June 23 2026 11:34 pm

लखनऊ अग्निकांड: 'पापा बचा लो, यहां आग लग गई है...' पिता के कानों में गूंज रही बेटे की अंतिम पुकार

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके की एक व्यावसायिक इमारत में सोमवार को भीषण आग (Lucknow Fire Tragedy) लग गई। इस अग्निकांड ने कई हंसते-खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया। हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मरने वालों में अधिकांश युवा और छात्र थे, जो करियर बनाने की उम्मीद लिए इस बहुमंजिला इमारत में चल रहे संस्थानों में आए थे।

पोस्टमार्टम हाउस के बाहर का मंजर सोमवार को बेहद रूह कंपा देने वाला था, जहां बिलखते परिजन अपनों से हुई आखिरी बातचीत को याद कर फफक पड़ रहे थे।

'पापा बचा लो...' और कट गया सुखमनी का फोन

आलमबाग बस स्टैंड के पास रहने वाले सरकारी कर्मचारी प्रभुजोत सिंह के 24 वर्षीय बेटे सुखमनी पिछले चार साल से अलीगंज की इसी इमारत में स्थित एक संस्थान में कार्यरत थे। सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे जब इमारत में आग की लपटें और जहरीला धुआं फैलने लगा, तो सुखमनी ने बदहवास हालत में अपने पिता को फोन मिलाया।

कांपती आवाज में सुखमनी ने बस इतना ही कहा— "पापा बचा लो, यहां आग लग गई है..." और चीख-पुकार के बीच फोन कट गया। बेटे की गुहार सुनकर पिता दफ्तर से बदहवास हालत में अलीगंज की तरफ भागे, लेकिन जब तक वे पहुंचते, सब कुछ जलकर राख हो चुका था। मां किरण कौर और बड़े भाई सायबान सिंह का रो-रोकर बुरा हाल है।

कई घरों के इकलौते चिराग बुझे

इस दर्दनाक हादसे में कई अन्य परिवारों पर भी दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है:

जम्मू से रवाना हुए फौजी पिता: जानकीपुरम निवासी केशव दत्त भारतीय सेना (IB) में तैनात हैं और वर्तमान में जम्मू में पोस्टेड हैं। उनका बेटा इसी इंस्टीट्यूट में कोर्स कर रहा था। सुबह वह अपनी मां से यह कहकर निकला था कि "जल्दी घर लौट आऊंगा"। बेटे की मौत की खबर सुनते ही फौजी पिता जम्मू से लखनऊ के लिए रवाना हो गए हैं।

जिद कर चुना था करियर: सीतापुर के बिसवां निवासी आलोक श्रीवास्तव का बेटा आदित्य अलीगंज में अपने रिश्तेदार के घर रहकर यह कोर्स कर रहा था। उसने अपनी मां कल्पना से जिद करके इस करियर को चुना था। पोस्टमार्टम हाउस में भाई धैर्य, बहन निष्ठा और आस्था का विलाप देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं।

बेसुध हुए पिता: बाराबंकी (फतेहपुर) के हाजी इमरान का इकलौता बेटा शाहजान (22) गुडंबा में रहकर पढ़ाई कर रहा था। पिता फैजुल्लागंज में नया मकान बनवा रहे थे ताकि बेटा वहां आराम से रह सके, लेकिन मकान बनने से पहले ही बेटे की सांसें थम गईं। खबर सुनते ही पिता बेसुध होकर गिर पड़े।

आंखों देखी: "मुंह पर रुमाल बांधा और रेलिंग के सहारे नीचे उतरे"

इसी इमारत में एनिमेशन से जुड़ी कंपनी ‘हेडहॉपर्स’ (Headhoppers) संचालित होती है। वहां काम करने वाले भुवन श्रीवास्तव ने मौत के मुंह से बाहर निकलने की रूहानी दास्तां बयां की।

उन्होंने बताया, "कमरे के बाहर इतना घना और काला धुआं था कि कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। सांस लेना दूभर हो गया था। हमने तुरंत मुंह पर रुमाल बांधा और सीढ़ियों की तरफ बढ़े। चूंकि छत का रास्ता बंद था, इसलिए हम और हमारे कुछ साथी रेलिंग पकड़कर धीरे-धीरे चीख-पुकार के बीच नीचे की ओर उतरे। आग नीचे की मंजिल में लगी थी, जिसके कारण धुआं बहुत तेजी से ऊपर की तरफ भाग रहा था।"

भुवन ने बताया कि आग लगने के बाद करीब आधे घंटे तक उन्हें फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान उनके साथी आसिफ, हर्षित और सचिन तो किसी तरह सुरक्षित बाहर आ गए, लेकिन कई अन्य साथियों से संपर्क टूट गया, जो इस हादसे का शिकार हो गए। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि इमारत में फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम थे या नहीं।