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October 09 2026 06:28 pm

फिल्म सेट पर जब नाना पाटेकर के पेट में घुस गया था असली चाकू, खून से लथपथ होने के बाद भी दिया था यह ऐतिहासिक शॉट

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अपनी रीयलिस्टिक और रोंगटे खड़े कर देने वाली अदायगी के लिए मशहूर नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई ऐसे सीन दिए हैं जिन्हें देखकर दर्शक दंग रह जाते हैं। लेकिन पर्दे पर दिखने वाले इस रोमांच के पीछे एक ऐसा खौफनाक सच भी छिपा है, जब एक फिल्म के एक्शन सीन के दौरान अभिनेता बाल-बाल मौत के मुंह से बचे थे। यह घटना एक फिल्म की शूटिंग के दौरान घटी, जहां एक बेहद आक्रामक फाइट सीक्वेंस फिल्माया जा रहा था। सीन में साथी कलाकार को नाना पाटेकर के पेट पर नकली चाकू (डमी नाइफ) से हमला करने का अभिनय करना था, लेकिन सेट पर हुई एक भयानक लापरवाही ने इस सीन को असली हादसे में बदल दिया।

एक्शन डायरेक्टर के निर्देश पर सीन शुरू हुआ और पूरी टीम कैमरे के पीछे सांस थामे खड़ी थी। जैसे ही विरोधी किरदार ने नाना पर वार किया, किसी तकनीकी या लॉजिस्टिक चूक की वजह से डमी की जगह सेट पर रखा असली धारदार चाकू इस्तेमाल हो गया। वार इतना सटीक और जोरदार था कि चाकू का नुकीला हिस्सा सीधे नाना पाटेकर के पेट में गहरे तक धंस गया। पलक झपकते ही सेट पर सन्नाटा पसर गया और अभिनेता के कुर्ते से खून का फव्वारा फूट पड़ा।

खून से लथपथ होने के बावजूद नहीं रोका शॉट, कैमरे के सामने डटे रहे नाना

चाकू लगते ही असहनीय दर्द का झटका लगा, लेकिन नाना पाटेकर ने अपनी एकाग्रता नहीं टूटने दी। वे भली-भांति जानते थे कि इस सीन के लिए काफी बड़ा सेटअप तैयार किया गया था और डायरेक्टर ने अभी 'कट' नहीं बोला था। अपने अभूतपूर्व अभिनय समर्पण का परिचय देते हुए नाना ने दर्द को अपने चेहरे के एक्सप्रेशन में बदल दिया और खून बहते रहने के बावजूद डायलॉग पूरा बोला। उनके चेहरे पर उभरी असल पीड़ा और चीख को देखकर पहले तो कुछ पलों के लिए क्रू मेंबर्स को लगा कि यह उनकी बेहतरीन एक्टिंग का हिस्सा है।

जैसे ही निर्देशक ने 'कट' बोला, नाना पाटेकर लड़खड़ा कर गिर पड़े। तब जाकर यूनिट को अहसास हुआ कि यह कोई अभिनय नहीं, बल्कि एक गंभीर और जानलेवा दुर्घटना थी। सेट पर अफरा-तफरी मच गई, साथी कलाकार और निर्देशक उनके पास दौड़े और आनन-फानन में मेडिकल किट से खून रोकने की कोशिश की गई। घाव गहरा होने के कारण तुरंत एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया।

अस्पताल में लगे कई टांके, डॉक्टरों ने कहा था- 'बच गई जान'

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत मोर्चा संभाला और सर्जरी थिएटर में घाव की जांच की। डॉक्टरों का कहना था कि चाकू पेट के बेहद नाजुक हिस्से के करीब लगा था, लेकिन गनीमत यह रही कि उसने किसी मुख्य आंतरिक अंग को गंभीर रूप से नहीं काटा। अगर चाकू कुछ मिलीमीटर और अंदर चला जाता, तो यह चोट जानलेवा साबित हो सकती थी। डॉक्टरों ने कई टांके लगाकर घाव को सील किया और उन्हें सख्त बेड रेस्ट की सलाह दी।

इस भयानक हादसे के बाद भी नाना पाटेकर के चेहरे पर कोई शिकन या किसी के प्रति नाराजगी नहीं थी। उन्होंने साथी कलाकार या क्रू को दोष देने के बजाय इसे काम का एक जोखिम माना। जब वे ठीक होकर कुछ हफ्तों बाद वापस सेट पर लौटे, तो पूरी यूनिट ने खड़े होकर तालियों के साथ उनका स्वागत किया। नाना ने उस सीन को दोबारा डब किया और जब वह दृश्य फिल्म में आया, तो दर्शकों को अपनी कुर्सियों से बांधकर रख गया।

'परिंदा' में भी आग से जल गया था शरीर, जोखिमों से भरा रहा है नाना का सफर

चाकू लगने की यह घटना इकलौती नहीं थी जब नाना पाटेकर ने कैमरे के सामने अपनी जान जोखिम में डाली हो। इससे पहले विधु विनोद चोपड़ा की क्लासिक फिल्म 'परिंदा' (1989) के क्लाइमैक्स सीन में भी उनके साथ दिल दहला देने वाला हादसा हुआ था। उस सीन में उनके किरदार 'अन्ना' को आग में जलना था। असली आग के बीच शूट करते वक्त लपटें नियंत्रण से बाहर हो गईं और नाना पाटेकर गंभीर रूप से झुलस गए थे। उनके हाथ, चेहरे और पीठ की त्वचा जल गई थी, जिसके चलते उन्हें करीब एक साल तक फिल्मों से दूर रहकर इलाज कराना पड़ा था।

नाना पाटेकर हमेशा से बॉडी डबल का इस्तेमाल करने के सख्त खिलाफ रहे हैं। वे अपने हर खतरनाक स्टंट और एक्शन दृश्य को खुद अंजाम देने में विश्वास रखते हैं, चाहे उसके लिए कोई भी शारीरिक कीमत क्यों न चुकानी पड़े। सिनेमा के प्रति उनका यही बेखौफ जुनून और समर्पण उन्हें भारतीय सिनेमा के उन गिने-चुने लेजेंड्स की कतार में खड़ा करता है, जिनकी मिसाल पूरी इंडस्ट्री आज भी देती है।