीसा और सुंदरकांड: शनि देव हनुमान जी के भक्तों को कष्ट नहीं देते। मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ करें।
शनि दान: शनिवार के दिन छाया दान (कांसे के कटोरे में तेल भरकर अपना चेहरा देखकर दान करना), काला तिल और काले कपड़े का दान करें।
शनि देव का मंत्र: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें।
पीपल के नीचे दीपक: शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।