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May 16 2026 05:08 pm

Vat Savitri 2026: वट सावित्री व्रत पर सुहागिनें भूलकर भी न करें ये गलतियां, बरसेगी यमराज और शनिदेव की कृपा

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India News Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व है। यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है। साल 2026 में यह व्रत 15 मई (ज्येष्ठ अमावस्या) को मनाया जाएगा। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे।

वट सावित्री व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि इन नियमों में चूक हो जाए, तो व्रत का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता। आइए जानते हैं क्या करें और किन बातों से बचें।

वट सावित्री व्रत के जरूरी नियम

वट सावित्री की पूजा में वट यानी बरगद के पेड़ का विशेष महत्व है क्योंकि इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास माना जाता है।

वट वृक्ष की परिक्रमा: पूजा के दौरान बरगद के पेड़ के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए 7, 11, 21, 51 या 108 बार परिक्रमा करना शुभ माना जाता है।

भीगे चने का प्रसाद: इस व्रत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनने के बाद भीगे हुए चने और फल का प्रसाद बांटना और खुद ग्रहण करना आवश्यक है।

श्रृंगार का महत्व: सुहागिन महिलाओं को इस दिन पूर्ण श्रृंगार करना चाहिए। हाथों में मेहंदी और पैरों में महावर लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।

भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां

रंगों का चुनाव: पूजा के दौरान काले, नीले या सफेद रंग के कपड़े पहनने से बचें। इस दिन लाल, पीला, हरा या गुलाबी रंग पहनना शुभ होता है।

वट वृक्ष को नुकसान: पूजा करते समय ध्यान रखें कि बरगद के पेड़ की टहनियों या पत्तियों को नुकसान न पहुंचे। पेड़ को काटना या उसकी टहनी तोड़ना वर्जित है।

कथा के बिना अधूरा व्रत: वट सावित्री की कथा सुने बिना यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता। यदि आप मंदिर नहीं जा पा रही हैं, तो घर पर ही कथा अवश्य पढ़ें।

विवाद से बचें: व्रत के दिन मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें और न ही पति या घर के बड़ों से वाद-विवाद करें। इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है।

पुराना श्रृंगार: यदि संभव हो तो इस दिन नई चूड़ियां और नया सिंदूर इस्तेमाल करें। सुहाग की सामग्री को किसी अन्य के साथ साझा करने से बचें।

शनि दोष से मुक्ति के उपाय

ज्येष्ठ अमावस्या को शनि जयंती भी मनाई जाती है। चूंकि वट सावित्री व्रत इसी दिन पड़ता है, इसलिए बरगद के पेड़ की पूजा करने से शनि देव भी प्रसन्न होते हैं। जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें वट वृक्ष के नीचे दीपक जलाकर शनि चालीसा का पाठ करना चाहिए।