होर्मुज खुलते ही बदला पासा: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के संकेत, जानें भारत में कब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल
नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क): वैश्विक तेल बाजार (Global Oil Market) से भारत सहित पूरी दुनिया के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। कुछ समय पहले तक जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के बंद होने और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण कच्चे तेल (Crude Oil) के $100 से $200 प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी, वहां अब तस्वीरें पूरी तरह बदल चुकी हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा व्यापार के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। इसके खुलते ही वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई तेजी से बहाल हो रही है। अब स्थिति यह आ गई है कि अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां आने वाले समय में दुनिया में 'ऑयल सरप्लस' (मांग से ज्यादा तेल की उपलब्धता) का अनुमान लगा रही हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट आने के आसार हैं।
IEA की भविष्यवाणी: 2027 तक $60 के नीचे आ सकता है कच्चा तेल
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA - International Energy Agency) की ताजा रिपोर्ट ने तेल उत्पादक देशों की चिंता बढ़ा दी है, जबकि भारत जैसे आयातक देशों के चेहरे पर खुशी ला दी है:
मांग बनाम सप्लाई: आईईए का अनुमान है कि 2027 तक वैश्विक तेल उत्पादन (Production) मांग की तुलना में कहीं अधिक हो जाएगा। अगले दो वर्षों में दुनिया में तेल की सप्लाई 80 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ सकती है, जबकि इसके मुकाबले वैश्विक मांग केवल 20 लाख बैरल प्रतिदिन बढ़ने की उम्मीद है।
कीमतों पर असर: प्रसिद्ध एनर्जी एक्सपर्ट क्रिस्टोफ रुहल के अनुसार, यदि बाजार में अतिरिक्त (सरप्लस) तेल की यही स्थिति बनी रही, तो साल 2027 तक कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे गिर सकती हैं।
चीन की चालाकी और ओपेक (OPEC) का डर
इस पूरी मंदी में दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देश चीन की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण रही है। चीन ने पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार से कच्चे तेल की रणनीतिक खरीद को काफी कम कर दिया है। चीन की इस सुस्ती ने वैश्विक मांग को कमजोर किया, जिसके चलते युद्ध जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद ब्रेंट क्रूड $120 के पार नहीं जा सका।
हालांकि, तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC ने इस मंदी के अनुमानों पर असहमति जताई है। ओपेक का मानना है कि 'सप्लाई सरप्लस' के ये आंकड़े जल्दबाजी में तैयार किए गए हैं। भू-राजनीतिक जोखिम (Geopolitical Risks) अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं और बाजार में अनिश्चितता अब भी बरकरार है।
भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल पर कब मिलेगी राहत?
भारत अपनी जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में $60 के स्तर पर क्रूड का आना भारत की अर्थव्यवस्था, राजकोषीय घाटे और कम महंगाई के लिए वरदान साबित होगा।
राहत में क्यों लगेगा समय?
ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ अमित भंडारी के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम गिरने के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत राहत नहीं मिलेगी। भारतीय तेल विपणन कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के पास अभी भी पहले का खरीदा हुआ महंगा कच्चा तेल (ओल्ड स्टॉक) मौजूद है। इसके अलावा कंपनियां अपने पिछले घाटों की भरपाई भी कर रही हैं। ऐसे में भारतीय बाजारों में पेट्रोल-डीजल के दाम हकीकत में कम होने में 5 से 6 महीने तक का समय लग सकता है।