जब कंगना रनौत ने खुद शीर ब्रालेट पहनकर बंद की थी ट्रोल्स की बोलती; कृति सेनन के राखी ऐड विवाद के बीच वायरल हुआ 'क्वीन'
बॉलीवुड अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत अपने बेबाक बयानों, तीखे तेवरों और सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर बिना किसी लाग-लपेट के अपनी राय रखने के लिए हमेशा सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में अभिनेत्री कृति सेनन के एक फेस्टिव ज्वेलरी विज्ञापन में ब्रालेट और फ्यूजन लुक पर कंगना रनौत द्वारा उठाए गए सवालों के बाद सोशल मीडिया पर एक नई सांस्कृतिक और फैशन बहस छिड़ गई थी। कंगना ने विज्ञापन के विजुअल्स पर टिप्पणी करते हुए पारंपरिक त्योहारों की शुचिता और गरिमा बनाए रखने की बात कही थी। हालांकि, इस विवाद के गहराते ही सोशल मीडिया यूजर्स और सिने प्रेमियों ने कंगना रनौत का ही एक पुराना किस्सा और उनकी थ्रोबैक तस्वीरें निकाल ली हैं, जब कंगना ने खुद एक बेहद बोल्ड शीर ब्रालेट और व्हाइट ट्राउजर पहनकर इंटरनेट पर तहलका मचा दिया था। उस समय जब ट्रोल्स ने कंगना को संस्कृति और सभ्यता का पाठ पढ़ाने की कोशिश की थी, तो 'क्वीन' ने दो टूक शब्दों में जवाब देते हुए कहा था कि एक महिला क्या पहनती है और क्या नहीं, यह पूरी तरह से उसका अपना फैसला है और किसी को इसमें दखल देने का कोई हक नहीं है।
बुडापेस्ट में जब खुद कंगना ने पहनी थी शीर ब्रालेट: 'धाकड़' की रैप-अप पार्टी का वो वायरल लुक
यह पूरा मामला साल 2021 का है, जब कंगना रनौत हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में अपनी एक्शन थ्रिलर फिल्म 'धाकड़' की शूटिंग पूरी करने के बाद पूरी क्रू और निर्देशक रजनीश घई के साथ एक ग्रैंड रैप-अप पार्टी कर रही थीं। सनसेट की खूबसूरत पृष्ठभूमि और झील के किनारे आयोजित इस पार्टी के लिए कंगना ने एक बेहद स्टाइलिश, ग्लैमरस और रिवीलिंग आउटफिट का चयन किया था।
कंगना ने सफेद रंग की लेस वाली शीर (पारदर्शी) ब्रालेट और हाई-वेस्ट फॉर्मल पैंट पहनी थी, जिसमें उनके गले में एक विंटेज गोल्डन चेन और बालों का क्लासिक बन बना हुआ था। कंगना ने जब इस पार्टी की सिजलिंग तस्वीरें अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर कीं, तो देखते ही देखते वे तस्वीरें सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गईं। जहां एक तरफ फैशन प्रेमियों ने कंगना के इस कॉन्फिडेंट, बोल्ड और इंटरनेशनल लुक की जमकर तारीफ की, वहीं इंटरनेट पर रूढ़िवादी सोच रखने वाले लोगों और ट्रोल्स की एक पूरी फौज ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया।
"महिला क्या पहनती है, यह आपका बिजनेस नहीं": जब ट्रोल्स पर बरसी थीं 'क्वीन'
सोशल मीडिया पर जब यूजर्स ने कंगना रनौत पर 'दोहरा चरित्र' (Double Standards) अपनाने और भारतीय संस्कृति के खिलाफ कपड़े पहनने का आरोप लगाना शुरू किया, तो कंगना चुप बैठने वालों में से नहीं थीं। कंगना ने ट्रोल्स को मुंहतोड़ जवाब देने के लिए अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर वही तस्वीरें दोबारा पोस्ट कीं और एक ऐसा कड़ा संदेश लिखा जिसने हर आलोचक की बोलती बंद कर दी।
कंगना ने लिखा, "मैं सिर्फ इस तथ्य पर जोर देना चाहती हूं कि एक महिला क्या पहनती है और क्या पहनना भूल जाती है, यह पूरी तरह से उसका अपना मामला है... यह आपका कोई बिजनेस नहीं है।" इसके साथ ही उन्होंने मुस्कुराती हुई इमोजी लगाते हुए लिखा कि उन्होंने जो कहना था वह कह दिया है और अब वे आराम से अपने काम पर जा सकती हैं। कंगना के इस बेबाक बयान ने उस वक्त महिला सशक्तिकरण, बॉडी पॉजिटिविटी और अपनी पसंद के कपड़े पहनने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal Freedom) के पक्ष में एक बहुत बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया था।
प्राचीन पेंटिंग शेयर कर दिया था सनातन धर्म पर ज्ञान देने वालों को जवाब
ब्रालेट विवाद के दौरान जब कुछ लोगों ने कंगना के सनातन धर्म और भारतीय परंपराओं के प्रति उनके झुकाव को लेकर सवाल खड़े किए, तो कंगना ने इतिहास और भारतीय कला का ऐसा साक्ष्य पेश किया जिसे देखकर सभी हैरान रह गए। कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर 18वीं-19वीं सदी की एक ऐतिहासिक भारतीय पेंटिंग साझा की, जिसमें प्राचीन और पारंपरिक भारतीय वेशभूषा पहने एक महिला दिखाई दे रही थी, जिसने ऊपरी हिस्से पर बिना किसी आधुनिक ब्लाउज के केवल पारंपरिक आभूषण और उत्तरीय वस्त्र धारण किया हुआ था।
इस पेंटिंग को शेयर करते हुए कंगना ने धर्म के तथाकथित ठेकेदारों को आड़े हाथों लेते हुए लिखा था, "जो लोग मुझे सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति का ज्ञान दे रहे हैं, कृपया यह समझें कि आपकी सोच सनातनी नहीं बल्कि अब्राहमिक (पश्चिमी और विक्टोरियन रूढ़िवादिता) जैसी लग रही है।" कंगना का तर्क था कि प्राचीन भारतीय सभ्यता में शारीरिक सुंदरता और पहनावे को कभी संकीर्णता या अपराध बोध के चश्मे से नहीं देखा गया; कपड़ों को लेकर शर्म और पाबंदियां वास्तव में विदेशी आक्रांताओं और विक्टोरियन नैतिकता की देन हैं।
कृति सेनन के ऐड विवाद पर कंगना का ताजा रुख: "महिलाओं को पूरी आजादी है, लेकिन..."
हाल ही में एक राष्ट्रीय टेलीविजन न्यूज चैनल के प्राइम-टाइम शो में जब कंगना रनौत से कृति सेनन के रक्षाबंधन विज्ञापन और उनके ब्रालेट लुक को लेकर सवाल पूछा गया, तो कंगना ने अपनी स्थिति को और अधिक स्पष्ट किया। कंगना ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी महिला या अभिनेत्री की व्यक्तिगत पसंद पर हमला करना नहीं था।
कंगना ने कहा, "जिस तरह की फिल्मों और निजी जिंदगी में हम अभिनेत्रियों को देखते हैं, उन्हें कोई कुछ भी पहनने से नहीं रोक रहा है। किसे क्या पड़ी है? एक महिला रक्षाबंधन पर या किसी भी दिन जो चाहे वह पहनने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।"
कंगना ने आगे स्पष्ट किया कि उनका विरोध केवल कपड़े (ब्रालेट) तक सीमित नहीं था, बल्कि उनका मुख्य सरोकार उस विज्ञापन में भारतीय त्योहार के संपूर्ण परिवेश और सौंदर्यशास्त्र (Aesthetic Expression) के गायब होने को लेकर था। कंगना के अनुसार, विज्ञापन में घर का माहौल, माता-पिता, पूजा की थाली, हलवा-पूरी, तिलक, अक्षत और दीपक जैसे वे मूलभूत तत्व मौजूद नहीं थे जो रक्षाबंधन की आत्मा होते हैं।
पर्सनल चॉइस बनाम कल्चरल कॉन्टेक्स्ट: दोनों स्थितियों में क्या है बुनियादी फर्क?
कंगना रनौत के इन दोनों बयानों का यदि समाजशास्त्रीय और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जाए, तो यह 'व्यक्तिगत स्वतंत्रता' (Personal Space) और 'अनुष्ठानिक संदर्भ' (Ritual Context) के बीच के अंतर को दर्शाता है:
पार्टी और पर्सनल लाइफ में बोल्डनेस: बुडापेस्ट में 'धाकड़' की पार्टी एक आधुनिक, निजी और पेशेवर फिल्म की सफलता का जश्न था, जहां वेस्टर्न और ग्लैमरस लिबास पहनना उस माहौल के पूरी तरह अनुकूल था। वहां कंगना का यह कहना कि 'महिला क्या पहने यह उसका अपना फैसला है', पूरी तरह तर्कसंगत बैठता है।
पारंपरिक विज्ञापन और त्योहारी संदर्भ: वहीं रक्षाबंधन या किसी भी धार्मिक-सांस्कृतिक पर्व पर आधारित विज्ञापनों में दर्शक उस अनुष्ठान की सात्विकता और पारिवारिक आत्मीयता की उम्मीद करते हैं। कंगना का हालिया तर्क इसी बात पर केंद्रित रहा है कि जब आप किसी त्योहार का सार्वजनिक प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं, तो उसकी पारंपरिक मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी और आधुनिक नारीवाद पर छिड़ी बहस
कंगना के पुराने और नए बयानों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर भारतीय महिलाओं के पहनावे, आधुनिक नारीवाद और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। कई यूजर्स का मानना है कि महिलाओं के परिधानों को लेकर समाज का रवैया अक्सर दोहरे मापदंडों से भरा होता है। चाहे वह कंगना रनौत हों या कृति सेनन, जब भी कोई अभिनेत्री अपने कंफर्ट और पसंद के कपड़े चुनती है, तो उस पर आसानी से सांस्कृतिक पतन का ठप्पा लगा दिया जाता है।
दूसरी तरफ, फैशन और समाजशास्त्र के जानकारों का कहना है कि 21वीं सदी की भारतीय महिला परंपरा और आधुनिकता दोनों को अपनी शर्तों पर जीने की क्षमता रखती है। वह साड़ी में भी उतनी ही सशक्त और शालीन है जितनी कि किसी फॉर्मल सूट या ब्रालेट में। कंगना का यह थ्रोबैक वाकया इस बात की सबसे मजबूत मिसाल है कि एक महिला को किसी तयशुदा खांचे में कैद नहीं किया जा सकता; वह अपने हर रूप, अपने हर फैसले और अपने हर अधिकार की मालिक खुद होती है।