Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत, वैवाहिक जीवन में प्रेम बढ़ाने के लिए अपनाएं ये 5 अचूक उपाय
India News Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए 'वट सावित्री व्रत' (Vat Savitri Vrat) का विशेष महत्व है। यह व्रत न केवल पति की लंबी आयु के लिए रखा जाता है, बल्कि सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के लिए भी किया जाता है। साल 2026 में वट सावित्री व्रत की तिथि और इस दिन किए जाने वाले विशेष ज्योतिषीय उपायों को लेकर महिलाओं में काफी उत्साह है। यदि आपके वैवाहिक जीवन में तनाव है या प्रेम की कमी महसूस हो रही है, तो इस बार का वट सावित्री व्रत आपके लिए वरदान साबित हो सकता है।
वट सावित्री व्रत 2026 की सही तिथि और मुहूर्त
धार्मिक कैलेंडर के अनुसार, वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
अमावस्या तिथि की शुरुआत: 15 मई 2026 को शाम से।
व्रत की तिथि: मुख्य रूप से 16 मई 2026 को यह व्रत रखा जाएगा।
महत्व: इसी दिन सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। वट वृक्ष (बरगद) में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है, इसलिए इस दिन इसकी पूजा का विधान है।
रिश्तों में मिठास घोलने के 5 ज्योतिषीय उपाय
वट सावित्री के दिन केवल पूजा ही नहीं, बल्कि कुछ खास उपाय करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ता है:
कच्चे सूत का उपाय: वट वृक्ष की परिक्रमा करते समय 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करते हुए 7, 11 या 108 बार कच्चा सूत लपेटें। ऐसा करने से आपसी विश्वास और जुड़ाव बढ़ता है।
श्रृंगार का दान: इस दिन सुहागिन महिलाओं को सुहाग की सामग्री जैसे- लाल चूड़ियां, सिंदूर और बिंदी का दान करना चाहिए। इससे कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है, जो प्रेम का कारक है।
बरगद के पत्तों का टोटका: बरगद के एक साफ पत्ते पर सिंदूर से अपने पति का नाम लिखें और उसे घर के मंदिर में रख दें। व्रत के अगले दिन इसे बहते जल में प्रवाहित कर दें। माना जाता है कि इससे जीवनसाथी का झुकाव आपकी ओर बढ़ता है।
भीगे हुए चने का प्रसाद: सावित्री ने यमराज को चने अर्पित किए थे। इस दिन चने और फल का दान करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और कलेश दूर होता है।
गठजोड़ की पूजा: पूजा के दौरान अपने और पति के कपड़ों का कोना आपस में बांधकर (गठजोड़) पूजा करें। यह उपाय दाम्पत्य जीवन में अटूट बंधन का प्रतीक माना जाता है।
सावित्री-सत्यवान की कथा से लें प्रेरणा
यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि सावित्री के संकल्प और बुद्धिमत्ता का प्रतीक है। कथा के अनुसार, सावित्री के अटूट प्रेम के आगे यमराज को भी झुकना पड़ा था। आधुनिक संदर्भ में यह त्योहार पति-पत्नी के बीच अटूट समर्पण और सम्मान की याद दिलाता है।