अमेरिका-ईरान तनाव: ट्रंप ने ठुकराया तेहरान का नया प्रस्ताव; 'शांति वार्ता' पर फिर मंडराए संकट के बादल
India News Live,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है। हफ्तों से चले आ रहे सीजफायर (संघर्ष-विराम) के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर कोई बड़ी सफलता हाथ नहीं लग रही है। शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया कि वह ईरान द्वारा भेजे गए शांति वार्ता के नए प्रस्ताव से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं।
ट्रंप का रुख: "शर्तें मंजूर नहीं"
पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ईरान के रुख पर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, "ईरान इस समय जो प्रस्ताव दे रहा है, मैं उससे खुश नहीं हूं।" ट्रंप का यह बयान उन अटकलों पर विराम लगाता है जिनमें माना जा रहा था कि सीजफायर के बाद दोनों देश जल्द ही किसी स्थायी समझौते पर पहुंच जाएंगे। ट्रंप ने संकेत दिया कि जब तक उनकी कड़ी शर्तें पूरी नहीं होतीं, अमेरिका पीछे नहीं हटेगा।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और नया ड्राफ्ट
ईरान ने हाल ही में पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा था।
दस्तावेज: ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यह ड्राफ्ट गुरुवार शाम को पाकिस्तानी मध्यस्थों को सौंपा गया था।
मुख्य भूमिका: रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच संवाद का मुख्य और सबसे विश्वसनीय माध्यम बना हुआ है।
विफल कोशिश: इससे पहले 11 अप्रैल को इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत की कोशिश हुई थी, जो बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई थी।
ईरान का पलटवार: "अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल"
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने सरकारी टेलीविजन पर कहा कि ईरान का मुख्य लक्ष्य 'स्थायी शांति' है, लेकिन वे अपनी संप्रभुता और शर्तों से समझौता नहीं करेंगे। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के इरादों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत करता है और दूसरी तरफ सैन्य दबाव और प्रतिबंधों का सहारा लेता है। ईरान का मानना है कि अमेरिका की मांगें "अतार्किक" हैं और इस रवैये के साथ उन पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
युद्ध विराम और आगे की राह
भले ही सीमा पर सक्रिय गोलीबारी रुकी हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच 'शीत युद्ध' (Cold War) जैसे हालात बने हुए हैं।
| वर्तमान स्थिति | विवरण |
|---|---|
| सीजफायर | 8 अप्रैल से लागू है, लेकिन तनाव बरकरार है। |
| मध्यस्थता | पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचा रहा है। |
| मुख्य विवाद | होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी और परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी शर्तें। |
| ट्रंप का स्टैंड | अमेरिका 'मैक्सिमम प्रेशर' की नीति पर अडिग है। |
पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान इस कूटनीतिक गतिरोध को तोड़ने में सफल होगा या फिर यह तनाव एक बार फिर सक्रिय युद्ध में तब्दील हो जाएगा। फिलहाल, ट्रंप के कड़े रुख ने शांति की राह को और मुश्किल बना दिया है।