विराट कोहली का बड़ा धमाका: 'वर्कलोड मैनेजमेंट' को लेकर कही ऐसी बात, मच गया बवाल

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India News Live,Digital Desk : भारतीय क्रिकेट जगत में इन दिनों 'वर्कलोड मैनेजमेंट' एक ऐसा शब्द बन चुका है, जिसकी चर्चा हर मैच के बाद होती है। जसप्रीत बुमराह से लेकर रविंद्र जडेजा तक, हर बड़े खिलाड़ी को आराम देने के लिए इस फॉर्मूले का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन इसी बीच टीम इंडिया के 'किंग कोहली' यानी विराट कोहली ने इस पर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने क्रिकेट पंडितों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है।

आरसीबी इनोवेशन लैब के इंडियन स्पोर्ट्स समिट (बेंगलुरु) में बोलते हुए विराट कोहली ने साफ शब्दों में कह दिया कि उनकी डिक्शनरी में वर्कलोड मैनेजमेंट जैसी कोई चीज नहीं है। उनका मानना है कि अगर कोई खिलाड़ी शुरुआत से ही वर्कलोड मैनेज करने लगेगा, तो वह कभी भी अपनी असली और पूर्ण क्षमता (Potential) को हासिल ही नहीं कर पाएगा।

करियर की शुरुआत में वर्कलोड मैनेजमेंट क्यों है खतरनाक?

विराट कोहली ने अपने खेलने के तरीके और मानसिकता को साझा करते हुए कहा, "मैं वर्कलोड को मैनेज करने में बिल्कुल यकीन नहीं रखता, खासकर तब जब आप अपने करियर में आगे बढ़ रहे हों। आपको सबसे पहले यह जानना होगा कि आपकी अधिकतम सीमा (Maximum Limit) क्या है। जब आप अपनी लिमिट जान जाते हैं, तब आपको समझ आता है कि संतुलन कैसे बनाना है और कब खुद को थोड़ी ढील देनी है।"

कोहली ने युवा खिलाड़ियों को नसीहत देते हुए आगे कहा, "लेकिन अगर आप अपने करियर के शुरुआती दौर में ही वर्कलोड को मैनेज करना शुरू कर देंगे, तो आप कभी अपनी फुल पोटेंशियल तक पहुंच ही नहीं पाएंगे। मैं हमेशा इसी आक्रामक सोच के साथ काम करता हूं।"

टी20 और टेस्ट से संन्यास के बाद क्या है कोहली की 'भूख'?

37 साल के हो चुके विराट कोहली अब टी20 इंटरनेशनल और टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और फिलहाल सिर्फ वनडे (ODI) फॉर्मेट और आईपीएल में नजर आते हैं। जब समिट में उनसे पूछा गया कि इतने सालों के बाद भी उन्हें मैदान पर दौड़ने और परफॉर्म करने की प्रेरणा कहाँ से मिलती है, तो किंग कोहली का एक शब्द में जवाब था— "भूख"।

कोहली ने आज के दौर के क्रिकेट और पैसों के कनेक्शन पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, "आजकल बहुत से लोग भूख को सिर्फ पैसे से जोड़कर देखते हैं। हां, पैसा एक बड़ा फैक्टर है क्योंकि आईपीएल जैसे फॉर्मेट में 20 गेंदों में 40-50 रन बनाकर आपको शोहरत और मोटी रकम मिल सकती है। कुछ लोग सोच सकते हैं कि उन्हें लंबे समय तक दबाव झेलने की जरूरत नहीं है, बस जाओ और गेंद की धुनाई करो। लेकिन मेरी सोच अलग है।"

उन्होंने आगे कहा, "अगर आप 15-20 साल तक देश के लिए खेलना चाहते हैं और क्रिकेट जगत के दिग्गजों से सम्मान पाना चाहते हैं, तो आपके अंदर एक अलग भूख होनी चाहिए। आपको खुद से कहना होगा कि यह सफर बहुत मुश्किल होने वाला है, लेकिन मैं अगले 10-15 साल तक यही करने के लिए तैयार हूं।"

बुरे दौर में राहुल द्रविड़ और विक्रम राठौर बने संकटमोचक

विराट कोहली ने इस दौरान अपने करियर के सबसे खराब पैच (2021-2022) को भी याद किया, जब टेस्ट क्रिकेट में उनके बल्ले से रन नहीं निकल रहे थे। साल 2021 में उनका टेस्ट औसत 28.21 और 2022 में महज 26.5 का रह गया था।

कोहली ने बताया कि उस मुश्किल दौर से उबरने में पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ और पूर्व बैटिंग कोच विक्रम राठौर ने उनकी सबसे बड़ी मदद की थी। कोहली ने भावुक होते हुए कहा, “राहुल भाई और विक्रम राठौर ने मेरे रनों के सूखे को खत्म करने में जो भूमिका निभाई, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता। मैं जब भी उनसे मिलता हूं, अपने दिल की गहराइयों से उनका धन्यवाद करता हूं।”